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लीवर के बारे में यह नहीं जानते होंगे आप…

You would not know this about Liver... #nayalooknews

कुछ सावधानियां बचा सकती हैं आपके लीवर को.. जानें

लखनऊ। कुदरत ने शरीर में लीवर के नाम का एक जादुई अंग दिया है, जो पूरे शरीर को ताकत प्रदान करता है और मानव को स्वस्थ रखता है। विश्व में लीवर सिरोसिस के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार भारत में तकरीबन पांच प्रतिशत लोग इस रोग के शिकार हैं। खराब हुए लीवर का छोटा सा हिस्सा भी सुरक्षित बच गया तो इलाज से उसे दोबारा नए लीवर का रूप दिया जा सकता है। एडवांस स्टेज के लीवर सिरोसिस का केवल एक ही रास्ता बचता है- लीवर ट्रांसप्लांट। एडवांस स्टेज के पहले यदि लीवर का कुछ हिस्सा भी सलामत है तो आयुर्वेद (प्राकृतिक चिकित्सा) के सहारे इसे बिल्कुल ठीक किया जा सकता है। यह कहना है पूर्व मेडिकल ऑफिसर एवं चिरायु आरोग्य रिसर्च सेंटर के संस्थापक डा. गुलाब सिंह का।

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वर्तमान दौर में लीवर के लिए कठिन परीक्षा की घड़ी आ गई है। आप शराब (अल्कोहल) का सेवन नहीं करते हैं, हेपेटाइटिस-ए, बी या सी का संक्रमण भी नहीं है तो क्या हुआ? आप मोटे हैं, आपको डायबिटीज है, आप खा-पीकर रोज आराम से टीवी देखते हैं तो भी आपके लीवर पर खतरा मंडरा रहा है। इस तरह के लोग भी अब भारी संख्या में लीवर सिरोसिस के शिकार हो रहे हैं।

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आयुर्वेदाचार्य डा. सिंह कहते हैं- अल्कोहल पीने वाले व्यक्ति को हमेशा यह डर सताता रहता है कि उसका लीवर खराब हो सकता है। लेकिन सामान्य व्यक्ति के दिमाग में यह बात नहीं आती है कि भोजन एवं मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी से, शरीर में जा रही चर्बी भी लीवर सिरोसिस का कारण बन सकती है। इस रोग में लीवर की नलियों के मार्ग में कुछ ऐसे तत्व उत्पन्न होने लगते है, जिससे लीवर की शक्ति नष्ट हो जाती है। जिससे मुख्य कोशिकाओं व शिराओं में रक्त के आने-जाने में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इस बीमारी में लीवर की कोशिकाएं कड़क हो जाती हैं, जिससे पोर्टल वैन (रक्त लाने वाली नली) में प्रेशर बढ़ जाता है, जिसे डॉक्टर पोर्टल हाईपरटेंशन भी कहते हैं।

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चूंकि पूरे शरीर में लीवर बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है इसलिए सिरोसिस की वजह से जब लीवर के स्वस्थ ऊतक (टिश्यू) नष्ट होने लगते हैं तो वह अपना कार्य सामान्य तरीके से नहीं कर पाता। क्षतिग्रस्त ऊतकों के कारण लीवर में रक्त-प्रवाह बाधित हो जाता है जिससे पोषक तत्वों, हार्मोन, दवाओं और सामान्य रूप से उत्पादित विषैले तत्वों का शोधन करने की प्रक्रिया में रुकावट आती है। कुछ खास तरह के प्रोटीनों का निर्माण भी बाधित होता है। शरीर में पर्याप्त मात्रा खून नहीं बन पाता है। इसके साथ-साथ सिरोसिस के रोगियों में पीलिया (जॉन्डिस) जरूरत से ज्यादा रहती है। उन्हें अल्सर का भी ज्यादा खतरा रहता है। लास्ट स्टेज में पहुंचते ही मरीजों के मल में रक्त आने लगता है और मरीज का ब्लड प्रेशर काफी कम हो जाता है। इस स्थिति में मौत का खतरा बढ़ जाता है।

नियमित दिनचर्या से सलामत रहता है लीवर

कम से कम आधे घंटे व्यायाम करें। स्वस्थ शरीर के लिए दो घंटे व्यायाम उत्तम माना जाता है।

एक घंटे सन बाथ लें। (वॉक ऐसे समय जाएं जब सूरज निकलने वाला हो)

समय से खाएं, सोएं और जगें।

प्राकृतिक चीजों का सेवन करें।

पैक्ड फूड से परहेज रखें।

साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

खतरनाक वायरस से पीडि़त व्यक्ति से दूर रहें।

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