Religion

पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा

For the long life of the husband, women worshiped the banyan tree

नया लुक संवाददाता


खमरिया खीरी। सनातन धर्म मे पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं प्रत्येक वर्ष वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इसी उद्देश्य से इस वर्ष भी ईसानगर के खमरिया, ईसानगर,कटौली व लाखुन क्षेत्र में अलग अलग स्थानों पर महिलाओं ने व्रत रखते हुए विधि-विधान के साथ वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र के लिए कामना की। मान्यता है कि वट वृक्ष हिंदू धर्म में विशिष्ट माना गया है, इसमें त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। कई व्रत और त्योहार में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है, इसमें से वट सावित्री या बरगदाई की पूजा प्रमुख है। वट वृक्ष या बरगद के पेड़ के तने में भगवान विष्णु, जड़ में ब्रह्मा तथा शाखाओं में शिव का वास होता है। वट वृक्ष को त्रिमूर्ति का प्रतीक माना गया है।

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विशाल एवं दीर्घजीवी होने के कारण वट वृक्ष की पूजा लम्बी आयु की कामना के लिए की जाती है। यह भी मान्यता है कि भगवान शिव वट वृक्ष के नीचे ही तपस्या करते हैं तथा भगवान बुद्ध को भी बरगद के पेड़ के नीचे ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बौद्ध धर्म में इसे बोधि वृक्ष कहा जाता है। हिंदू परंम्परा में चार वट वृक्षों का विशिष्ट स्थान हैं, अक्षय वट, वंशीवट, गयावट और सिद्ध वट वृक्ष। इनकी प्राचीनता के विषय में स्पष्टतौर पर कुछ ज्ञात नहीं है, परन्तु इनका वर्णन पुराणों में मिलता है।

अतः ये हिंदू आस्था के प्रतीक हैं। इनमें से अक्षय वट प्रयागराज में संगम के किनारे स्थित है, मान्यता है कि प्रलय काल में स्वयं श्री हरि विष्णु इसकी शरण लेते थे क्योकि अक्षय अर्थात् कभी समाप्त न होने वाला अक्षय वट प्रलय काल में भी समाप्त नहीं होता है। वट सावित्री या बरगदायी की पूजा में विशेष तौर पर बरगद के पेड़ की ही पूजा की जाती है। मान्यता है कि बरगद के पेड़ के नीचे ही सावित्री ने अपने पति सत्यावान को पुनर्जीवित किया था। तब से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं।

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