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NAYA LOOK EXCLUSIVE: अगर मंच मिल जाए तो ये अपना काम कर देगें : एहसान कुरैसी

NAYA LOOK EXCLUSIVE: They will do their job if they get the platform: Ehsan Quresi#naya look news

ग्राहक चिल्लाया कमाल हो गया कमाल हो गया

साबुन से लुंगी धोया रुमाल हो गया।

दुकानदार बोला तू व्यर्थ के आंसू मत बहा

जाकर उसी साबुन से नहा बैलेंस बराबर हो जाएगा।

तू सुकड़ जाएगा रुमाल की तरह फिर दोना बराबर हो जाएगा।

फांसी पर चढ़ते हुए कैदी से जज साहब ने कहा

फांसी पर चढ़ते हुए कैदी से जज साहब ने कहा

अपनी अंतिम इच्छा बताइए

कैदी बोला मेरे बदले आप ही लटक जाइए।


ऐसी ही दो-दो लाइने लोगों तक पहुंचाते थे लोग हंसते थे आर्शीवाद देते थे। यही आर्शीवाद इतना बढ़ा इतना बढ़ कि मुझे अब तक 24 देशों की यात्रा का मौका मिला। पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, दुबई, जैसे 24 देशों के लोगों को अपनी कविताओं और अदाओं से हंसा चुके हैं एहसान कुरैसी।

एहसान कुरैसी 

एहसान जी-बालीवुड में सबसे पहले परेशानियां क्या है?

बालीवुड बालीवुड ऐसे तो लोग सपना देखते है सपनो की नगरी है भई। किसी को असानी से कदम नही रखने देती। मैने बढ़ा बारिक अध्ययन किया कि मुम्बई में एक समुद्र है गंगा यमुना सरस्वती जितनी भी नदियां है ईस्ट की वेस्ट की साउथ की नार्थ की सब आओ सबका वेलकम मुम्बई का दिल भी एक समुद्र है। विशाल एकदम। पंजाब से आ जाओ अमृतसर चेन्नई से आ जाओ भुवनेशवर उड़ीसा से आ जाओ सबको वेलकम तो समुद्र सबको समेटता है। लेकिन दूसरी खूबी समुद्र की यह है कि कचरा कचरा को बाहर फेक देता है। काम के आदमियों को रखता है जो काम के नही है उनको फेक देता है। बहुत संघर्ष है फिल्म इण्डस्ट्री मे काम करने के लिए हमारा नसीब अच्छा था कि ये ग्रेट इण्डियन लाफ्टर शो में आ गये तो काम मिल गया। नही तो लोगो की सारी जिन्दगी चली जाती है कोई पहचान नही बन पाती है।

काम मांगते मांगते जिन्दगी गुजर जाती काम मिलता नही या तो फिल्म या फिल्मी लोग उन्ही से आप लोग खुदी जानते है दसो साल से उनके पास राजपाल यादव कामेडी चाहिए तो जानी लिवर साहब एक असरानी जी जगदीप साहब अब क्यू लेंगे आपको बहुत साल ये बिजी रहे जब डेट नही मिली तब जाकर ये खुल गये। यार नया देख लो क्योकि अपने पास टाइम नही है। तब चान्स और जिसने चांस मौके पर चौका लगाया तो ये कठिनाई तो सबको झेलनी पड़ेगी। बालीवुड में मुझे ईश्वर की कृपा ज्यादा झेलनी नही पड़ी क्योकि मैं वालीवुड का आदमी नही हूॅ। मैं तो टी0वी0 का इस्तिहार हूॅ। और मैं हसाता हूॅ। शहर शहर जाता हूॅ। मेरा ये काम चल रहा है। फिल्मो के लिए बहुत फ्री रहे और किसी ने प्यार से बुलाया फिर भी बड़े लोग कभी नही बुलायेंगे मुझें ऐसा लगता है।

