दो टूक: बढ़ता कद या पहलवानों के सामने न झुकना बना जी का जंजाल

  • कहीं BJP के जाल में तो नहीं फंस गए पूर्वांचल के ‘सिंह’ ब्रजभूषण
  • राजनीतिक करियर में कभी महिला मित्र को लेकर चर्चा में नहीं रहे कैसरगंज सांसद

राजेश श्रीवास्तव

पिछले पांच दिनों से राजधानी दिल्ली का पारा गर्मी की ओर है। पहलवानों के हुंकार से देश समेत दुनिया भर के खेल जगत में गर्मी का आलम है। जंतर-मंतर से शुरू हुए तूफान की गूंज सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया में भी सुनायी पड़ीं क्योंकि मामला देश को कई मेडल दिलाने वाले और दुनिया के पहलवानों को चित करने वाले ‘महारथियों’ से जुड़ा था। यूपी की सर्दी में यकबयक गर्मी आना लाजिमी भी था क्योंकि यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के एक बाहुबली नेता से जुड़ा हुआ है। कैसरगंज सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह के ऊपर गंभीर आरोप चस्पा किए गए हैं। देवीपाटन मंडल में अपने बूते स्थानीय निकाय, पंचायत चुनाव और एमएलसी सीटें जिताने वाले गोंडा के सिंह इस मंडल के ‘भूषण’ बन चुके हैं। लेकिन एक बात चुभती रही कि देश भर में उनके ऊपर आरोप चस्पा होते रहे लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी रही। सवाल उठता है क्या सरकार असहाय है? या फिर ब्रजभूषण से सरकार साल 2024 से पहले छुट्टी पा लेना चाहती है। सनद रहे बाढ़ के दौरान ट्रैक्टर पर बैठकर वह वह अपनी ही सरकार पर हमलावर हो गए थे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि उनसे पीछा छुड़ाने से पहले BJP उनकी ऐसी हालत कर देना चाहती है कि वह पार्टी का नुकसान न कर सकें। सवाल बहुत सारे हैं, इसके जवाब भविष्य में छुपे हुए हैं। लेकिन जो सियासी चाल समझ आ रही है उसके मुताबिक ब्रजभूषण शरण सिंह एक ऐसी शख्सियत हैं, जिनकी जरूरत भाजपा को गोंडा के आसपास के कम से कम आधा दर्जन जिलों में है। कहीं यह बड़ा कद ही उनके जी का जंजाल तो नहीं बन गया है, क्योंकि बहराइच (कैसरगंज) सांसद का नाम आज तक किसी भी महिला मित्र या महिला सहकर्मी से नहीं जुड़ा है। इस बीच इतना बड़ा आरोप न केवल चौंकाता, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि क्या बीजेपी में उनकी जगह पक्की नहीं रह गई। नवभारत टाइम्स से सम्पादक नदीम की वह पोस्ट –‘यूपी में पहलवान कर सकते हैं साइकिल की सवारी’ कुछ और ही इशारा करती है। वहीं कुछ लोगों का यह इशारा भी कि मेडल जीत चुके पहलवान ट्रायल नहीं देना चाहते थे और ब्रजभूषण सिंह उनके आगे झुके नहीं, इसलिए लोगों ने यह ड्रामा रच दिया। बताते चलें कि कुश्ती में हरिय़ाणा का दबदबा है, इसलिए उनकी मंशा है कि हमारे बीच से ही कोई अध्यक्ष बने।

गौरतलब है कि बृजभूषण राम जन्मभूमि आंदोलन के माध्यम से राजनीति में आए और बाद में उनके खिलाफ बाबरी मस्जिद विध्वंस में एक मुकदमा भी दर्ज हुआ था। 66 वर्षीय सिंह ने एक दबंग नेता की छवि के तौर पर अपनी राजनीतिक पहचान बना रखी है। वे छह बार के सांसद (एक बार सपा से) हैं और उन्होंने गोंडा, बलरामपुर का प्रतिनिधित्व किया है और अब कैसरगंज से सांसद हैं। उनके बेटे प्रतीक भूषण गोंडा सदर से दूसरी बार विधायक हैं। उनका यह रिकॉर्ड यह भी बताता है कि क्यों यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार और पार्टी के साथ अंदरूनी मतभेदों और खटास के बावजूद वह WFI अध्यक्ष और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिग के उपाध्यक्ष के रूप में पिछले दस बरसों से बने हुए हैं।

बीजेपी के ही कुछ नेता अंदरखाने ब्रजभूषण की बढ़ती शख्सियत को लेकर काफी भयभीत रहते हैं क्योंकि उन्होंने अपने रसूख से इन जिलों में अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया है। शायद यही कारण है कि बार-बार चुनाव जीतने के बावजूद पार्टी ने उन्हें संगठन और केंद्र सरकार में कोई पद नहीं देकर दूरी बना रखी है। कार्यकर्ताओं की उनकी अपनी टीम उनके चुनाव प्रचार की कमान संभालती है। सिह केवल पार्टी का सिबल लेते हैं। वह पार्टी नहीं बल्कि अपने दम पर चुनाव जीतते हैं। यह ब्रजभूषण सिंह के रसूख और आत्मविश्वास का ही असर है कि पिछले साल अक्टूबर में राज्य में बाढ़ के दौरान आदित्यनाथ सरकार की आलोचना तक कर डाली। उन्होंने प्रशासन पर खराब तैयारी करने, राहत के लिए पर्याप्त काम नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। सिंह ने यह भी कहा था कि मौजूदा सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं करती और इसे व्यक्तिगत रूप से लेती है।

