Raj Dharm UPYouth Employment

चुनौती बने रोजगार और रहने की- रियल एस्टेट और सर्राफा बाजार पड़ी ठंडी

The challenge of employment and living - real estate and bullion market cold

पटरी दुकानदार बेहाल, कपड़ा व्यवसाई गिरे औंधे मुंह, महामारी से धड़ाम हुआ कारोबार


ए अहमद सौदागर


लखनऊ। कोरोना वायरस जैसी फैली महामारी से जमीन कारोबार, सर्राफा व्यवसाय, कपड़ा कारोबार व पटरी दुकानदारों का व्यापार धड़ाम हो गया है। कारोबारियों के लिए बचत तो दूर लागत निकालना मुश्किल है। यही वजह है कि सोना-चांदी के व्यवसाय 80 प्रतिशत और जमीन कारोबार शून्य पर पहुंचने की कगार पर आ गया है। महामारी के इस दौर में सोने-चांदी और रियल एस्टेट तथा कपड़ा कारोबार में आई मंदी की वजह से छोटे कारोबारी फिलहाल औंधे मुंह गिरे नजर आ रहे हैं। यही नहीं गौर करें तो रियल एस्टेट के कारोबार में सरकार स्टांप की बिक्री में भी खासा नुकसान हुआ है।

यही नहीं पटरी दुकानदारों के हालातों पर गहन नजर डालें तो वे भागमभाग जैसी जिन्दगी गुजारने के लिए मजबूर हैं। क्योंकि सड़क पर निकलते ही उन्हें पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ रहा है। इस आपदा के दौर में भले ही तरह-तरह की बयानबाजी चल रही हो, लेकिन कड़वा सच यही है कि सोने-चांदी, ज़मीन कारोबार से लेकर अन्य व्यवसाय अर्श से फर्श पर आ गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक सर्राफा व्यवसाई ने बताया कि महामारी के इस दौर में सोने-चांदी के कारोबार 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जबकि जमीन कारोबार से जुड़े एक शख्स के मुताबिक जमीन कारोबार तो शून्य पर पहुंच गया है, जिसके चलते परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

,,,, आपदा के दौर में ठंडे हुए कई चूल्हे,

रोज कमाकर ख़ान वाले हजारों लोग बेहाल

चोरी-छिपे खुली दुकानें, बिक्री न होने से परेशान

राजधानी लखनऊ के शहरी क्षेत्र से कुछ दूरी पर स्थित सड़क किनारे फल और सब्जियां बेचने वाले दो लोग ठेले के बगल में स्टूल पर उदास बैठ थे। वे टकटकी लगाए थे कि कोई ग्राहक आ जाए। तभी नया लुक का संवाददाता उनके करीब पहुंचा। बिक्री के बारे में पूछा तो उनका दर्द छलक उठा, नाम न छापने की शर्त पर दोनों लोग बोल पड़े कि सुबह से ठेला लगाया है लेकिन बिक्री नहीं हो रही है। ठेला लेकर रोज आए, लेकिन खौफ के इस माहौल की वजह से लौटना पड़ रहा है। यह हाल दो ठेलिया दुकानदारों का नहीं। इस महामारी के प्रकोप ने ऐसे कई घरों के चूल्हे ठंडे कर दिए, जो रोज़ कमाकर अपनी जीविका चलाते हैं।

Related Articles

Back to top button