Special News : संस्कृति पर्व के सनातन आंदोलन का 7वें वर्ष में दिव्य प्रवेश

  • मौनी अमावस्या पर कुंभ में 34 वें विशेषांक के ई संस्करण का लोकार्पण
  • सनातन भारत के निर्माण में संस्कृति पर्व की भूमिका अद्भुत : जीतेंद्रानंद सरस्वती
  • कुंभ अंक के माध्यम से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तथ्य सामने आ रहे : महंत रवींद्र पुरी 
  • कुंभ में हताहत श्रद्धालुओं के प्रति संवेदना

विशेष संवाददाता

प्रयागराज। भारत संस्कृति न्यास के प्रकल्प के रूप में आज संस्कृति पर्व मासिक पत्रिका के माध्यम से एक महान सांस्कृतिक सनातन आंदोलन का सातवें वर्ष में प्रवेश अद्भुत है। सनातन भारत के निर्माण में संस्कृति पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर भूमिका का निर्वहन कर के प्रमाणित किया है कि मानवता की रक्षा के लिए सनातन से बढ़ कर कुछ भी नहीं है। यह बातें आधुनिक भारत में संत परंपरा के क्रांति नायक स्वामी जीतेंद्रानंद  सरस्वती ने कही हैं। स्वामी  संस्कृति पर्व के 34 वें विशेषांक के रूप में कुंभ अंक के ई संस्करण के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष  महंत रवींद्र पुरी जी ( महानिर्वाणी) और अखिल भारतीय संत समिति तथा गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती जी के कर कमलों से मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संस्कृति पर्व के कुंभ विशेषांक के ई संस्करण का लोकार्पण आज गंगा महासभा के शिविर के मंच से संपन्न हुआ। अत्यंत सादे समारोह में उपस्थित संतों, विद्वानों और लोगों ने कुंभ में आज हताहत हुए लोगों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की है। यह कार्यक्रम पूर्व घोषित होने के कारण इसे औपचारिक रूप से संपन्न किया गया।

इस अवसर पर महंत रवींद्र पुरी  ( महानिर्वाणी) ने कहा कि आचार्य संजय तिवारी के संपादकत्व में संस्कृति पर्व ने कुंभ अंक के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को बहुत सलीके से संयोजित किया है। मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर कुंभ पर केंद्रित शास्त्रीय अधिकृत साहित्य से सुसज्जित संस्कृति पर्व के विशेष अंक का लोकार्पण कुंभ में ही संपन्न होना बहुत शुभ और मंगलकारी है। इस अंक की सभी को प्रतीक्षा थी। इस अवसर पर पत्रिका के सह संपादक और  काशी विद्वत परिषद के तथा गंगा महासभा के संगठन मंत्री आचार्य गोविंद शर्मा जी ने बताया कि इस पत्रिका के प्रधान संपादक जान गुण सागर श्रीहनुमान  ही हैं। दंडीस्वामी पूज्य जीतेंद्रानंद  सरस्वती के मार्गदर्शन में संयोजित यह अंक कुंभ के अधिकृत साहित्य के रूप में उपलब्ध हो रहा है। उल्लेखनीय है कि हनुमान  की असीम कृपा और प्रेरणा से वर्ष 2018 में शुरू हुई संस्कृति पर्व के सनातन आंदोलन की यात्रा के छह वर्ष पूरे हो चुके। यह अंक सातवें वर्ष का एक प्रकार से प्रवेशांक भी है। गत प्रयाग कुंभ में ही इसके प्रथम चार अंकों का लोकार्पण  गंगामहभा के मंच से सभी पूज्य शंकराचार्यों और जगद्गुरुओं के पावन कर कमलों से संपन्न हुआ था। इस बार प्रयाग पूर्ण कुंभ के अवसर पर संस्कृति पर्व ने एक अतिविशिष्ट अंक की योजना बनाई गई थी जिसमें कुंभ से संबंधित विशिष्ट एवं दुर्लभ सामग्री संयोजित की जा रही है। इसके लिए अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री पूज्य स्वामी जीतेंद्रानंद जी सरस्वती, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य स्वामी रविन्द्र पुरी जी, काशी विद्वत्परिषद , महामना जी के स्थापित पुष्प गंगा महासभा के साथ ही देश के ख्यातिलब्ध विद्वानों के सहयोग और परामर्श से सामग्री का चयन किया गया है। जैसा कि सर्वविदित है, पत्रिका के संपादकीय संरक्षक पद्मश्री आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी जी हैं। मुख्य संरक्षक  शिवप्रताप  शुक्ल, महामहिम राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश हैं। प्रबंध संपादक प्रख्यात समाजसेवी  बी के मिश्र जी हैं। संपादक आचार्य संजय तिवारी हैं।

आचार्य गोविंद शर्मा ने कहा कि हम सभी संपादकीय परिषद के सदस्य निमित्त मात्र हैं। संस्कृति पर्व की इन छह वर्षों की यात्रा में सामान्य अंकों के अलावा 33 विशेषांक प्रकाशित हो चुके हैं। संस्कृति पर्व के महामना अंक का लोकार्पण देश के गृहमंत्री  अमित शाह जी ने किया था। अक्टूबर नवंबर 2024 के संयुक्तांक का लोकार्पण हिंदी साहित्य परिषद के 47वें अधिवेशन में बुंदेलखंड विश्व विद्यालय में किया गया जिसमें अनेक विद्वानों के साथ ही उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री की विशेष उपस्थिति रही। गत वर्ष 22 जनवरी को संस्कृति पर्व ने चक्रस्थ अयोध्या के नाम से एक बहुत महत्वपूर्ण अंक का प्रकाशन किया था।  जिसको  अयोध्या  में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रसारित किया गया। सनातन प्रेमियों और अन्वेषकों के लिए यह अंक बहुत ही महत्वपूर्ण होने जा रहा है। आस्था और विश्वास के इस पुण्य क्षेत्र में हताहत श्रद्धालुओं को श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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