शाहरूख खान ने कभी बुलाया सलमान ने बुलाये न अक्षय कुमार ने बुलाया न आमिर खान ने बुलाया न सुनील शेट्टी ने बुलाया जितने लोग फिल्म बनाते है रोहित शेट्टी ये सब लोगो का अपना एक कैम्प है। इस कैम्प के बाहर के लोगो को क्यो बुलायेगे। और हम लोग कब तक इनके दरबार के धक्के खायेगे। ये तो मालिक का करम है ईश्वर ने हमको जनता की सेवा भेजा टीवी पर काम मिलता है। हम लोगो को शो में खुद लोग बुलाते है। हसते है काम मिलता रहता है हम भी इनके मौहताज नही है। ये घर घर तक पहुचते है। हम भी आपके माध्यम से पत्रकार हर शहर में मिलते हैं हमको प्रेस रिपोटर मिलते है ये घर घर तक पहुॅच जाते है तो हम भी घर घर पहुॅच जाते है। तो जितना है उससे बहुत संतुष्ट है। लेकिन काम करने की ललक तो सबमे रहती है हमभी उम्मीद करते है कि कभी शाहरूख की फिल्म में एक बार काम करने को मिल जाये एक छोटा सा रोल ही मिल जाये मगर ये अब शाहरूखजी को सोचना पड़ेगा।

देश हित के लिए कुछ कर लो अपने कैम्प से बाहर निकलो कभी बैठकर तन्हाई में सोचना कि अगर उदाहरण दे रहा हूॅ सौ करोड़ की फिल्म है अस्सी तो तुम्ही रख लेते हो बीस करोड़ में गरीब किस किस को बॉटे अब एक करोड़ खर्च होना है अब एक करोड़ खर्च होना है अब शाहरूख जी अस्सी लाख ले ले रहे है तो बीस लाख में इतनी बड़ी यूनिट है इतने लाइटमैन कैमरामैन खाने बनाने वाला स्पाटदादा खाना देने वाला चाय बनाने वाला कैमरे के पीछे की टीम, लाइटमैन के पीछे की टीम ये दो तीन सौ लोगो के पास एक चिन्दी बरतन जैसे तैसे। इनका भी हित के बारे सोच लिया करो। इतनी बड़ी फिल्मे बनाते हो तुम लोग। कि इस फिल्म में एक आदमी तो नया लूॅगा। और उसको चांस दूंगा। क्योकि टैलेन्ट की इस देश में कमी नही है। सिर्फ तुम्हारे विचारधाराओ को बदलने की कमी है।

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बदलो निकलो अब तो वैसे भी बूर्जूग होने लगे हों सभी बाप बनने लगे है। अब तो आपका टाईम भी आने वाला है। शाहरूख सलमान सब बाप बनो आमिर बन गये दो दो लडकियों के बाप बन गये तो सबका टाईम बदलता है अमिताभ बच्चन को हम बचपन से देखते है। बेचारे बेहतर तबियत रहे अब तो दादा भी बन गये काम करते है। बाकी आप से क्या उम्मीद करे। हम देशवासी उममीद करते है। आएगा कोई प्रोडयूसर वो हमको काम देगा। भाईजान आपके जमाने की कन्फमबीलिटी और अबकी असहिष्णुता आ गई है। कई ऐसी फिल्मे आई है जो डयूल मूड में आई है और बहुत खराब है। आप क्या कहना चाहेग? ये तो आपने बहुत अच्छी बात पूछी हमारे गुरूजी न कहते थे देखो कोई भी आइटम शो करना। पहले घर में सुनाना। पहले श्रोता आपके बच्चे है पत्नी है माता-पिता है ये इनको बिठा कर सुनाना और तुम आत्मा से पूछना कि क्या ये हम अपने परिवार को सुना सकते है। तो ही दूसरो को सुनाना क्योकि ये जो आडियन्स है ये भी हमारा परिवार है।

