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घर-घर में ताजा दुग्ध उपलब्ध कराने में ग्वालों का महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. बी0के0 सिंह, पूर्व जोन प्रबन्धक, उ0प्र0 पशुधन विकास परिषद् गोरखपुर जोन, गोरखपुर

भारत वर्ष में 90 करोड़ से अधिक परिवार दुग्ध उत्पादन उद्योग(Milk production industry) से रोजगार प्राप्त करते हैं। जिसमें लगभग 75 प्रतिशत महिलाओं का योगदान है। स्थानीय स्तर पर सहकारी दुग्ध समितियों और छोटे-छोटे विक्रेताओं का एक महत्वपूर्ण नेटवर्क है। इसी नेटवर्क ने देश को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना दिया।

इस नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं- ग्वाले, जो असंगठित एवं संगठित क्षेत्रों से दुग्ध एकत्र करके घरों, चाय की दुकानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों इत्यादि पर प्रतिदिन ताजा दुग्ध उपलब्ध कराते हैं। यह व्यवसाय छोटे, सीमांत एवं भूमिहीन किसानों(ग्वालों) के रोजगार हेतु महत्वपूर्ण साधन है, जिससे उनके परिवारों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।

दुग्ध भारतीय खान-पान का महत्वपूर्ण हिस्सा ही नहीं बल्कि, संस्कारों की धरोहर है- जो जन्म से मरण तक मानव जीवन पथ (Human way of life) को अमृतमयी बनाता है। भारतीय सांस्कृतिक(Indian cultural) परम्पराओं के सभी कार्यों में गाय का दुग्ध सर्व था महत्वपूर्ण होता है। गाय का दूध विशेष रूप से जीवन शक्ति को बढ़ाने वाला रसायन है। सफेद गाय का दूध पित्तनाशक, काली गाय का दूध वात नाशक तथा लाल रंग की गाय का दूध कफ नाशक एवं  कपिल वर्ण की गाय का दूध त्रिदोश नाशक माना जाता है।

हमारे पूर्वजों ने दुग्ध सेवन की एक नियमावली बनायी थी तथा उसी के अनुसार उसका उपयोग करते थे। वह समय, दिन, माह तथा बर्तनों के प्रकार पर निर्धारित था। तांबे के पात्र में रखा दूध वात नाशक, सोने के बर्तन में रखा दुग्ध पित्त नाशक, चांदी के बर्तन में रखा दुग्ध कफ नाशक, कांसे के बर्तन में रखा दुग्ध रक्त शोधक, लोहे बर्तन में रखा दुग्ध कृमि, पित्त एवं कफ नाशक एवं मिट्टी के बर्तन में रखा गया दुग्ध सर्वोत्तम गुणों वाला होता है। प्रातः होते ही बच्चों को दुग्ध दिया जाता था एवं सोने के पहले दूध पीकर ही सोने की परम्परा थी। जिसमें वैज्ञानिक पहलू स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से समाहित था।

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दुग्ध से बने घी, मट्ठे, दही, मक्खन इत्यादि प्रयोग भी समयानुसार एवं भोजनानुसार प्रयोग होता था और ये सभी मानसिक एवं शारीरिक रूप से अत्यन्त उपयोगी होते थे। दुग्ध सेवन विधि की कुछ मान्यतायें हैं, जैसे कि- चितकबरी गाय(Pied cow) का दूध जुकाम बढ़ाने वाला होता है, क्योंकि इसकी तासीर शीतल होती है, बिना उबाले दुग्ध सेवन नहीं करना चाहिए, दूध के साथ नमक वर्जित है, कन्द फलों, अचार, मूंग, तोरी के साथ भी दुग्ध सेवन हानिकारक होता है। दुग्ध तत्काल रोजपरक होने के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य का साधन मात्र ही नहीं है बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की अर्थिक समृद्धि का सर्वथा उपयुक्त साधन है। ग्वाले- जो प्रत्येक घर में दुग्ध उपलब्ध कराने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, उनके योगदान को सराहने की आवश्यकता है।

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