Health

हल्के में न लें सर्दी जुखाम, इस समय कई गम्भीर बीमारियों को दे रहा बुलावा

Do not take cold cold lightly, at this time it is calling for many serious diseases #nayalooknews

वीरेंद्र पांडेय

लखनऊ। बच्चों में खांसी, जुकाम, बुखार होना आम बात लगती है। बच्चों को घरेलू दवाएं देकर हम सोचते हैं कि दो-चार दिन में बच्चे ठीक ही हो जाएंगे लेकिन खांसी, जुकाम के सामान्य लगने वाले बैक्टीरिया बच्चों में हृदय की गंभीर बीमारी दे सकते हैं। खास तरह का बैक्टीरिया जोड़ों में दर्द व हार्ट में सूजन कर देता है। अगर बच्चे बुखार, खांसी और जोड़ों में दर्द की शिकायत करें तो उन्हें तुरंत ही किसी हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। विशेषज्ञों की माने तो अकेले उत्तर प्रदेश में ही लगभग 30 हजार बच्चे ‘रोमेटिक हार्ट डिजीज से पीडि़त हैं। करीब दो से तीन प्रतिशत बच्चों की इस बीमारी से मौत भी हो जाती है। केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रो.ऋषि सेठी ने बताया कि बच्चों में हृदय सम्बंधी बीमारियों में ‘रोमेटिक हार्ट डिजीज सबसे अधिक होती है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग की OPD में रोज करीब 400 मरीजों को देखा जाता है, जिसमें से करीब 10 प्रतिशत बच्चे इसी बीमारी से पीडि़त आते हैं।

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जबकि इस बीमारी का इलाज PGI और अन्य कई अस्पतालों में होता है। इसके बावजूद इस बीमारी से पीडि़त बच्चों की संख्या हजारों में होती है। प्रो.ऋषि के मुताबिक जब बच्चों को बुखार, जुकाम और जोड़ों में दर्द हो, साथ ही यह काफी लम्बे समय तक बना रहे तो समझना चाहिए कि बच्चों में ‘रोमेटिक हार्ट डिजीज पनप रही है। यह बीमारी ‘स्ट्रपटो कोकस बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया गले के माध्यम से दिल में चला जाता है और बच्चे के हृदय का ‘वाल्व आगे चलकर खराब कर देता है। इसका अगर सही इलाज न हो तो कुछ सालों में बच्चों की मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी का इलाज सामान्य फिजीशियन भी कर सकता है लेकिन बच्चे में जोड़ो का दर्द खत्म नहीं हो रहा हो और डॉक्टर बीमारी न पकड़ पा रहा हो तो हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।

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प्रो.ऋषि सेठी ने बताया कि इस बीमारी में हर माह एक इंजेक्शन लगाया जाता है, ताकि इसका संक्रमण दूसरे बच्चों में न फैले। बच्चों में यह संक्रमण अगर बार-बार होने लगे तो वाल्व खराब होने की गति तेज हो जाती है। अगर शुरुआती दौर में ही इस संक्रमण को रोक दिया जाए तो वाल्व तक संक्रमण नहीं पहुंचता है लेकिन केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग में ऐसे कई बच्चे आते हैं, जिनको वाल्व में संक्रमण हो चुका होता है। अगर समय से इस बीमारी की जानकारी हो जाए तो बीमारी को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि बुखार, जुकाम के साथ जोड़ों में दर्द अगर तीन सप्ताह से अधिक हो तो इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। यह बीमारी एक बच्चे को होने के बाद तेजी से फैल सकती है। इसलिए सामान्य खांसी, जुकाम में भी बच्चों को दूसरे बच्चे से दूर रखना चाहिए।

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डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रो.भुवन चंद्र तिवारी ने हृदय सम्बन्धी बीमारियों से बचने तथा सेहतमंद जीवन व्यतीत करने के लिए अपने नम्बर पहचानने की बात कही है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में भागदौड़ भरी जिंदगी तथा खान-पान सम्बन्धी अनियमितताओं के चलते किसी भी उम्र के महिला तथा पुरुष को हृदय सम्बन्धी बीमारियां जकड़ सकती हैं। लेकिन यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाये तो हृदय के साथ अन्य प्रकार की गम्भीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि हर 6 महीने पर यदि लोग अपना मधुमेह, रक्तचाप की जांच कराते रहें, साथ ही वजन व कमर की माप भी लेते रहें तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही इस प्रकार की जांच से हृदय रोगों से बचाव में भी काफी कारगर साबित होगी। उन्होंने बताया कि रक्तचाप, मधुमेह तथा मोटापा हृदय रोगों के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है। इसलिए इसकी जांच समय-समय पर कराते रहनी चाहिए। जिससे हमेशा व्यक्ति सेहतमंद जीवन व्यतीत कर सकता है।