तो अश्लीलता हमारे कोष में आती नही है। थोड़ी देर हॅसाने के लिए या बैठकर बाते हम नही कर सके ये हमारे संस्कारो में नही। लेकिन जो लोग ऐसा कर रहे है उनका मै समर्थन भी नही करता। थोड़ी देर की चमक होती है। और आडिएन्श के हाथ में सबसे बड़ा काम होता है रिमोर्ट का आपके हाथ में रिमोर्ट है। गन्दे लोगो को आगे मत बढ़ाओ। आप देखते हो। बदल दो यार थोड़ी सी अच्छी अच्छी चीजे परिवार को संस्कार देने वाली बाते तो आप चेंज कर दिया करो ये अपने हाथ में पावर है। गन्दगी ज्यादा चलती नही भाई थोड़ी देर चमकता है। लेकिन सच्चाई बहुत लम्बी चलती है। ये सच है मान लीजिए लेकिन सर एक बात और भी है इसमें ऐसा कहा जाता है कि अगर इस तरह कि चीजे नही परोसी जायेगी तो हमारी टीआरपी नही बढ़ेगी नही हमारा पैसा नही बढ़ेगा हम कमायेगे कैसे? टीआरपी के लिए तो हम लोग बैठे है हम लोगो का तो साफसुथरा शो था। तीन पीढिय़ा देखती थी सड़के सूनी हो जाती थी। वो टीआरपी कैसे आई बिना गन्दगी के।

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अच्छा दंगल फिल्म आई दोनो लड़कियों की कहानी है कि लड़को का काम लड़किया भी कर सकती है। और एक बाप ने हिम्मत दिया कि दोनो लड़कियो को दंगल में उतार दिया। यार रियल फिल्म बनाये क्यो चली करीब सौ करोड़ की फिल्म थी अच्छी चीजे चलती है। ये लोगो का दर्द है। टी0आर0पी0 नही आयेगी ये नही आयेगी। तो मत करो न करो भाई टीआरपी नही आयेगी तो किसी के कपड़े उतारोगे या नंगा करोगे किसी को समाज को नंगा करोगे टी आर पी के लिए ये दंगल गन्दी विचारधारा है। अच्छी चीजे बनाओ टीआरपी देगी अच्छी चीजे टीआरपी देती है। पूरी फैमिली आज भी डान्स काम्पटीशन या सींगीग काम्पटीशन हम देखते है क्या टी आर पी आती है। बिना अश्लीलता के। क्या शुद्ध बच्चे गाते है क्या मेहनत करके डान्स करते है। लेकिन टीआरपी उनको खूब मिलती है। तो ये इनका गन्दा तर्क है और हमको इनका समर्थन नही करना चाहता है। वाकई हसी जो है शुद्ध आत्मा से आये परिवार के साथ फैमिली के साथ बैठ के हस सके।

हसी जरूर आनी चाहिए।

क्या आप भी अपना कोई कामेडी शो लाना चाहेंगे?

ये एक मंहगा खेल है। हमको कई लोग आफर देते रहते है कि आप कोई कान्सेप्ट सोचो। हम लोग सोचते रहते है चाहते है कुछ करते है बताते है चैनल को कि हमारे पास ऐसा शो है लेकिन बस यहॉ पर किस्मत का मामला आ गया है। जिसके लक साथ दे दे उसकी प्रोफाइल पास हो जाती है और वो लोग पाइलेट बनाकर देते है। ओके चलो इस पर साथ देगे हम तुम्हारा करो ये चीज लेकिन किस्मत ऐसी चीज है संघर्ष सब करते है हम भी चाहते है कि हमारा कोई शो आये सुनील पाल चाहता है हमारा कोई शो आये। सुनील पाल ने तो दो-दो तीन तीन फिल्म भी बना ली कि कुछ नही तो हम कुछ कर सके। कोशिश किया आज नहीं कल सफल होंगे। लेकिन हम भी कोशिश कर रहे हैं। अगर कोई चैनल हमार कॉन्सेप्ट पास कर दिया तो जल्द ही हम अपना शो लेकर आएंगे। बस आप लोगों के दुआ की जरूरत है।

आपका शो दूसरे कॉमेडी शो से कैसे अलग होगा?

शुद्ध शाकाहारी होगा। पूरे परिवार हंसेगा। देश के नये प्रतिभाओं को मौका मिलेगा। जहां हम पहुंच गए हमको भी किसी ने चांस दिया था। आने वाली पीढ़ी हमारे पीछे लगी हुई है। हमको भी चंास मिले तो हम भी नऐ लोगों को लेकर काम करेंगे। जहां नया मंच मिलेगा नई ऊर्जा लेकर आएंगे। नए लेखक आएंगे। नई सोच लेकर आएंगे और देश के लिए एक बेहतरीन मनोरंजन शो लेकर आएंगे।

आप हमेशा जूनीयर को चांस देते है। आप को नहीं लगता है आप हमेशा रिस्प पर चलते हैं?

