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कोरोना संकटकाल में विधानसभा चुनाव कराने वाला बिहार 5 राज्यों के लिए बनेगा ‘रोल मॉडल’

शंभू नाथ गौतम

आज बात होगी बिहार की । अपने कुशल चुनावी प्रबंधन से यह राज्य सुर्खियों में है । बात को आगे बढ़ाएं उससे पहले आपको कुछ माह पीछे लिए चलते हैं ।‌ यही राज्य ऐसा था जिसने ‘कोरोना के पीक काल’ में पहले चुनाव आयोजित कराए थे। इस महामारी को देखते हुए कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव टालने के लिए याचिका भी डाली थी लेकिन अदालत ने बिहार में चुनाव कराने का फैसला निर्वाचन आयोग के पाले में डाल दिया था ।

जब निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान किया था, तब उसके सामने भी इस राज्य में चुनाव कराने की चुनौती कम नहीं थी ।‌ उसके बाद बिहार का चुनाव प्रबंधन उम्मीदों पर खरा उतरा और महामारी के बीच में चुनाव संपन्न हुए थे । विधानसभा चुनाव सकुशल कराने के बाद बिहार की डिमांड बढ़ गई है । अब ये पांच राज्य विधानसभा चुनाव कराने के लिए बिहार का फार्मूला अपनाना चाहते हैं । अब चंद महीनों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने को तैयार है ।

हालांकि अभी कोविड-19 देश में खत्म नहीं हुआ है ऐसे में इन राज्यों ने अब बिहार से गुहार लगाई है । ऐसे में इन राज्यों के लिए बिहार कोरोना काल में सकुशल चुनाव कराने के लिए ‘रोल मॉडल’ बनेगा । बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि इन राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को देखते हुए वहां के अधिकारियों ने अपने यहां सफल चुनाव कराने के लिए अपना अनुभव साझा करने के लिए अनुरोध किया है । प्रधान सचिव अमृत ने बताया कि हमारी टीम जल्द ही इन राज्यों में दौरा करेगी और अपना अनुभव इन राज्यों के चुनाव आयोग और प्रशासन को बताएगी ।‌

बिहार ने चुनाव कराकर देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी पीठ थपथपाई..

देश ही नहीं बल्कि दुनिया में बिहार ऐसा राज्य है, जहां कोरोना संकटकाल में पहले चुनाव आयोजित किए गए थे । विधानसभा चुनाव सकुशल कराने के बाद इस राज्य ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा था, चुनावी प्रबंधन को लेकर बिहार की सराहना भी हुई थी। हम आपको बता दें कि बिहार की जनसंख्या विशेष तौर पर पिछड़े-ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता न होने के बाद किसी को भी अंदाजा नहीं था कि यहां इस महामारी के बीच चुनाव का प्रबंधन इतना सही हो सकेगा । गौरतलब है। कि अक्टूबर-नवंबर 2020 में 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा का चुनाव सफलतापूर्वक कराने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कार्य पद्धति की सराहना की थी ।

 

प्रशासन ने 7.3 करोड़ मतदाताओं के लिए 1.06 लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाए। अब आपको बताते हैं चुनाव के दौरान प्रशासन ने क्या किए थे प्रबंध। मतदान और सुरक्षा कर्मियों के लिए 18 लाख फेस शील्ड, 70 लाख मास्क, 5.4 लाख सिंगल यूज रबर के दस्ताने खरीदे थे और मतदाताओं के लिए 7.21 करोड़ एक हाथ से इस्तेमाल होने वाले पॉलिथीन दस्ताने खरीदे थे। मतदान केंद्रों पर थर्मल स्कैनिंग के लिए एएनएम, पैरामेडिक्स और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। मतदान के दिन दो बार कचरे को इकट्ठा करने के लिए ट्रकों की व्यवस्था की गई। अपशिष्ट पदार्थ मानक प्रोटोकॉल के अनुसार निकटतम नियत स्वास्थ्य सुविधा वाली जगहों पर जमा किए गए थे ।

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