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ऑनलाइन ट्यूटरिंग अपनाने वाले शिक्षकों के शिक्षण व्यवसाय में 400% की बढ़ोतरी देखी गई : टीचमिंट

नई दिल्ली ।  भारत में प्रासंगिक डिजिटल ट्यूटरिंग सोल्युशन पर ध्यान केंद्रित करने वाली भारत के अग्रणी एडटेक कंपनी टीचमिंट, ने आज बताया कि पारंपरिक क्लासरूम सेट-अप को छोड़कर ऑनलाइन ट्यूटरिंग अपनाने वाले शिक्षकों द्वारा साइन-अप करने के 8 सप्ताह में उन्होंने अपने शिक्षण व्यवसाय में औसतन 4 गुना बढ़ोतरी देखी है। यह डेटा प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय शिक्षकों द्वारा स्टूडेंट एनरोलमेंट की संख्या में बढ़ोतरी के विश्लेषण पर आधारित है।

अभी तक 2.5 लाख शिक्षक टीचमिंट पर साइन-अप कर चुके हैं और यह संख्या हर महीने 50,000 से अधिक नए पंजीकरणों के साथ बढ़ती जा रही है। महामारी के कारण हुई लॉक-डाउन की स्थिति में पिछले 2 महीनों में काफी सुधार होने के बावजूद भी इस प्लेटफॉर्म की तरफ ट्यूटर्स के रुझान में कोई कमी नहीं आई है, और ना ही स्टूडेंट्स में कोई कमी आई है, और इसी कारण ऐसी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। व्यक्तिगत शिक्षक की बात की जाए तो उनके स्टूडेंट एनरोलमेंट में 200% से लेकर 1000% तक की बढ़ोतरी हो रही है, कुछ शिक्षक तो अब अपनी क्लासरूम में 1600 से ज़्यादा स्टूडेंट्स जोड़ रहे हैं, इन चीज़ों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षक डिजिटल प्लेटफॉर्म अपना कर कितनी ज़्यादा कमाई कर सकते हैं।

इस बढ़ोतरी का अच्छी तरह से विश्लेषण करने के बाद कुछ ख़ास कारण सामने आए हैं जिनकी वजह से शिक्षक डिजिटल प्लेटफॉर्म अपना रहे हैं। इनमें से पहला कारण यह है कि शिक्षक अब आसानी से कंटेंट डिलीवरी, स्टूडेंट को व्यस्त रखना और प्रशासनिक वर्कफ़्लो सहित अपने पूरे शिक्षण व्यसाय को डिजिटल रूप देने में सक्षम है। एक डिजिटल उपस्थिति का मतलब यह भी है कि ट्यूटर अब अपनी दुनिया के किसी भी कोने से क्लास ले सकते हैं। और अब वे किसी एक स्थान से बंधे हुए नहीं हैं। इस अपूर्व बढ़ोतरी के पीछे और एक कारण है वह यह है। कि शिक्षकों को डिजिटल क्लासरूम बनाने में लगने वाला नाम मात्र का समय और संसाधन की दक्षता जैसी सुविधाएँ पहले कभी नहीं मिली थी, जिससे कि ट्यूटर्स इतने सारे स्टूडेंट को एक साथ पढ़ा सकते हैं।

इतने बड़े पैमाने पर सफलता पाने का एक कारण यह भी है कि अब ट्यूटर्स को काफी अच्छे ऑनलाइन साधनों की काफी अच्छी जानकारी भी है, जिनका इस्तेमाल करके वे अपने स्टूडेंट के लिए कल्पनाशील और अपने हिसाब से पढ़ाने की कार्य पद्धति बना सकते हैं, जिससे की स्टूडेंट्स को भी सीखने का और बेहतर अनुभव मिलता है। यहां बताए गए सभी कारणों की वजह से आज तकनीक की जानकारी रखने वाले और तकनीक से प्यार करने वाले ट्यूटर्स की नई पीढ़ी अपने सोशल नेटवर्क पर भी सकारात्मक चर्चा करके फायदा उठा रही है, जिसकी वजह से आज बहुत बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स उनके क्लासरूम में जुड़ते ही जा रहे हैं।

टीचमिंट के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर गुप्ता ने बताया कि, “आमने-सामने पढ़ाने वाले ट्यूटर की नीति भारतीय शिक्षा क्षेत्र का मुख्य आधार है, जिससे कि यह कंटेंट आधारित सेल्फ-लर्निंग मॉडल के उलट ट्यूटर सेवाओं का डिजिटलीकरण करने को और ज़्यादा मजबूत बनाता है। हालांकि, शिक्षण का यह रूप पारंपरिक रूप से काफी लागत वाला है और इसे बढ़ाना मुश्किल है। डिजिटलीकरण ने सारी सीमाओं को तोड़ दिया है और शिक्षकों के लिए बिना कोई पूंजी निवेश किए भौतिक और भौगोलिक सीमाओं से परे अनगिनत अवसर के दरवाज़े खोल दिए हैं।

