वैश्विक स्तर पर हिन्दी सर्वाधिक बोली व समझने वाली भाषा बनीः प्रो. सत्य प्रकाश त्रिपाठी

अवध विश्वविद्यालय में विश्व हिन्दी दिवस पर व्याख्यान का आयोजन किया गया,


अयोध्या। डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के हिंदी भाषा एवं प्रयोजनमूलक तथा क्षेत्रीय भाषा केन्द्र के सयुक्त संयोजन में विश्व हिंदी दिवस पर विश्व बाजार एवं हिन्दी विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता बीएनकेबी पीजी कॉलेज अंबेडकरनगर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान में हिंदी भाषा वैश्विक होने के साथ दुनिया में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा बन गई है। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में हिंदी बोलने, लिखने व समझने वालों की संख्या लगभग 138 करोड़ है। वही अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या 129 करोड़ रह गई है।

इन्हीं आकड़ों से पता चलता है कि हिन्दी काफी समृद्व हो गई है। कार्यक्रम में प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि वैश्विक बाजार में हिंदी का उपयोग काफी तेजी से बढ़ा है। इधर 5 वर्षों में गूगल पर सर्च करने वालों की संख्या में 34 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया पर सबसे अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग लिखने एवं बोलने में किया जा रहा है। हिन्दी के वैश्विक स्तर पर प्रयोग से पूरी दुनिया आश्चर्य चकित है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि हिंदी विकास की ओर तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि वैश्विक परिदृश्य में हिंदी की मांग काफी बढ़ी है। भारत से जुड़ने के लिए 30 देशों के 100 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई कराई जा रही है।

जिससे वे वैश्विक बाजार में अपने को स्थापित कर सकें। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हिंदी बहुसंख्यकों लोगों की आकांक्षा, अभिव्यक्ति व समझने की भाषा बन गई है। धर्म, ज्ञान व शास्त्रों में हर क्षेत्रों में हिन्दी का उपयोग देखा जा रहा है। फिर भी आज हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं है। हिन्दी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं के संयोजन से ही हिन्दी को विश्व रैकिंग में सर्वोच्च स्थान मिल पायेगा। इस पर सभी को सोचने व समझने की जरूरत है। इसके विस्तार होने के साथ हिन्दी राष्ट्रभाषा बन सकती है।

हिंदी भाषा एवं प्रयोजनमूलक के समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र मिश्र ने बताया कि हिन्दी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। पूरी दुनियां में हिन्दी एक अहम भाषा के रूप में समृद्ध हो चुकी है। अपने देश में हिन्दी तकनीकी व मेडिकल के क्षेत्र में भी अब हिन्दी का प्रयोग तेजी से बढ़ा है। अमेरिका में रहने वाले 70 प्रतिशत भारतीय हिन्दी भाषा को वरीयता दे रहे है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है। वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषा समृद्ध हुई है। कार्यक्रम का शुभारम्भ मॉ सरस्वती की प्रतिमा माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथि का स्वागत पुष्प गुच्छ, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम भेटकर किया गया। कार्यक्रम का संचालन अवधी भाषा की शिक्षिका डॉ. प्रत्याशा मिश्रा द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी विभाग के डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक, डॉ. विजयेन्दु चतुर्वेदी, डॉ. मुकेश वर्मा, डॉ. सुमनलाल, डाॅ. स्वाति सिंह, डाॅ. निहारिका सिंह, डाॅ. दिव्या वर्मा, आस्था कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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