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दीदी की आलोचना बंदकर आत्मनिरीक्षण करें, बीजेपी सांसद मुकल रॉय के बेटे की बीजेपी को नसीहत

Stop criticizing Didi and introspect, edify BJP MP Mukal Roy's son to BJP

कोलकाता। लगता है पश्चिम बंगाल में मिली करारी हार के बाद टीएमसी से बीजेपी में आए नेताओं में बैचेनी बढ़ती जा रही है। टीएमसी से बीजेपी में आए सांसद मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपनी ही पार्टी को नसीहत देते हुए कहा है कि पार्टी ममता सरकार की आलोचना करना बंद करे। उनकी इस नसीहत के बाद अब ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या बंगाल बीजेपी में चुनावी हार के बाद बीजेपी में असंतोष है। शनिवार को शुभ्रांशु रॉय ने फेसबुक पर लिखा, “लोगों के समर्थन से आई सरकार की आलोचना करने से पहले आत्ममंथन करने की जरूरत है। चुनी हुई सरकार की आलोचना करना बंद करें और आत्मनिरीक्षण करें। उनकी यह टिप्पणी उस वक्त आयी है जब प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक को लेकर बीजेपी के दिग्गज मंत्री पं.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता की आलोचना कर रहे थे। शुभ्रांशु रॉय भी साल 2019 में टीएमसी छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। हाल ही में हुए विधान सभा चुनावों में उन्होंने बिजपुर विधान सभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं सके।

वहीं इससे पहले तृणमूल कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा में शामिल होने वाली पूर्व विधायक सोनाली गुहा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर पार्टी छोड़ने के लिए माफी मांगी थी और वापस पार्टी में शामिल करने की गुजारिश कर चुकी है। उन्होंने कहा, मैं यह टूटे हुए दिल के साथ लिख रही हूं कि मैंने भावना में बहकर किसी अन्य पार्टी में शामिल होने का निर्णय ले लिया था और मैं वहां अभ्यस्त नहीं हो पाई। उन्होंने कहा, जिस तरह से मछली जल के बाहर नहीं रह सकती है, ठीक उसी तरह से मैं भी आपके बिना नहीं रह सकती हूं ‘दीदी। मैं माफी मांगती हूँ और अगर आप मुझे माफ नहीं करती हैं तो मैं जी नहीं पाऊंगी।

फाइल फोटोः टीएमसी से बीजेपी में शामिल होने के दौरान बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ शुभ्रांशु रॉय.
फाइल फोटोः टीएमसी से बीजेपी में शामिल होने के दौरान बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ शुभ्रांशु रॉय.

बता दें कि पिछले दिनों आए ‘यास’ तूफान से हुई तबाही का जायजा लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता पहुंचे थे और उन्होंने इसकी एक समीक्षा बैठक की थी। सीएम ममता बनर्जी और उनके मुख्य सचिव इस बैठक में 30 मिनट की देरी से पहुंची थी। इतना ही नहीं ममता 20 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांग वाली लिस्ट पीएम को थमाकर बैठक से चली गई थीं। बीजेपी ममता के इस व्यवहार पर उनकी आलोचना कर रही है। पीएम की अगुवाई नहीं करने पर भी बीजेपी ने उन्हें लगातार घेर रही है। हालांकि, ममता बनर्जी ने भी आरोपों पर जवाब दिया है।

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