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भारत में 2023 में साल बढ़ेगी GDP, इस साल 8.3 रहने का अनुमान

GDP will increase in India in 2023, estimated to be 8.3 this year

  • विश्व बैंक ने कहा- साल 2022 में 7.5 प्रतिशत रह सकती है भारत की GDP

मुम्बई। बीते कुछ बरसों से भारत की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है। ऊपर से कोरोना महामारी ने बीते कुछ दशकों के सबसे बुरे आँकड़े की ओर भारतीय GDP को पहुंचा दिया। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस साल अप्रैल से मई के दौरान पूरे देश में लॉकडाउन था। खाने-पीने की चीज़ों और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को छोड़कर बाक़ी सभी आर्थिक गतिविधियां इस दौरान ठप रहीं। जानकारों का कहना है कि आने वाले GDP के आंकड़े हर किसी के लिए अहम हैं, क्योंकि भारत में कोरोना महामारी के फैलने के तुरंत बाद अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती की यह पहली आधिकारिक स्वीकारोक्ति होगी।

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विश्व बैंक ने एक दिन पहले मंगलवार को भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2021 में 8.3 फीसदी और 2022 में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। बैंक ने यह भी कहा है कि कोरोना महामारी की अब तक की सबसे खतरनाक दूसरी लहर से आर्थिक पुनरूद्धार को नुकसान पहुंचा है। बहुपक्षीय संस्थान ने ग्लोबल इकोनामिक प्रॉस्पेक्ट्स शीर्षक रपट के नए संस्करण में कहा है कि भारत में 2020-21 की दूसरी छमाही में खासकर सेवा क्षेत्र में तीव्र पुनरूद्धार की अपेक्षा की जा रही थी, लेकिन कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने इस पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। अब विश्व बैंक की बात समझने के लिए आपको GDP के बारे में जानना होगा।

क्या होती है GDP

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। रिसर्च और रेटिंग्स फ़र्म केयर रेटिंग्स के अर्थशास्त्री सुशांत हेगड़े का कहना है कि जीडीपी ठीक वैसी ही है, जैसे ‘किसी छात्र की मार्कशीट’ होती है। जिस तरह मार्कशीट से पता चलता है कि छात्र ने साल भर में कैसा प्रदर्शन किया है और किन विषयों में वह मज़बूत या कमज़ोर रहा है। उसी तरह GDP आर्थिक गतिविधियों के स्तर को दिखाता है और इससे यह पता चलता है कि किन सेक्टरों की वजह से इसमें तेज़ी या गिरावट आई है।

वर्ष 2023 में भारत की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान

विश्वबैंक ने कहा कि महामारी की शुरुआत से किसी भी देश के मुकाबले सर्वाधिक भीषण लहर भारत में आई और इससे आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। वैश्विक संस्थान के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था में 2020 में 7.3 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है जबकि 2019 में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वर्ष 2023 में भारत की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। विश्वबैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में 2021 में 5.6 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है।

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अगर ऐसा होता तो है कि यह 80 साल में मंदी के बाद मजबूत वृद्धि होगी। रिपोर्ट के अनुसार भारत की GDP में 2021-22 (अप्रैल-मार्च) में 8.3 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार बुनियादी ढांचा, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य पर अधिक व्यय समेत नीतिगत समर्थन तथा सेवा एवं विनिर्माण में अपेक्षा से अधिक पुनरूद्धार से गतिविधियों में तेजी आएगी। इसके अनुसार हालांकि पूर्वानुमान को 2.9 प्रतिशत अंक संशोधित कर ऊपर किया गया है। लेकिन कोविड-19 महामारी की भीषण दूसरी लहर तथा इसका रोकथाम के लिये मार्च 2021 से स्थानीय स्तर पर ‘लॉकडाउन’ से आर्थिक नुकसान पहुंचने की आशंका है।

कि महामारी से खपत और निवेश पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी से खपत और निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि भरोसा पहले से कमजोर बना हुआ है और बही-खातों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वित्त वर्ष 2022-23 में वृद्धि दर धीमी पड़कर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह कोविड-19 के परिवार, कंपनियों तथा बैंकों के बही-खातों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव को अभिव्यक्त करता है। इससे ग्राहकों का भरोसा और कमजोर होगा तथा रोजगार एवं आय के मामले में अनिश्चितता बढ़ेगी।
अन्य विकसित देशों में वृद्धि मजबूत होगी लेकिन उसकी गति कम होगी। रिपोर्ट के अनुसार उभरते और विकासशील देशों में चीन की वृद्धि दर 2021 में 8.5 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसकी वजह दबी हुई मांग में तेजी आना है। विश्वबैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर पुनरूद्धार के संकेत हैं लेकिन महामारी के कारण विकासशीलदेशों में गरीबी और असमानता बढ़ी है।’’

5.6 फीसदी की दर से बढ़ेगी दुनिया की अर्थव्यवस्था

वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में इसमें 5.6 प्रतिशत वृद्धि होगी। अगर ऐसा होता तो है कि यह 80 साल में मंदी के बाद मजबूत वृद्धि होगी। इसका मुख्य कारण कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मजबूत पुनरूद्धार है। हालांकि पुनरूद्धार के बावजूद वैश्विक उत्पादन महामारी पूर्व अनुमान के मुकाबले इस साल 2 प्रतिशत कम रहेगा। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका में इस साल 6.8 प्रतिशत वृद्धि रहने का अनुमान जताया गया है।

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इसका कारण बड़े स्तर पर राजकोषीय मदद तथा महामारी से जुड़ी पाबंदियों में ढील है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से कम आय वाले देशों के लिए टीका वितरण और ऋण राहत में तेजी लाने के लिए समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। स्वास्थ्य संकट कम होने के साथ नीति निर्माताओं को महामारी के स्थायी प्रभावों को दूर करने और व्यापक तौर पर आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए हरित, मजबूत और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

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