कविता : सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा

कर्नल आदि शंकर मिश्र
कर्नल आदि शंकर मिश्र,

सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा,
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी,
साहस भरी हैं नज़रें, हौंसला बुलंद हमारा,
ज़माना क्या करेगा, सितारा बुलंद हमारा।

जीवन में तनाव जब कभी भी आयें
परिस्थिति को दोष कभी न देना,
ध्यान दें अपनी अक्षमता पर और भी
अधिक सक्रिय हो प्रवाह करना ।

प्रेम और विश्वास में यही समानता
है कि इन दोनों में से किसी एक को
भी जबरदस्ती न तो पैदा किया जा
सकता है, ना ही थोपा जा सकता है।

दोस्ती में ख़ारिज हुआ पर हारा नहीं हूँ,

जीवन तो स्वयं ही एक सफ़र है,
और जब हम सफ़र पर होते हैं,
तो बदलते दृश्यों से डरते नहीं हैं,
उनकी नवीनता से परिचित होते हैं।

हम आशावादिता व रचनात्मकता
की पूरी पूरी चाहत भी रखते हैं,
और अद्भुत व साहसिक दृष्टिकोण
के साथ साथ यह सफ़र तय करते हैं।

एक अच्छा इंसान आजीवन कभी
भी स्वार्थी तो नहीं हो सकता है,
हाँ, जो उसकी कद्र नहीं करते वह
अवश्य उनसे दूर चला जाता है ।

रिश्तों की ख़ूबसूरती यह होती है कि
सब एक दूसरे के बिना अश्तित्वहीन हैं,
आदित्य जब तक साथ साथ हैं और
एकसूत्र में बंधे हैं रिश्ते मजबूत हैं।

 

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