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दिल्ली नहीं गए बंगाल के चीफ सेकेट्री, DOPT के फैसले पर सवाल !

Chief Secretary of Bengal did not go to Delhi, questioned the decision of DOPT!

ममता ने पीएम को लिखी चिट्ठी में कहा कि नहीं भेज सकते दिल्ली

प्रशासनिक टीम कोविड से निपटने और तूफान प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय


विशेष संवाददाता


कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख साफ कह दिया है कि वो राज्य के मुख्य सचिव आलापन बंद्योपाध्याय को दिल्ली नहीं भेज सकती। ममता बनर्जी ने चिट्ठी में लिखा है इस वक़्त सरकार और प्रशासनिक मशीनरी कोविड संक्रमण रोकने और तूफान प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य में लगी है। ऐसे में पश्चिम बंगाल सरकार अपने मुख्य सचिव को रिलीज़ नहीं कर सकती और न ही कर रही है। वहीं मुख्य सचिव को दिल्ली डीओपीटी बुलाने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। सत्ता के गलियारे ये कहा जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व राज्य के इन्ही मुख्य सचिव की कार्यशैली देखकर मोदी सरकार की डीओपीटी ने उन्हें सेवा विस्तार दिया था। एक्सटेंशन को कुछ दिन भी नहीं हुए कि अब यही मुख्य सचिव डीओपीटी को क्यों अखरने लगे ? क्या मोदी के अफसरों ने यह फैसला बगैर सोचे समझे ही कर डाला?

अटपटा फैसला

वहीं ममता ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वो इस आदेश को वापस लें। मोदी के अफसरों के इस अटपटे फैसले के कारण पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और केन्द्र सरकार के बीच ये मुद्दा टकराव की ओर बढ़ता जा रहा है। बता दें कि पिछले दिनों यास चक्रवाती तूफ़ान के बाद हालात का जायज़ा लेने पहुँचे प्रधानमंत्री की बैठक से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य सचिव आलापन बंद्योपाध्याय नदारद रहे थे। इसके बाद ही केंद्र की ओर से आलापन बंद्योपाध्याय को प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली आने का आदेश जारी कर दिया। इस अटपटे आदेश को लेकर मोदी सरकार की आलोचना भी हो रही है। सवाल उठ रहा है कि आखिर मोदी की नौकरशाही ने क्या बगैर सोचे-समझे यह आदेश जारी कर दिया।

मुख्यमंत्री के साथ नहीं थी यह बैठक

वहीं ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनकी सरकार को परेशान कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री की मीटिंग में नही जाने के फ़ैसले को सही ठहराते हुए कहा कि ये बैठक मुख्यमंत्री के साथ होनी थी मगर इसमें राज्यपाल और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को बुलाकर इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया। केंद्र ने इस वाक़ये के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली बुला लिया है। कुछ दिन पहले ही बंदोपाध्याय को केंद्र ने एक्सटेंशन दिया था। ममता बनर्जी ने उन्हें रिलीज़ करने को लेकर अभी कुछ नहीं कहा है और आदेश को रद्द करने की मांग की है।टीएमसी सूत्रों का कहना कि ममता इस मामले में क़ानूनी सलाह ले सकती हैं।

ममता ने क्या कहा?

इससे पहले शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री ममताने कहा कि पहले समीक्षा बैठक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच होनी थी। इसके लिए मैंने अपने दौरे में कटौती की और कलाईकुंडा जाने का कार्यक्रम बनाया। बाद में बैठक में आमंत्रितों की संशोधित सूची में राज्यपाल, केंद्रीय मंत्रियों और विपक्ष के नेता का नाम भी शामिल किया गया। इसलिए मैंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि यह प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच बैठक थी ही नहीं…”

.मुझे काफ़ी देर इंतज़ार करना पड़ाः ममता

ममता ने कहा, “एटीसी ने प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरने की वजह से मुझे 20 मिनट की देरी से सागर द्वीप से कलाईकुंडा के लिए रवाना होने को कहा था। “उसके बाद कलाईकुंडा में भी करीब 15 मिनट बाद हेलीकॉप्टर उतरने की अनुमति मिली। तब तक प्रधानमंत्री पहुंच गए थे। मैंने वहां जाकर उनसे मुलाकात की अनुमति मांगी। लेकिन काफी इंतजार के बाद मुझे उनसे मुलाकात की अनुमति दी गई।

“मैंने प्रधानमंत्री को रिपोर्ट सौंपी और उनकी अनुमति लेकर दीघा के लिए रवाना हो गईं लेकिन शाम को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के दफ्तर से मुझे बदनाम करने के अभियान के तहत लगातार खबरें और बयान जारी किए गए। इसके बाद राज्य सरकार से बगैर सलाह-मशविरा किए मुख्य सचिव को अचानक दिल्ली बुला लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार हमेशा टकराव के मूड में रही है। चुनावी नतीजों के बाद भी राज्यपाल और दूसरे नेता लगातार आक्रामक मूड में हैं। दरअसल, भाजपा अपनी हार नहीं पचा पा रही है. इसलिए बदले की राजनीति के तहत यह सब कर रही है। ममता ने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाकर केंद्र सरकार तूफान राहत और कोविड के खिलाफ लड़ाई में सरकार को अशांत करना चाहती है।ममता ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा, “मुख्य सचिव को राजनीतिक बदले का शिकार मत बनाएं।

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