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वर्ष 2022-23 तक देश ब्लड प्रेशर की राजधानी बन जायेगा,यह कहना है एसएस.हार्ट केयर सेंटर के डॉ साजिद अंसारी का। उन्होंने बताया कि पश्चिमी देशों की तुलना में यहां हृदय रोग 8-10 वर्ष पहले ही उभरता है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2030 तक लगभग 35 वर्ष की आयु वाले तकरीबन 18 मिलियन लोग हृदय रोग का शिकार बन सकते है। हृदय रोगों से बचने के लिए जीवन शैली सुधारने की जरूरत पर बल देते हुए डॉ अंसारी ने कहा कि जीवन शैली को सुधार कर हृदय रोगों से बचा जा सकता है। हल्का व्यायाम, नियमित टहलने के साथ संतुलित आहार स्वस्थ्य जीवन के लिए आवश्यक है। आज की तनावपूर्ण जीवनचर्या से बचते हुए कम फैट वाले खाद्य पदार्थों को लेने की बात करते हुए कहा कि महिला और पुरुष दोनों समान रूप से हृदय रोगी हो सकते हैं,इसलिए इसके खतरें को समझते हुए बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है। जीवन शैली में किए गए छोटे बदलाव बड़े खतरे से बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि गांव की अपेक्षा शहरों में हृदय रोगियों की संख्या अधिक है। डॉ साजिद ने कहा कि गांव के लोग भोजन के अनुरूप श्रम भी करते हैं इसलिए गांव में हृदय रोगी शहर के मुकाबले कम पाएं जाते हैं।

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अ च्छे स्वास्थ्य और लंबी जिंदगी के लिए योगाभ्यास तो जरूरी है ही पर इसके अतिरिक्त कुछ सामान्य नियमों और सावधानियों का पालन भी आवश्यक है। इन नियमों-सावधानियों व जानकारियों के पालन से दिनचर्या व्यवस्थित होने लगती है और हम लंबे समय तक युवा बने रह सकते हैं। शोध से पता चला है कि अच्छी और सक्रिय जीवनशैली का फायदा उम्र के किसी भी पड़ाव में मिल सकता है। दिनचर्या में थोड़ा-सा व आसान परिवर्तन आपको स्वस्थ व दीर्घायु बना सकता है। बशर्ते आप कुछ चीजों को जीवनभर के लिए अपना लें और कुछ त्याज्य चीजों को हमेशा के लिए दूर कर दें।

सबसे पहले हमारी दिनचर्या जागने से शुरू होती है, हमको सुबह 4 बिस्तर छोड़ देना चाहिय। आपको जागने के तुरंत बाद ही कम कम से एक लोटा ताजा पानी पीना चाहिए। गर्मियों में ताजा और सर्दियों में गुनगुना पानी पी सकते हैं। दूसरा नियम ये है कि सुबह आप जो पानी पिएं वह घूंट-घूंट करके पिएं क्योंकि सुबह हमारे मुंह में लार बनी होती है। जब हम धीरे धीरे पानी पीते हैं तो वह लार हमारे पेट में जाती है और वहां अम्ल और छार आपस में मिलते हैं जिससे पेट साफ हो जाता है। कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि पेट सफा तो हर रोग दफा। प्रतिदिन सुबह -सुबह 2-3 मील तक रोज टहलें। अगर आप बच्चे हैं तो दौड़ भी कर सकते हैं। अगर बुजुर्ग हैं तो टहलें या फिर जॉगिंग करे। टहलने के अलावा, दौडऩा, साइकिल चलाना, घुड़सवारी, तैरना या कोई भी खेलकूद, व्यायाम के अच्छे उपाय हैं।

स्त्रियां चक्की पीसना, बिलौना बिलोना, रस्सीकूदना, पानी भरना, झाड़ू- पोछा लगाना आदि घर के कामों में भी अच्छा व्यायाम कर सकती हैं। और प्राणायाम जैसे अनुलोम विलोम, कपालभाती इत्यादि करें। क्यूंकि सुबह जब हम व्यायाम करते हैं तो हमारे सरीर से पसीना निकलता है जो की गंदा होता है तो उस पसीने के जरिये हमारी बहुत सी बिमारी निकल जाती है। जिससे कि शरीर स्वस्थ रहता है। भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए बिना भूख के हमें कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। क्योंकि जब हम बिना भूख के भोजन करते हैं तो जो हमारी पाचन क्रिया यानी डायिजेस्तिव सिस्टम मंद पद जाता है। जिससे कि हमको भूख नहीं लगती। भोजन करने के बाद पानी कभी भी नहीं पीना चाहिए। भोजन करने के कम से कम 45 मिनट तक पानी नहीं पीना चाहिए और 45 मिनट बाद पानी जरूर पीना चाहिए।

ऐसा इसलिए कि जब हम भोजन करते हैं तो हमारे पेट में एक अग्नि जलती है जिसे बोलते हैं जठराग्नि। इसका काम भोजन को पचाना होता है। जब हम भोजन के तुरंत बाद पानी पी लेते हैं तो मंद पद जाती है अथवा बुझ जाती है जिससे फिर हमारा किया हुआ भोजन पचता नहीं है बल्कि सड़ता है। इसलिए हमको 45 मिनट बाद पानी पीना चाहिए क्योंकि जब 45 मिनट के अंदर ये हमारे भोजन को पचा देती है तो उसे रश में बदलने के लिए पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए हमको 45 मिनट बाद पानी जरूर पीना चाहिए। पानी कभी भी खड़े होकर पीना नहीं पीना चाहिए। हमेशा बैठ कर पानी पीना चाहिए। ऐसा इसलिए कि खड़े होकर पानी पीने से घुटना खऱाब हो जाते हैं अर्थात घुटनों की बीमारी हो जाती है। इसलिए हमें बैठ कर पानी पीना चाहिए।

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