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IVF में डिप्रेशन को कहें बॉय

Say boy to depression in IVF#naya look news

महिला का गर्भवती होना एक अनोखा एहसास है लेकिन उन 9 महीनों में महिला किस दौर से गुजरती है, कहना जितना मुश्किल है उतना ही समझना। लेकिन उन महिलाओं का क्या, जो आज तक मां नाम की किलकारी से बेख़बर हैं और सदमें में अपनी जिंदगी तक गवां देती हैं । देखा गया है कि शुरुआत में महिलाएं इंफर्टिलिटी के कारण मानसिक तौर से कमजोर होती जाती हैं। जब महिलाएं आईवीएफ  को चुनती हैं,तो महिलाएं शारीरिक और जज्बाती रूप से त्रस्त हो जाती हैं, जिसके कई कारण हैं जैसे, मेडिसिन का साइड इफेक्ट और पैसे की चिंता। जो कि बाद में कभी-कभी हार्ट अटैक पर खत्म होती है। शुरुआती दौर में कुछ मरीज हार्मोंन टेस्ट के दौरान डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं लेकिन जो औरतें टॉक थेरेपी का इस्तेमाल करती हैं, वो महिलाएं अपनी शंकाका समाधान कर सकती हैं।

फ़र्टिलिटी के लिए कितनी मायने रखती है आपकी उम्र?

उन महिलाओं को गर्भवती होने के ज्यादा से ज्यादा मौके भी मिलते है। IVF  ट्रीटमेन्ट में महिलाएं दो हफ्ते के लंबे दौर से होकर गुजरती हैं। उस दरमियान एक महिला हार्मोनल रीप्रेशन से भी गुजरती है जो कि सामान्य महिलाओं की तुलना में IVF महिला का IVF  प्रक्रिया में बिलकुल अलग अनुभव होता है क्योंकि उस दौरान चिंता और अवसाद चरम सीमा पर होता है। तो संभावना होती है कि आईवीएफ  की सफलता  पर अकुंश लगे। IVF में महिला को इंजेक्शन लगाए जाते हैं वो इंजेक्शन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के स्तर में तेजी से गिरावट लाते ह साथ ही ओव्यलैशन को ब्लॉक करने में मदद मिलती है। तकरीबन, यह प्रॉसेस 2 सप्ताह तक चलता  है, जब तक कि एक और हार्मोन इंजेक्शन ओव्यलैशन को उत्तेजित नहीं करता। जैसे ही अंडा तैयार हो जाता है तो उसे बाहर फर्टलाइज करके गर्भ में प्लांट कर दिया जाता है। इंटनेशनल फर्टिलिटी सेंटर की चेयरपर्सन रीटा बख्शी कहती हैं कि, IVF  के दौरान कपल्स एक-दूसरे के साथ पहले से ज्यादा वक्त गुजारते हैं जो कि स्ट्रैशफुल होने के बावजूद आने वाले लम्हों के लिए अच्छा होता है।

जानकारी इकट्ïठा करें : अपने क्लिीनिक और आईवीएफ  के बारे में जानना बहुत जरूरी है जिससे तनाव से बचा जा सके।

दृढ़ता से तैयार रहें : कई मसलों में देखा गया है कि महिला के 2 से 3 बच्चे IVF  प्रक्रिया में हो जाते हैं लेकिन काउंसिलिंग के जरिए मल्टीपल बच्चा होने से बचा जा सकता है । साथ ही आसानी से प्रेग्नेंसी के मौके बढ़ाए जा सकते हैं। स्टै्रस पर कंट्रोल करने के लिए रणनीति बनाए : फालतू के तनाव से बचने के लिए सही फैसला लें, जिससे कपल्स की समस्याओं का समाधान हो सके। साथ ही यह जरूर सोचें कि आने वाली समस्याओं से कैसे बचा जा सके। दिक्कतों को पहचानें : IVF  साइकिल के दौरान आने वाली कठिन समस्याओं की पहचान करें क्योंकि हर मरीज की मेडिकल स्थिति एक-दूसरे से अलग होती है। इस दौरान दोस्तों के साथ कम्युनिकेशन बढ़ाना भी जरूरी  होता है। जिससे दोनों की मनोस्थिति साफ  हो सके, साथ ही सही दिशा में सही निर्णय लिया जा सके। जिससे आईवीएफ  प्रक्रिया में चाहे सफलता हासिल हो या ना हो, लेकिन कठोर लम्हों में एक-दूसरे के साथ होना जरूरी है जिससे भविष्य में पछतावे के लिए जगह न हो।

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