आज, Teachmint पर शिक्षक काफी ज़्यादा संख्या में पड़ोस के शहरों में रहने वाले स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं और एक उन्हें पढ़ने का बेहतर माहौल और अनुभव दे रहे हैं।" इसके साथ ही उन्होनें कहा कि "अब, शिक्षक अपनी विशेषज्ञता और किसी विषय में अपनी महारत पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा स्टूडेंट को प्रति स्टूडेंट नाम मात्र की लागत पर ज़्यादा कुशलता से पढ़ाया जा सके।“ डिजिटल शिक्षण के ज़रिए आप कितना फ़ायदा उठा सकते हैं इसका एक उदाहरण अजय गुप्ता हैं, जो दिल्ली के रहने वाले ट्यूटर हैं और स्टूडेंट्स को CA परीक्षा की तैयार करवाते हैं।

गुप्ता टीचमिंट पर सब्सक्राइब करने के एक महीने के अंदर ही अपना स्टूडेंट बेस 3 से लेकर 50 स्टूडेंट तक बढ़ाने में कामयाब रहे हैं।  गुप्ता ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि, “मैं टीचमिंट का हिस्सा बनने पर खुद को वास्तव में भाग्यशाली मानता हूँ। इसका इस्तेमाल करना बहुत आसान और असरदार है। डिजिटलीकरण को अपनाने के बाद मेरे स्टूडेंट्स ने अपने नेटवर्क पर यह बात फैलानी शुरू कर दी और आज मेरे पास जम्मू से लगाकर चेन्नई तक के स्टूडेंट्स हैं। मेरे लिए यह अद्भुत है क्योंकि सिर्फ मैं पहले ही महीने में इतने सारे नए स्टूडेंट्स को ऑन बोर्ड लाने में कामयाब रहा। संचालन से जुड़ी अटेंडेंस, टेस्ट आदि जैसी चुनौतियां ऐप पर आसानी से मैनेज की जा सकती हैं, और इसी कारण से शिक्षकों को ये सब चीज़ें मैनेज करने की तुलना में अपने कंटेंट पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। ”

टीचमिंट ऐप पर अंग्रेजी की क्लास चलाने वाले उदित नारायण साहू, ज़मीनी स्तर पर डिजिटलीकरण की एक और कामयाबी की कहानी हैं। लगभग 4 सालों से छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक शिक्षण संस्थान चलाने वाले शिक्षक  साहू के लगभग सभी स्टूडेंट्स ने COVID-19 महामारी के कारण उनसे पढ़ना बंद कर दिया था। साहू ने दिसंबर की शुरुआत में टीचमिंट ऐप जॉइन किया था। उन्होंने कहा कि “यह मेरा ऑनलाइन टीचिंग का पहला अनुभव है और मैंने जितना सोचा था उससे यह काफी ज़्यादा आसान है। ऐप पर दो सप्ताह में ही मैंने अपने आसपास के क्षेत्रों से 37 नए स्टूडेंट्स को अपने क्लासरूम में जोड़ने में सफलता हासिल कर ली है। शुरुआत में मैंने सोचा था कि जब तक चीजें वापस सामान्य नहीं हो जातीं, तब तक मैं ऐसा करूँगा। लेकिन अब मुझे एहसास हुआ है कि मैं शायद कभी भी फुल टाइम ऑफ़लाइन तरीके से नहीं पढ़ाना चाहूंगा। ”

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि वर्तमान में चल रही इस वैश्विक महामारी के कारण लोग बहुत तेज़ी से ऑनलाइन लर्निंग को अपना रहे हैं। स्टूडेंट्स, शिक्षक और यहां तक कि माता-पिता ने इस बदले हुए समय में टीचमिंट जैसे ब्रांड द्वारा दी जाने वाली ऑनलाइन शिक्षा के हिसाब से खुद को ढाल लिया है। टीचमिंट ट्यूटर्स को अपनी कक्षाओं को बेहतर ढंग से चलाने के नए साधन देता है जिससे कि सीखने का अनुभव बढ़ता है और उन्हें अपने अनूठे तरीके से स्टूडेंट्स को पढ़ाने में मदद मिलती है।

शिक्षकों के फीडबैक के मुताबिक, टीचमिंट की सबसे ख़ास बात यही है की इसका इस्तेमाल करना बहुत ही ज़्यादा आसान है। यह प्लेटफॉर्म उन्हें कक्षाओं का संचालन करने के लिए कई तरह के अलग-अलग साधन चुनने का विकल्प देता हैं जिनसे उन्हें डिजिटल रूप से एक वास्तविक क्लासरूम का अनुभव मिलता है, और सबसे ख़ास बात यह है कि कम नेटवर्क / बैंडविड्थ वाले क्षेत्रों में भी बिना किसी रूकावट के क्लास चलाई जा सकती है।

 

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