कविता : अजीब बातें : मनन, चिंतन

कर्नल आदि शंकर मिश्र
कर्नल आदि शंकर मिश्र

विचार कीजिये और मनन कीजिये।
इन ख़ास मुद्दों पर ध्यान दीजिये ॥

आँखे तालाब नहीं, भर तो आती हैं।
दुश्मनी बीज नही, बोयी जाती है॥

होठ कपड़ा नही, परंतु सिल जाते हैं।
रिश्ते डोरी नहीं, परंतु टूट जाते हैं ॥

हृदय चलता नहीं, गति रुक जाती है।
आत्मा अमर है, परंतु मर जाती है॥

अच्छे नहीं लगते शंकर भोले

भाग्य मित्र नहीं, फिर भी रुठ जाता है ।
बुद्वि लोहा नही, पर जंग लग जाता है॥

आत्मसम्मान जीव नहीं, घाव होता है।
इन्सान मौसम नही, पर बदल जाता है॥

ग़म भोजन नहीं, परन्तु खाया जाता है।
जीवन रोज़ घटता, बर्थडे मनाया जाता है॥

जिनके पास भोजन के भंडार होते है,
वह खाना पचाने को दौड़ लगाते हैं॥

यह संसार आठ अरब लोगों का घर है,

जिनके पास खाने के लाले होते हैं,
वो भोजन कमाने को दौड़ लगाते हैं॥

प्रजातन्त्र में प्रजा मालिक होती है।
पर उस पर राज सरकार करती है॥

अगले पल के जीवन का पता नहीं,
प्रबंध सौ साल का किया जाता है॥

ईश्वर कण कण में मौजूद होता है।
मंदिर, मस्जिद में खोजा जाता है॥

दुनिया गोल है, आदित्य सभी जानते हैं।
पर इसे लम्बाई चौड़ाई में नापा जाता है॥

 

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