Raj Dharm UPUttar Pradesh

जांचे निपटाने के लिए जेल मुख्यालय में तैनात होते वरिष्ठ अधीक्षक!, जेल मुख्यालय में तैनात अफसरों का कारनामा

Senior Superintendents posted in jail headquarters to conduct investigations! Acts of officers posted in jail headquarters

दाग लेकर आये कई अफसर बेदाग होकर निकल गए


राकेश यादव


लखनऊ। झांसी बंदीरक्षक भर्ती घोटाले का दाग लेकर जेल मुख्यालय आये अफसर बेदाग होकर निकल गए। यही नहीं कुछ दागदार अफसर दाग निपटाकर निकल गए तो कुछ अभी भी निकलने की फिराक में लगे हुए है। दिलचस्प बात तो यह है कि दागदार अफसरों को दाग मिटाने वाले (गोपनीय विभाग) का प्रभारी तक नियुक्त कर दिया गया। मामला विभागीय अफसरों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अटकलें लगाई जा रही है कि मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच खुद सामने आ जायेगा।

विभागीय जानकारों के मुताबिक जेल मुख्यालय में खासतौर पर वरिष्ठ अधीक्षक अपनी तैनाती अपने दाग (घोटाले व विभागीय जांचों) को निपटाने के लिए कराते है। कई अधिकारी गंभीर मामलों के आरोपी होने के बाद भी विभाग से बेदाग होकर निकल भी गए है। सूत्रों का कहना है कि झांसी बंदीरक्षक भर्ती घोटाले के दो आरोपी जिन्हें जांच में दोषी ठहराया गया। इन अधिकारियों से भर्ती में अनियमिताएं बरतने के लिए लिए इनसे लाखो रुपये की रिकवरी करने का भी आदेश हुआ। लंबे समय तक मुख्यालय में जमे रहे इन अधिकारियों ने ऊंची पहुंच, जुगाड़ व धनबल के सहारे सभी मामलों में क्लीन चिट पांकर विभाग से निकल भी गए। भर्ती में घोटाला व रिकवरी जैसे गंभीर प्रकरणों ने सवाल खड़े कर दिए है।

इसी प्रकार इसी प्रकार आगरा में हुए बंदीरक्षक भर्ती घोटाले की जांच विजिलेंस से कराई गई। इस जांच में मुख्यालय में तैनात वरिष्ठ अधीक्षक को दोषी ठहराया गया। विभाग में सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने के बावजूद जांच में दोषी पाए जाने वजह से इन्हें प्रोन्नति नही दी गयी। यह अलग बात है कि जांच को छिपाकर इन्हें राष्ट्रपति के शौर्य पदक से अलंकृत जरूर करा दिया गया। प्रकरण की जांच चल रही है। कार्यवाही के लिए विजिलेंस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के अनुमोदन के इंतजार है। यही नही बीते दिनों नैनी जेल में तैनाती के दौरान अनियमिताएं मिलने पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबित भी किया जा चुका है। इस अधिकारी को गोपनीय अनुभाग का प्रभारी अधिकारी भी बनाया गया है। सूत्र बताते है यह तो बानगी भर है इस प्रकार पहले भी कई अधिकारी क्लीन चिट लेकर निकल चुके है। उधर जेल मुख्यालय केवफसर इस मसले प्रंकोइ भी टिप्पणी करने से बचते नज़र आये।

वर्षो से जमे स्टेनो पर नहीं हुई कोई कार्यवाही

डीआईजी जेल लखनऊ परिक्षेत्र कार्यालय में पिछले करीब तीन दशक से जमे स्टेनो पर अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई है। पिछले दिनों प्रदेश की कोरोना डेस्क का प्रभार संभालने वाले स्टेनो से जब कोरोना संक्रमित बंदियो की संख्या पूछी गयी तो पहले तो उसने कहा पता नही है। प्रभार डीआईजी मुख्यालय के पास होने के सवाल पर कहा कोई संक्रमित ही नही है, जबकि जेलो में करीब डेढ़ हजार संक्रमित बन्दी थे। लखनऊ जेल में पूर्व डीआईजी जेल के साथ जांच करने गए स्टेनो ने मोटी डील कर पूरे मामले को ही रफादफा कर दिया। शिकायत पर डीजी ने जांच में दोषी पाए जाने पर कार्यवाही की बात कही थी किन्तु अभी तक कोई कार्यवाही की नही गयी।

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