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एक भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

स्वामी विवेकानन्द ने दुनिया को भारतीय चिंतन का बोध कराया था। वह ब्रिटिश दासता का दौर था। अंतरराष्ट्रीय मंचो पर भी भारतीयों को इसकी अनुभूति होती थी। लेकिन स्वामी विवेकानन्द ने ऐसे ही मंच पर भारतीय चिंतन की पताका फहराई थी। उन्होंने दिखा दिया कि भारत राजनीतिक रूप से भले ही परतंत्र है लेकिन सांस्कृतिक रूप में उसको पराधीन नहीं बनाया जा सकता। विश्व में शांति व सौहार्द का सन्देश हमारी ही संस्कृति में निहित है।

अनुकूल माहौल का निर्माण

स्वामी विवेकानन्द स्वाभिमानी व स्वावलम्बी भारत देखना चाहते थे। पिछले छह वर्षो में देश उसी दिशा में अग्रसर है। नई शिक्षा नीति भी इस अभियान में सहायक सिध्द होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में सर्वांगीण उन्नति का माहौल बनाया जा रहा है। गुलामी के लम्बे कालखण्ड ने भारत को हजारों वर्षों की अपनी ताकत और ताकत के एहसास से दूर कर दिया था।

राष्ट्रवाद व राष्ट्रनिर्माण

स्वामी विवेकानंद  ने भारत को उसकी ताकत याद दिलाई और एहसास कराया। स्वामी विवेकानन्द सदैव प्रासंगिक रहेंगे। अध्यात्म, राष्ट्रवाद राष्ट्रनिर्माण जनसेवा जगसेवा को लेकर उनके विचार आज हमारे मन मंदिर में उतनी ही तीव्रता से प्रवाहित होते हैं। वह व्यक्तियों के व संस्थाओं के निर्माण की प्रेरणा देते है। स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्रीय भावना और चेतना को जगाया।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक कदम है। एक इको सिस्टम जा रहा है। जो युवाओं को बेहतर अवसर देगा। स्वामी जी ने शारीरिक और मानसिक शक्ति पर समान रूप से जोर दिया।

नुकसानदेह है वंशवाद की राजनीति

नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ बदलाव बाकी हैं। यह बदलाव देश के युवाओं को ही करने हैं। राजनीतिक वंशवाद देश के सामने ऐसी ही चुनौती है जिसे जड़ से उखाड़ना है। अब केवल सरनेम के सहारे चुनाव जीतने वालों के दिन लदने लगे हैं। लेकिन राजनीति में वंशवाद का ये रोग पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आज की राजनीति में निष्पक्ष लोगों को भी मौका मिल रहा है। ईमानदारी और प्रदर्शन आज की राजनीति की पहली अनिवार्य शर्त होती है। भ्रष्टाचार जिनकी विरासत थी, उनका भ्रष्टाचार ही आज उन पर दाग बन गया है।

वह लाख कोशिशों के बाद भी इससे उबर नहीं पा रहे हैं। अभी भी ऐसे लोग हैं, जिनका विचार, जिनका आचार लक्ष्य, सब कुछ अपने परिवार की राजनीति और राजनीति में अपने परिवार को बचाने का है। राजनीतिक वंशवाद लोकतंत्र में तानाशाही के साथ ही अक्षमता को भी बढ़ावा देता है। राजनीतिक वंशवाद में नेशन फर्स्ट नहीं होता है।

नए भारत की प्रतिबद्धता

कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पूरी प्रतिबद्धता के साथ स्वामी विवेकानन्द जी के सपनों को साकार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के नये भारत’ के संकल्प को साकार करने में युवाओं की विशेष भूमिका है। यह न्यू इण्डिया एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। नये भारत के युग निर्माता के रूप में सभी युवाओं को अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभानी होगी।

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