अपने हिसाब से देवापाटन मंडल और आसपास के आधा दर्जन जिलों में चुनाव परिणाम तय कर लेते हैं ब्रजभूषण शरण सिंह

बीजेपी के नेता बताते हैं कि राम जन्मभूमि आंदोलन से उनके जुड़ाव और अयोध्या के आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रभाव के कारण था कि ब्रजभूषण सिह शुरू में भाजपा के ध्यान में आए। पार्टी ने पहली बार उन्हें 1991 में गोंडा लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था। उन्होंने जीत हासिल की और इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1996 में जब उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा तो पार्टी ने उनकी पत्नी केतकी देवी सिह को टिकट दिया और वह भी जीत गईं। भाजपा जानती है कि ब्रजभूषण शरण सिंह की गोंडा और उसके आसपास के क्ष्ोत्रों में क्या ताकत है। पार्टी इसीलिए उन्हें यह मौका नहीं देना चाहती है कि वह भाजपा से नाता तोंड़ें तो सपा को मजबूत कर सकें, क्योंकि वो जिस तरह से प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर हैं, उससे सरकार की किरकिरी हुई है। ऐसे में पार्टी उनसे छुट्टी तो पाना चाहती है लेकिन न तो उनको पार्टी से निकालने की स्थिति में है न टिकट काटने की स्थिति में, इसीलिए पार्टी ने पूरे मामले की जांच समिति बना दी है। अब जांच समिति जो रिपोर्ट देगी उसके बाद ब्रजभूषण का सियासी भविष्य तय होगी। लेकिन जिस तरह के यौन शोषण के आरोप उन पर लगे हैं, उससे साफ है कि यदि वह साबित हो गये तो उनको कोई भी पार्टी लेने से बचेगी।

क्योंकि यह आरोप किसी राह चलते शख्स ने नहीं लगाए हैं, बल्कि देश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों और रेसलरों ने लगाये हैं। ऐसे में ब्रजभूषण का अगला कदम क्या होगा। हालांकि खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के कड़े कदम के बाद उन्होंने सुनामी लाने का दावा करने वाली उनकी प्रेसवार्ता तो नहीं होने दी। लेकिन जिस तरह से अभी तक सरकार बच-बच कर कदम उठा रही है। उससे लगता है कि पार्टी ब्रजभूषण की शरण में है, लेकिन यह भाजपा है जो दिखता है, वह होता नहीं है। भाजपा की चालों को समझ पाना इतना आसान नहीं होता। योगी आदित्यनाथ सरकार पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप चस्पा करने के बाद यहां तक कह देना कि योगी सरकार अपने खिलाफ कुछ भी सुनना बर्दाश्त नहीं करती, छोटा आरोप नहीं है। अब देखना है जिस रसूख से वह आगे बढ़े वह कायम रहेगा या नहीं। पूरे मामले पर सपा की ओर से भी कोई बयान नहीं आया है वह भी वेट एंड वॉच की स्थिति में है। यही ब्रजभूषण की ताकत है।

WFI की सभी गतिविधियां तत्काल प्रभाव से निलंबित

सच तक पहुंचाना चाहते हैं केंद्रीय खेल मंत्री, दो टूक लहजे में दिया आदेश

दूसरी ओर केंद्रीय खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के ऊपर लगे आरोपों की जांच के लिये निगरानी समिति का गठन होने तक महासंघ के कामकाज को निलंबित कर दिया गया है। मंत्रालय ने शनिवार देर रात जारी विज्ञप्ति में इसकी जानकारी देते हुए कहा, “खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ को सूचित किया है कि महासंघ के खिलाफ एथलीटों द्वारा लगाये गये विभिन्न आरोपों की जांच के लिये एक निगरानी समिति नियुक्त करने के सरकार के फैसले के मद्देनजर WFI सभी चल रही गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दे।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि निगरानी समिति के गठित होने और डब्ल्यूएफआई की बागडोर संभालने तक महासंघ के कामकाज निलंबित रहेंगे। खेल मंत्रालय ने सभी गतिविधियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश के मद्देनजर डब्ल्यूएफआई को उत्तर प्रदेश के गोंडा में चल रहे रैंकिंग टूर्नामेंट को भी रद्द करने को कहा है। मंत्रालय ने कुश्ती महासंघ को निर्देश दिया है कि वह प्रतिभागियों से लिया गया प्रवेश शुल्क उनको वापस करे। बताते चलें कि विश्व चैंपियनशिप मेडलिस्ट विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया सहित कई सम्मानित पहलवान कुश्ती महासंघ के खिलाफ बुधवार से शुक्रवार देर रात तक प्रदर्शन पर बैठे थे। पहलवानों ने महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन शोषण और जान से मारने की धमकी देने जैसे कई गंभीर आरोप लगाये थे, जिसके बाद खेल मंत्रालय ने आरोपों की जांच के लिये निगरानी समिति के गठन का फैसला लिया।

चार सप्ताह में रिपोर्ट दे कमेटी

मंत्रालय ने कहा कि यह समिति चार सप्ताह के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट दर्ज करेगी और इस दौरान बृज भूषण महासंघ के अध्यक्ष का पद छोड़ेंगे और जांच में सहयोग करेंगे। इसी बीच, खेल मंत्रालय ने “डब्ल्यूएफआई का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए” महासंघ के सहायक सचिव विनोद तोमर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक अन्य बयान में कहा कि तोमर का महासंघ में रहना इस “उच्च प्राथमिकता वाली विधा” के विकास के लिये हानिकारक है।

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