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सावरकर गांधी जी की सलाह लेने से 9 साल पहले ही दो बार लिख चुके थे माफीनामा’

Savarkar had written apology twice 9 years before taking Gandhiji's advice. #NayaLookNews

सलाह मांगी गई थी 1920 मे और मर्सी पिटिशन दाखिल हुयी थी 1911 में


नई दिल्ली। विनायक दामोदर सावरकर के अंग्रेजों से माफीनामे का मामला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के उस बयाने के बाद बहस का मुद्दा बन गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सावरकर ने यह माफीनाम महात्मा गांधी की सलाह पर लिखा था। विक्रम संपत की किताब Echoes from a Forgotten Past, 1883-1924 में इस बारे स्पष्ट लिखा गया ह कि जिस समय हकीकत यह है कि वीडी सावरकर के भाई ने महात्माs गांधी की सलाह 1920 में मांगी थी और सावरकर इससे पहले ही दो बार अंग्रेजों से अपनी रिहाई की गुहार मर्सी पिटिशन (दया याचिकाएं) लगा चुके थे। वीर सावरकर के छोटे भाई डॉक्टर नारायण राव सावरकर के पोते रंजीत सावरकर मुंबई में ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक’ से जुड़े हुए हैं। वे भी रक्षा मंत्री की इस बात से सहमत नहीं है कि उन्होंने महात्मा गांधी के कहने पर दया याचिका दायर की थी।

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जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक महात्मा गांधी को पहली चिट्ठी साल 1920 में लिखी गई थी जबकि सावरकर ने दया याचिका इससे 9 साल पहले 1911 में दी थी। ब्रिटिश सरकार के प्रोटोकॉल के तहत सभी राजनीतिक कैदियों को अपनी रिहाई के लिए दया याचिका दाखिल करनी होती थी। दिल्ली दरबार की गुडविल के लिए तत्कालीन सरकार ऐसा करती थी। रिपोर्ट के मुताबिक बताया जाता है कि अन्य कैदियों के साथ वीडी सावरकर ने भी जेल अधिकारियों के पास दया याचिका दाखिल की थी। उनकी याचिका 30 अगस्त 1911 को जेल प्रशासन ने रिसीव की थी। हालांकि, इसकी कोई प्रति फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ‘जेल हिस्ट्री टिकट’में ही इसका केवल संदर्भ उपलब्ध है। जब यह याचिका दाखिल की गई तब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में थे। वीडी सावरकर ने दूसरी दया याचिका 14 नवंबर 2013 को दाखिल की थी। उस समय भी गांधी जी विदेश में थे, क्योंकि उनका भारत आगमन 2014 में हुआ था।

अंग्रेज सरकार ने उन्हें 13 मार्च 1910 को नासिक के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट एएमटी जैक्सन की हत्या के मामले में अरेस्ट किया गया था। 4 जुलाई 1911 में उन्हें अंडमान निकोबार स्थित काला पानी (सेलुलर जेल) भेज दिया था। हालांकि, सावरकर उस समय लंदन में थे जब जैक्सन को मारा गया। उनके ऊपर आरोप था कि जैक्सन को मारने के लिए जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया था उसका इंतजाम सावरकर ने ही किया था। सावरकर और उनके बड़े भाई गणेश दामोदकर सावरकर रिवॉल्यूशनरी ग्रुप मित्र मेला के संस्थापक थे। अभी इसे अभिनव भारत के नाम से जानते हैं। यह भूमिगत होकर काम करता था। जैक्सन की हत्या में इस ग्रुप का नाम सामने आया था।

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राजनाथ सिंह ने उदय माहुरकर और चिरायु पंडित की लिखी किताब ‘वीर सावरकर: द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन’ के विमोचन के समारोह के दौरान यह बातें कहीं थी। वहीं बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस किताब के लेखक,वरिष्ठ पत्रकार और वर्तमान सूचना आयुक्त उदय माहूरकर कहते हैं कि उनकी किताब में इस बात का जिक्र कहीं नहीं है। इस रिपोर्ट के मुताबिक विवादित बयान के बारे में गांधी शांति प्रतिष्ठान के चेयरमैन और गांधी के गहन अध्येता कुमार प्रशांत कहते हैं,ऐसा न तो पहले देखा है न सुना है क्योंकि न ऐसा हुआ, और न कहीं इसके बारे में लिखा गया। वो कहते हैं, ये लोग इतिहास के नए-नए पन्ने लिखने की कला में बहुत माहिर हैं। मैं अक्सर कहता हूँ कि जिन लोगों के पास अपने इतिहास नहीं होते, वे लोग हमेशा दूसरों के इतिहास को अपनी मुट्ठी में करने की कोशिश करते हैं। राजनाथ जी ने बहुत हल्की बात कर दी है।

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