एक बार और चोट पहुँचाने की कोशिश की आमिर खान ने… ‘महाराज’ को बनाया माध्यम

वैष्णव सम्प्रदाय और सनातन धर्म के ऊपर कुठाराघात है फ़िल्म “महाराज”

केवल हिंदू समाज को बदनाम करने के लिए बनाई गई फ़िल्म, नहीं होना चाहिए- संजय भट्ट

भारतीय फिल्म जगत में कुछ लोग विवादों में जान-बूझकर बने रहना चाहते हैं। उनको लगता है कि विवादों के बगैर उनको शोहरत हासिल नहीं हो सकती। कुछ लोग ऐसे हैं तो विवादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिंदू हितों पर कुठाराघात भी करते हैं। साथ ही उसे अभिव्यक्ति की आज़ादी और सिनेमैटिक लिबर्टी के नाम पर दर्शकों के सामने परोसकर अरबों-खरबों कमाना चाहते हैं। उसी में एक नाम है आमिर खान का। ये हर बार अपनी फ़िल्म को लेकर विवाद खड़ा करते हैं और हिंदू धर्म को चोट पहुँचाते हैं। सनातन समाज के राजीव लोचन ने इस फ़िल्म के प्रसारण की कड़े शब्दों में निंदा की है और सरकार से अपील की है कि इस तरह की फ़िल्में क़तई न प्रसारित होने पाएँ नहीं तो सनातन धर्म को बचाना काफ़ी मुश्किल हो जाएगा।
आमिर खान के साथ इस बार ऐसी ही धृष्टता करने की हिमाकत यश राज प्रोडक्शंस ने नेट फ्लिक्स के साथ मिलकर किया है। दरअसल यशराज फिल्म्स और नेटफ्लिक्स ने महान वैष्णव सम्प्रदाय के ऊपर मनगढ़ंत तरीके से बेबुनियाद चीजों को जोड़ते हुए एक फ़िल्म “महाराज” बनाई है। इस फ़िल्म के माध्यम से आमिर खान ने अपने बेटे जुनैद को लॉन्च करने की प्लानिंग भी कर ली है। अब आमिर खान का नाम आए तो बिना विवादों के यह इंसान फिल्में बना ही नहीं सकता।
इसके पहले भी आमिर की फ़िल्म पीके, थ्री इडियट जैसी फिल्में भी विवादों का हिस्सा बनी थी, जिसमें इनकी हरकतें सिर्फ हिन्दू समाज को बदनाम करने वाली ही थीं। जबकि इन्होंने कभी भी मुखर होकर या किसी भी फ़िल्म के माध्यम से मुस्लिम समाज की कुरीतियों के ऊपर एक डॉक्युमेंट्री तक बनाना उचित नहीं समझा है। इसी बात को लेकर इस बार वैष्णव सम्प्रदाय को मानने वाले अनुयायियों ने गुजरात उच्च न्यायालय में फ़िल्म महाराज की स्ट्रीमिंग को लेकर एक याचिका दायर की है। इस अपील पर सुनवाई करते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने यशराज फिल्म्स और नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी करते हुए स्ट्रीमिंग को तत्काल रोकने का आदेश पारित कर दिया। फ़िल्म की स्ट्रीमिंग आज से होना निश्चित हुआ था।

आनंद प्रज्ञा टीवी OTT के संस्थापक और मालिक संजय भट्ट उसी वैष्णव परम्परा को मानने वाले एक आध्यात्मिक प्रवक्ता हैं। जिन्हें वैष्णव सम्प्रदाय और सनातन समाज राजीव लोचन महराज श्री के नाम से जानता है। वैष्णव परम्परा को मानने वाले राजीव लोचन जी महाराज वल्लभ कुल से बेहद नजदीकी सम्बंध रखते हैं। वो कहते हैं कि भट्ट तैलंग गोस्वामी परिवार और वल्लभ कुलीन परिवारों में वैवाहिक सम्बन्धों तक कि घनिष्ठता सदियों पूर्व से बनी हुई है।
संजय भट्ट का कहना है कि ये महाराज फ़िल्म जो बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक से नेटफ्लिक्स पर रिलीज करने की तैयारी कर लिए थे। इसलिए इनकी इस हरकत से सनातन धर्म को लेकर गलत मंशा ही परिलक्षित प्रतीत होती है । सदियों पहले मुगल शासकों ने सनातन पर प्रहार किया और अब उनके अनुयायी भी उसी नक्शे कदम पर कदमताल करते हुए चल रहे हैं। हम इनकी इन्हीं मंशाओं को कभी भी सफल नहीं होने देंगे।
सदियों पूर्व मुगलों ने भी गुस्ताख़ी किया तब भी सनातन मजबूती से अपने पथ पर टिका रहा। उसके बाद अंग्रेज आए और उन्होंने भी अपने तरीके से हमें बदनाम करने, हमें नीचा दिखाने और अपमानित करने के हजारों प्रयास किये। हमारे क्रांतिकारियों को उन्होंने आतंकवादी करार दिया लेकिन फिर भी सनातन के उपासकों ने उनके ऊपर विजय पताका फहराते हुए देश को उनके चंगुल से आजाद कराया। अब एक बार दोबारा धीमे ज़हर की भाँति फ़िल्म बनाकर फिर से उन्हीं कुरीतियों के भ्रामक आवरण बनाकर ये विदेशी मानसिकता के पोषक लोग हमारी सनातन संस्कृति को बदनाम करने की ओछी हरकत कर रहे हैं। हम उन्हें इस कोशिश में कतई नहीं कामयाब होने देंगे।
क्या है फ़िल्म बनाने का आधार

दरअसल फ़िल्म महाराज के बनाने वालों की दलील है की वे एक किताब से प्रेरित होकर यह फ़िल्म बना रहे हैं, बकि उस किताब की मूल अवधारणा ही हिंदुत्व के ख़िलाफ़ एक साजिश है। इसमें साल 1962 में हुए एक मुकदमें को केंद्रबिंदु में रखकर फ़िल्म की पटकथा तैयार की गई है। फ़िल्म में बिना किसी आधार के ही पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर अंग्रेज जज ने सनातनी विचारों के खिलाफ निर्णय दिया था। इस केस में यदुनाथ जी बृजनाथ जी महाराज हिन्दू समाज की पैरवी एक तथाकथित समाज सुधारक पत्रकार करसनदास मुलजी के उस आलेख के बारे में किया था, जिसमें उसने महराज पर सेक्सुअल गतिविधियों में लिप्त होने का निराधार आरोप लगाकर षड्यंत्र रचा था। इस केस में पूरा पब्लिक अटेंशन महाराज के साथ था। लेकिन उस अंग्रेज जज ने अपने मनमाने तरीके से उसके पक्ष में फैसला सुनाया था।

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