वर्ष 2024: गुरुवार को धूमधाम से मनाया जाएगा छठ महापर्व, शुक्रवार सुबह तड़के उगते सूर्य को भक्तगण करेंगे सलाम

  • डाला छठ आजः महिलाएं घर की खुशहाली और संतान की सलामती के लिए रखती हैं व्रत
  • कब है छठ पूजा और कब होगा नहाय-खाय, इसके अलावा जानिए कब है खरना और कब होगा समाप्ति

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। हर साल की तरह इस वर्ष भी छठ पूजा का पर्व कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से मनाया जाता है। ये व्रत संतान की लंबी उम्र, उसके स्वास्थ्य, उज्जवल भविष्य, दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। ये व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए इस व्रत को रख जाता है। इस दौरान व्रती चौबीस घंटो से अधिक समय तक निर्जल व्रत रखता है। छठ पर्व का मुख्य व्रत षष्ठी तिथि को रखा जाता है, लेकिन ये पर्व चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तिथि को प्रातः सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद समाप्त किया जाता है। छठ महापर्व नहाय – खाय से आरंभ होता है और खरना के पश्चात व्रत शुरू किया जाता है। आस्था का महापर्व छठ हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है।

छठ पूजा की विशेष धार्मिक मान्यता होती है। इस कठिन व्रत को महिलाएं घर की खुशहाली और संतान की सलामती के लिए रखती हैं। इसे सूर्य षष्ठी, छठ, छठी और डाला छठ जैसे नामों से भी जाना जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है। इस साल छठ पूजा का महापर्व सात नवंबर 2024 को है। बताते चलें कि लोक आस्था का ये महापर्व चार दिन तक चलता है। इस साल भी दिवाली के बाद से सात नवंबर तक चलेगा। कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

 

छठ पूजा कब है?
हर साल छठ पूजा दिवाली से 6 दिन बाद की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 7 नवंबर की देररात 12 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 8 नवंबर की देररात 12 बजकर 34 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में 7 नवंबर, गुरुवार के दिन ही संध्याकाल का अर्घ्य दिया जाएगा। और सुबह का अर्घ्य अगले दिन 8 नवंबर को दिया जाना है।

नहाय-खाय कब होगा?

इस साल नहाय-खाय 5 नवंबर, मंगलवार के दिन होगा। पंचांग के अनुसार, नहाय खाय कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थि तिथि पर किया जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं गंगा या अन्य किसी पवित्र नदी में स्नान और ध्यान के बाद सूर्य देव की पूजा करती हैं।

खरना कब है?

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर खरना मनाया जाता है। खरना के दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और छठी मैया की पूजा में लीन रहती हैं। इस साल खरना 6 नवंबर, बुधवार के दिन है।

डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देना

सात नवंबर के दिन छठ पूजा का तीसरा दिन है जिसमें डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसकी अगली सुबह 8 नवंबर, शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाना है। इसके साथ ही छठ पूजा की समाप्ति हो जाएगी।

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