कविता : माँ की ममता: व्हाट्सऐप के रिश्ते

कर्नल आदि शंकर मिश्र
कर्नल आदि शंकर मिश्र

माता ने कहा बेटी से ससुराल में
जाकर भूल मुझे तुम जाओग़ी,
माँ ये कैसी बातें तुम करती हो ?
बेटी बोली याद बहुत तुम आओग़ी।

                                 माँ ! तुम प्यार जो इतना करती हो,
पाल पोष कर बड़ा किया है मुझको,
मुझे सुलाने में रात रात तुम जगती
थी, मेरी चिंता में अब भी जगती हो।

व्हाट्सऐप पर विडीओ चलाकर,
अपने मोबाइल में काल लगाकर,
माँ ! याद मेरी तुमको जब आयेगी,
हर दिन मुझको ऑनलाइन पाओगी।

कविता : भगवान के घर देर है, अन्धेर नहीं है

                                         या मिस्ड काल मुझको करना माँ,
काल बैक मैं भी कर लुंगी तुमको,
चिंता की कोई बात नही मेरी माँ,
इंटरनेट वाईफ़ाइ तो अब है ही ना।

माँ ने सोचा अब माँ-बेटी का रिश्ता
व्हाट्सऐप इंटरनेट जैसा हो जाएगा,
इंटरनेट सिग्नल वाईफ़ाई से चलेगा,
ये बंद हुये तो रिश्ता बंद हो जाएगा।

                                                              कहते हैं नेटवर्किंग से सारी दुनिया
अब बिलकुल ही छोटी लगती है,
आदित्य ज़माना यह क्या समझेगा,
माँ की ममता बेटे बेटी में बसती है ।

 

Litreture

कविता : ठोकर खाकर इंसान सजग हो जाता है,

मनुष्य का स्वभाव इस तरह है कि जो साथ जाना है उसे छोड़ रहे हैं, जो यहीं रह जाना है हम सभी उसे जोड़ गाँठ कर जोड़ते जा रहे हैं । प्रेम व विश्वास में एक ही समानता है, कि दो में से किसी को भी जबरदस्ती किसी में पैदा नहीं किया जा सकता है, […]

Read More
Litreture

कविता : ज्ञान का एहसास

धन दौलत से सुविधायें तो मिलती हैं सुख मिलता है अपनों के प्यार से, सुविधाओं से सुःख मिलता तो किसी को दुःख क्यों मिलता इस संसार से। रिश्ते वही कामयाब होते हैं जो सभी तरफ से निभाये जाते हैं, केवल एक तरफ़ सेंकने से तो कोई रोटी भी नहीं बना पाते हैं। दिल से अच्छे […]

Read More
Litreture

कविता : कभी वक्त था कि हमें खाने का शौक़ था

कभी वक्त था कि हमें खाने का शौक़ था, श्रीमती जी को खाना बनाने का शौक़ था, हमारी फ़रमाइशों की लिस्ट लम्बी थी, तो उनकी व्यंजनों की लिस्ट लम्बी थी। अब तो खाने की लिस्ट कम हो गई है, दाल, सब्ज़ी, दो रोटी ही बहुत होती हैं, इससे ज़्यादा तो हज़म नहीं होता है, बीपी, […]

Read More