हां। लगता तो है। लेकिन हमें मालूम है कि हम जिसको चांस देते हैं वो भी पक्का खिलाड़ी होता है। 10-15 साल वह भी अपनी मेहनत करके आता है और हम उसको देख लेते है कि हां इसमें कुछ बात है इसको अगर मंच मिल जाए तो ये अपना काम कर देगें। फिर वही होता है पके हुए खिलाड़ी होते हैं उनको मंच नहीं मिलता है हम उनको मंच देते हैं तो वह भी धमाल करने लगता है और वह चल निकलते हैं क्योंकि हमने उनका हुनर देख कर उन्हें मौका देते हैं। हम भी ऐसे ही नहीं पकड़ लेते है। पहले छोटे-छोटे चांस देते हैं। अगर वहां उसे सफलता मिल जाती है। तो फिर आगे उन्हं मच देते हैं।

आपके चाहने वालों की संख्या बहुत है क्या आप राजनीति में आना चाहेंगे?

कभी नहीं। राजनीति में कभी नहीं आएंगे। अब तो राजनीति के संस्कार बदलते जा रहे हैं। पॉलिटिक्स का स्टाईल बदलता जा रहा है। क्या मालूम इस देश का क्या होगा? कई बार चिंतन करते रहते हैं। जिस सरकार से उम्मीद करो वही गरीबों के लिए कुछ नहीं करता है। इतनी मेहनत से पैसा लाते हैं। हम सोचते हैं बैंक में पैसा सुरक्षित है। एक करोड़पति अरबपति बैंक से पेसा फाइनेंस कराता है और विदेश भाग जाता है। पैसा किसका गया हम गरीबों को गया। कब करेंगे पॉलिटिसियंस ये सारी व्यवस्था। हमसे बोला जाता है यार वो 700-800 रुपये का जो गैस सिलेंडर आता है उसमें सरकार जो 350-400 रुपये सब्सिडी देती है उसे छोड़ दो भाई जान। ठीक है जितने सांसद है विधायक हैं वो सारी सरकारी सुविधाएं छोड़ दें। मुफ्त की हवाई यात्रा, मुफ्त की रेल यात्रा लेते हैं ये सारी सुविधाएं आप छोड़ दें हम सब्सिडी छोड़ देंगे। हमसे 350 भी नहीं देखा जा रहा है। तुम करोड़ों रुपया। रोज विदेश जा रहे हो। तुमको क्या-क्या सुविधाएं मिली हैं।

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आप देश के लिए अपनी सुविधाएं छोड़ दो हम सब्सिडी छोड़ देंगे। पॉलिटिक्स से मन उचट गया है। बोल बच्चन सुन सुन कर थक गए हैं। कोई गरीबों के लिए करता नहीं है। दर्द उस वक्त होता है जब मेरे गांव में 150 रुपये का बिल न जमा करने वाले किसान की गरीब की झोपड़पट्टी वाले की लाइन काट कर चले जाते हैं और करोड़ों रुपया जिनके ऊपर बकाया है उनकी फैक्ट्री में चाय पी कर वापस आ जाते हैं। डेढ़ लाख रुपये का कर्ज न चुका पाने पर देश का किसान आत्महत्या कर लेता है। दुनिया छोड़ देता है पर देश नहीं छोड़ता सच्चा देश भक्त है किसान। माल्या, मादी, नीरव जैसे लोग कर्ज लेकर विदेश भाग गए। किसका पैसा ले गए सब आम जनता का पैसा ही तो है। किसान अगर समय से पैसा वापस न करे तो बैंक वाले नोटिस की झड़ी लगा देेगें इतना दबाव बना देंगे जब तक कि वह मर न जाए। बहुत भ्रष्टाचार है यहां। बावजूद इसके मैं यही अच्छी लोगों को राजनीति में आगे आना चाहिए। देश को आज अच्छे नेताओं की जरूरत है।

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