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सपनों मे जीने लगे हैं लोग,अवदमित इच्छायें बना रही न्यूरो पेशेंट

People have started living in dreams, neuro patients making oppressed desires #NayaLook

बीकेमणि त्रिपाठी
          बीकेमणि त्रिपाठी

सदुपयोग किसी का बुरा नहीं,अतिवादिता से बचै

हमारे भीतर भावनाएं दमित वासनाओंके रूप मे घुमड़ती हैंजो तनाव पैदा करती हैं। आधी अधुरी इच्छाएं… जिसे न तो पूरी कर पाते हैं और न किसी से कह पाते हैं। मनोविज्ञान कहता है इनका अवचेतन मष्तिष्क पर गहरा असर पब़ता है। लंबे समय बाद ये अचेतन मे चले जाते हैं। फिर इंसान उसके भीतर डोलने लगता है। जिससे रात की नींद गायब होजाती है ,दिन के काम काज मे मन नईं लगता। ऐसे लोग न्यूरो के मरीज होकर एब्नार।मल व्यवहार करने लग जाते है़। इस स्थिति से बचने के लिए एक सच्चा दोस्त जरुरी है। जो उसकी हंसी न उड़ाये। उसकी बाते़ धैर्य से सुनै और सही सलाह दे।

वह दोस्त परिवार का सदस्य हो हकता है अथवा कोई भी अन्य हितैषी। कविता और कहानी भी उसके रेचन के साधन हो सकते है़। उसकी नेगेटिविटी समाप्त कर उसे सामान्य बनाने मे बहुधा पति पत्नी मे से एक भी समझदार हो तो काम बन जाता है। अन्यथा कोई आंतरंग मित्र जरुरी है। जिससे वह मन की भात कह सके। सोशल मीडिया भी एक साधन होसकता है। पर इसमे सच्चे मित्र मुश्किल से मिलते हैं। लेखन कर व्यक्ति अपनी भावनाये उजागिर कर देता है। इतना सुकून तो है।

यही क्रिया ध्यान के माध्यम से  भी होती है। पर इसका तरीका मालूम न होने से हम उसे व्यवस्थित नहीं कर पाते। नाम जप इष्ट का ध्यान साधना है। पर इस साधना के शुरु करते ही पहले ध्यान मे सपनो की दुनियां सक्रिय होजाती है। इससे ऊब कर लोग ध्यान और जप छोड़ देते हैं। जब कि उन्हें लगातार करते रहना चाहिए। इसके लिए एक योग्य गुरु का निर्देशन मिल जाय तो सफलता पूर्वक मानसिक इलाज होजाता है। वर्तमान मे यह समस्या बढ़ती जारही है।

सोशल मीडिया के बुरे नतीजे

यद्यपि ऑनलाईन क्लासेज चलने से सभी युवा किशोर मोबाईल और लैपठाप पर अधिक समय गुजारने लगे हैं। किंतु  इसमे परोसी जाने वाली सामग्रियां जानकारी के साथ कुछ ऐसी चीजै परोस रही हैं जौ नशे की श्रेणी मे आरही है। सोशल मीडिया कल्पना जगत मे खूब नचा रही है। जिससे सपनों मे जीने की आदत बनती जारही है। जीवन की विविध परेशानियों से जूझने के बजाय फलायन करने का स्वभाव बन रहा है। विभिन्न गेम्स ड्रग एडिक्ट की तरह नशा दे रही हैं। इसलिए बच्चों को या बड़ों को आति प्रयोग से बचना चाहिए।

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