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बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा

Hidden in the big horoscope, all the secrets of your life, know the full account of the movement of the planets #NayaLookNews

सूर्य के बारे में ध्यान रखने योग्य बातें


डॉ उमाशंकर मिश्रा


लखनऊ। जहाँ तक पौराणिक मान्यताओं का सवाल है तो सूर्य एक क्षत्रिय ग्रह है, जिसके सिद्धान्त अधिक माना जाता है। सूर्य को विष्णु, शिव, शक्ति और भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान का दर्ज़ा दिया गया है, और यही वजह है, कि देश में सूर्यदेव को समर्पित कई मंदिर भी मौजूद हैं। ध्यान देने वाली बात है कि समाज का केवल सौरा वर्ग ही सूर्य को परम देवता के रूप में पूजता है। सूर्य कई हिंदुओं द्वारा भी पूजित किये जाते हैं, और गायत्री मंत्र जो अधिकांश हिंदुओं द्वारा प्रतिदिन बोले जाने वाला मंत्र है, वो भी सूर्यदेव को ही समर्पित होता है।

इसके अलावा सप्ताह में रविवार का दिन सूर्यदेव को ही समर्पित माना गया है। ऐसे में सूर्य पूजा करने और सूर्य से संबंधित उपाय करके सूरज देवता की प्रसन्नता हासिल करने के लिए रविवार का दिन उत्तम माना गया है। इस विशेष ब्लॉग में हम इस महत्वपूर्ण ग्रह के गोचर और एक अन्य महत्वपूर्ण ग्रह के वक्री गोचर का आपकी राशि पर पड़ने वाले प्रभाव की विस्तृत जानकारी आपको प्रदान करने का प्रयत्न कर रहे हैं। आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं उस गोचर की जिसकी कुल अवधि 30 दिनों की होने वाली है। जिसका सरल भाषा में अर्थ हुआ कि सूर्य ग्रह एक राशि में तकरीबन 30 दिनों की अवधि के लिए रहता है, और फिर अपना राशि परिवर्तन कर लेता है। सूर्य का यह गोचर सभी 12 राशियों के जीवन पर कोई ना कोई प्रतिकूल और अनुकूल प्रभाव अवश्य डालेगा। ज्योतिष के अनुसार यदि सूर्य ग्रह (Sun Planet) का गोचर तीसरे, छठे, दसवें, और ग्यारहवें भाव में हो तो इससे व्यक्ति को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। वहीं इसके विपरीत यदि सूर्य पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें, और दसवें भाव में गोचर करें तो इससे परिणाम प्रतिकूल मिलने की आशंका बढ़ जाती है।

कुंडली में सूर्य ग्रह को मज़बूत करने के उपाय

हर एक व्यक्ति के जीवन में लक्ष्य अवश्य होते हैं और इन लक्ष्य को पूरा करने में सूर्य एक बेहद ही सहायक ग्रह साबित होता है। यदि व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह उच्च स्थिति में मौजूद है तो ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में हर उपलब्धियां हासिल करने में कामयाब रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों के जीवन में सभी कार्य शुभ रहते हैं। वहीं जिन व्यक्तियों की कुंडली में सूर्य ग्रह दुर्बल अवस्था में होता है ऐसे व्यक्तियों का जीवन कठिनाइयों से भरा होता है। हालांकि यहां पर परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यदि आपकी कुंडली में भी सूर्य ग्रह दुर्बल अवस्था में है तो ज्योतिष में इसे सही करने के ढेरों उपाय बताए गए हैं। विद्वानों और ज्योतिष के जानकारों द्वारा सुझाये गए इन उपायों को सही ढंग से पूरा करके आप अपनी कुंडली में मौजूद सूर्य ग्रह को मजबूत कर सकते हैं और उसके शुभ परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

मकर राशि में बुध वक्री समय और महत्व

ज्योतिष में बुध ग्रह का संबंध बुद्धि, संचार, व्यापार और सांख्यिकी से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर बुध ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है लेकिन जब यह किसी अशुभ ग्रह के साथ जुड़ जाता है तो इससे व्यक्ति को नकारात्मक परिणाम झेलने पड़ते हैं। ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति की अनोखी क्षमता में कमी देखने को मिलती है। अशुभ बुध के प्रभाव से व्यक्ति की वाणी, तंत्रिका तंत्र आदि से संबंधित समस्याएं व्यक्ति को झेलनी पड़ सकती है।

बुध के बारे में ध्यान रखने योग्य बातें

हिंदू पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार तारा को बुध की माता और चंद्रमा को बुध के पिता का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि भगवान नारायण या विष्णु बुध के देवता हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुध ग्रह को देव का दर्जा दिया गया है। अर्थात एक देवता माना जाता है। बुध ग्रह से संबंधित सप्ताह में बुधवार का दिन होता है इसीलिए इस दिन व्रत रखकर और पूजा अनुष्ठान करने से व्यक्ति कुंडली में मौजूद बुध ग्रह को मजबूत कर सकता है और इसके अशुभ परिणामों को शांत कर सकता है।

ज्योतिष, हस्तरेखा और ग्रहों के आधार पर रोग और स्वास्थ्य

बुध ग्रह के गोचर की बात करें तो बुध का गोचर तकरीबन 14 दिनों की अवधि के लिए होता है और उसके बाद यह दूसरी राशि में प्रवेश कर जाता है। यह अवधि उस स्थिति में मान्य होती है जब बुध ग्रह मार्गी अवस्था में होता है। वक्री बुध का मतलब होता है कि यह सीधे चलने के बजाय उल्टी गति में दिखाई देगा। बुध ग्रह के गोचर का अलग-अलग राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।  हालांकि जब बुध ग्रह आपकी चंद्र राशि से 2, 4, 6, 8, 10 और 11वें घर में जाता है तो यह शुभ परिणाम प्रदान करता है। इसके अलावा बाकी सभी घरों में इसकी स्थिति नकारात्मकता और बुरे भाग्य की वजह बन सकती है।

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