Biz News

बेरोजगारी के संकट और रोजगार के हाहाकार को गलत मानती है सरकार, दावा किया ‘बढ़ी है नौकरियां ’

The government considers the crisis of unemployment and the outcry of employment wrong, claims 'jobs have increased' #NayaLook

श्रम मंत्रालय की रिपोर्टे के मुताबिक बढ़ी है नौकरियां

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के चलते देश में नौकरी जाने के सिलसिले से हाहाकार मच गया था और लाखों लोग बेरोजगार हो गए थे पर केन्द्र सरकार इससे सहमत नही है। श्रम मंत्रालय के एक सर्वे के मुताबिक रोजगार बढ़ा है। भले ही उस दौरान सीएमआईई की रिपोर्ट 2021 मार्च-अप्रैल के महीनें में 70 लाख लोगों के बेरोजगार होने की बात कहती हो पर सरकार का दावा है कि कोरोना काल में रोजगार कम नही हुआ है बल्कि रोजगार के अवसर बढ़े हैं। श्रम मंत्रालय का दावा है कि सरकार के पिछले आठ सालों के तुलना में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही है। श्रम मंत्रालय के ये आंक़ड़े भले ही बेरोजगारों को चिढा रहे हों पर सर्वेक्षण में मैनुफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और होटल, आईटी / बीपीओ और फाइनेंशियल सेवाओं में रोजगार बढ़ा है।

वहीं सरकार के इन दावों के उलट कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट में बताया गया थी अप्रैल 2021 के दौरान देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.97 फीसदी हो गई है, जो मार्च में 6.5 फीसदी थी और राष्ट्री य स्तोर पर बेरोजगारी दर बढ़ गई थी। उस वक्त ये भी कहा गया था कि फिलहाल इसमें सुधार की गुंजाइश भी नहीं दिख रही है। बेरोजगारी की इस विकराल स्थिति के बाद भी केन्द्र सरकार ने दावा किया है कि कोरोना महामारी के बाद भी रोजगार बढ़ा है और 9 सेक्टरों में लोगों को ढेरों नौकरियां दी गई हैं। नौकरी जाने और बेरोजगारी बढ़ने के तमाम दावों को केन्द्र की यह रिपोर्ट गलत मानती है। इसमें कहा गया है कि 2013-14 में इन क्षेत्रों में 2.37 करोड़ कर्मचारी थे।

दूसरी लहर के बाद इसमें 29 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है और 2021-22 के अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 3.08 करोड़ लोगों को इन क्षेत्रों में रोजगार मिला। बता दें कि हाल के महीनों में देश में हुए तमाम सर्वेक्षणों में देश में विकराल रोजगार संकट बताया गया था। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार, देश के तत्कालीन कुल 181 लाख नौकरियों में से लगभग 70 लाख मई और अगस्त 2020 के बीच चार महीनों के लॉकडाउन में खत्म हो गई थी। सीएमआईई के सर्वे में इस साल मई में 11.9 प्रतिशत मासिक बेरोजगारी दर थी।

इसमें शहरी क्षेत्रों में 14.73 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 10.63 प्रतिशत बेरोजगारी रही। उस महीने 1.5 करोड़ से अधिक नौकरियां चली गईं थी। क्यूईएस की रिपोर्ट में यह भी पाया कि इन नौ क्षेत्रों में लगभग 27 प्रतिशत संस्थानों ने कोविड से पैदा हुए आर्थिक संकट के कारण कर्मचारियों की छंटनी की थी। हालांकि, इस रिपोर्ट में नौकरी छूटने का कोई आंकड़ा नहीं दिया है। वहीं इसके उलट सोमवार को पेश रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 25 मार्च से 30 जून के बीच लॉकडाउन के दौरान 81 प्रतिशत कर्मचारियों को पूरा वेतन मिला था। इसमें कहा गया है कि 16 प्रतिशत को कम मजदूरी मिली थी और लगभग 3 प्रतिशत को कोई पैसा नहीं मिला था।

Related Articles

Back to top button