Raj Dharm UP

चुनावी बिसात पर हारी सीटों पर भी निगाहें

Keep an eye on the seats lost on the electoral board#NayaLookNews

सांसदों को आगे कर सरकार को जनता के गुस्से से बचाना चाहती है बीजेपी


राजेश श्रीवास्तव


लखनऊ। यूं तो 2022 में चुनाव विधानसभा के होने पर भाजपा हाईकमान सारी रणनीति सांसदों को साथ लेकर और उनको ही आगे रखकर तैयार कर रहा है। जनता के दरबार में जिन मौजूदा विधायकों की परीक्षा होनी है उन्हें चुनावी रणनीति से ही बाहर रख दिया गया है। भाजपा हाईकमान ने ऐसा जानबूझ कर किया है। सरकार विज्ञापनों और मीडिया के जरिए जितने भी दावे करे पर यह बात सबको मालूम है कि कानून-व्यवस्था,स्वास्थ्य और जनता से जड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार बुरी तरह नाकाम रही है।

विधायकों और मंत्रियों को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त नाराजगी बतायी जा रही है। ऐसे में पार्टी आलाकमान सांसदों को आगे रखकर जनता के आक्रोश को समझना चाह रही है। आलकमान उन सीटों पर भी फोकस कर रहा है जहां भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी और चुनाव हार गयी थी। उसकी कोशिश है कि बीजेपी की तरह दूसरे पार्टी के मौजूदा विधायकों के साथ भी जनता की नाराजगी जुड़ी है। इन क्षेत्रों में जीते हुए विधायकों के सामने भी जनता के गुस्से की चुनौती है। भाजपा जनता की इस नाराजगी को लपकना चाहती है क्योंकि सरकार होने का लाभ मनोवैज्ञानिक रुप से उसे मिलेगा। दरअसल भाजपा की कोशिश है कि अपनी जीती हुयी सीटें हारने की सूरत में उससे हो रहे नुकसान की भरपाई इन सीटों के जरिए हो जाए।

इसलिए आलाकमान उन 72 सीटों पर भी फोकस कर रहा हैं जहां वर्ष 2०17 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि उसे हार केवल 72 सीटों पर मिली थी पर राजभर के अलग हो जाने के बाद उसके हाथ से अब 84 सीटें निकल गयी हैं। पार्टी ने रणनीति के मुताबिक सांसदों, विधायकों, निगम बोर्ड के अध्यक्षों को इन हारी हुई सीटों पर प्रभारी बनाया गया है । इसमें एनडीए की सहयोगी पार्टी अपना दल को 2 सीटों पर हार मिली थी। बीजेपी पूर्व सहयोगी पार्टी सुभासपा को भी 4 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था । अब पार्टी दूसरे दलों के जीते हुए विधायकों की एंटी इंकमबैंसी से सहारे इन सीटों को जीतना चाहती है।

बता दें कि 2017 में बीजेपी ने 384 सीटों पर चुनाव लड़ा और 312 पर उसे जीत मिली थी। अपना दल 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें 9 सीट जीती थी। वहीं सुभासपा 8 सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे थे जिसमें 4 ही विधानसभा पहुंच पाए थे। बीजेपी को कुल 72 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था ।

काबुल में राजनयिक उपस्थिति बनाए रखा जायेगा

अब समीकरण बदल चुके हैं। ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी बीजेपी से अलग हो चुकी है।  इनकी 8 सीटें बीजेपी हारी मानकर चल रही है। वहीं 2 सीट अपना दल की हारी मानकर चल रही है। इसके अलावा बाकी बची सीटों को भी जीतने की रणनीति बनाने में भारतीय जनता पार्टी जुट गई है । अब पार्टी ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में जनता के बीच पहुंचने की योजना बनायी है। मंत्रियों के कहा गया है कि वे अपनी यात्रा के रूट में अपने भाषण को छोटा लेकिन प्रभावी रखें। उनसे मोदी सरकार के उद्देश्यों, विकास की योजनाओं और स्थानीय मुद्दों के बारे में बताने को कहा गया है। पार्टी के दिशा-निर्देश में बताया गया है।

कि सभी नए और पुराने पार्टी के कैडर इस यात्रा में शामिल हों। इसके लिए बड़े पैमाने सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया जाएगा। 2०22 के विधानसभा चुनाव में जुटी सत्ताधारी बीजेपी की कोशिश यही है कि इस बार सरकार के कामकाज के जरिए उन सीटों पर भी जीत हासिल की जाए जहां अब तक पार्टी को कभी भी जीत नहीं मिली है। इसीलिए वहां पार्टी ने अलग रणनीति के तहत प्रभारी भी नियुक्त किए हैं। इन सीटों की जिम्मेदारी इन्हीं प्रभारियों के कंधों पर है। हालांकि, इनमें से ज्यादातर सीटें विपक्षी दलों की परंपरागत सीट मानी जाती रही हैं। खैबर इन तमाम कोशिशों के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2022 के चुनाव में बीजेपी की सरकार हारी हुयी सीटें जीतने से नहीं बल्कि जीती हुयी सीट दोबारा जीतने से बनेगी। यही चुनौती सबसे बड़ी है।

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