National

बीजेपी और आरएसएस के बिछाए जाल में खुद फंसने को आतुर हैं ममता 

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की आमद से घबराई तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बीजेपी को उन्हीं के पत्ते से काटने पर आमादा है। ममता को उम्मीद है कि भाजपा के हिंदू नैरेटिव के खिलाफ वह पश्चिम बंगाल में बांग्ला नैरेटिव गढ़ने में कामयाब हो जाएंगी और उनका गढ़ बच जाएगा। हालांकि आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के साथ चुनाव लड़ने की आहट के बीच यह तय दिख रहा है कि ममता अब बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बिछाए जाल में खुद फंसने को आतुर हैं। कोलकाता से आरडी स्वामी की रिपोर्ट…

नई दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीते महीने ही तृणमूल कांग्रेस सरकार पर हिंदू-विरोधी सोच रखने और मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर चलने का आरोप दोहराया था। उसके दो दिन बाद ही ममता ने पुरोहितों को मासिक भत्ता और मकान देने का एलान किया। ऐसे में उनके उस फ़ैसले को नड्डा के आरोपों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। ममता और उनकी पार्टी चाहे कुछ भी दावा करे, विपक्ष के इस आरोप में दम नज़र आता है कि सरकार के तमाम हालिया फैसले चुनावों को ध्यान में रख कर लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही राज्य में हिंदी भाषी वोटरों को अपने साथ जोड़ने के लिए तृणमूल कांग्रेस की हिंदी सेल का गठन करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को इसका चेयरमैन बनाया गया है।

 

पश्चिम बंगाल हिंदी समिति का विस्तार करते हुए कई नए सदस्यों और पत्रकारों को इसमें शामिल किया गया है। इसके साथ ही सरकार ने पहली बार दलित अकादमी के गठन का एलान करते हुए सड़क से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले मनोरंजन ब्यापारी को इसका अध्यक्ष बनाया है। दलित अकादमी के गठन के पीछे उनकी दलील है कि दलित भाषा का बांग्ला भाषा पर काफ़ी प्रभाव है। वर्ष 2011 में राज्य की सत्ता में आने के साल भर बाद ही ममता ने इमामों को ढाई हज़ार रुपए का मासिक भत्ता देने का एलान किया था। उनके इस फ़ैसले की काफ़ी आलोचना की गई थी। कलकत्ता हाईकोर्ट की आलोचना के बाद अब इस भत्ते को वक़्फ़ बोर्ड के ज़रिए दिया जाता है। अब मुख्यमंत्री ने अपने ताज़ा फ़ैसले में ममता ने राज्य के लगभग 37 हज़ार दुर्गापूजा समितियों को 50-50 हज़ार रुपए का अनुदान देने का एलान किया है।

चेतावनी : आईएमडी ने कहा, ‘तमिलनाडु के अलावा पुडुचेरी, केरल और आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों में भारी बारिश की आशंका’

यही नहीं, कोरोना और लॉकडाउन की वजह से आर्थिक तंगी का रोना रोने वाली मुख्यमंत्री ने पूजा समितियों को बिजली के बिल में 50 फ़ीसद छूट देने का तो एलान किया ही है, फ़ायर ब्रिगेड सेवा भी मुफ़्त करने का फ़ैसला किया है। इसके अलावा नगर निगम और नगरपालिकाएं अब आयोजन समितियों से कोई टैक्स नहीं वसूलेंगी।

जीत के लिए वामदलों को एकजुट कर सकती हैं ममता

दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व में बिहार में वाम दलों को 19 में से 12 सीटें जीतने में कामयाबी मिली है। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल में वाम नेता उस मॉडल को अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं। वाममोर्चा अध्यक्ष विमान बसु कहते हैं कि बंगाल का अपना अलग मॉडल है। यहां बिहार मॉडल अपनाने की कोई ज़रूरत नहीं है। दीपंकर का कहना था कि पश्चिम बंगाल में तमाम वामदल बीजेपी की बजाय तृणमूल कांग्रेस को ही अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मान कर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ममता बनर्जी के साथ हाथ मिलाने में कोई समस्या नहीं है।

दिन के तीन बजे तक के 9 मुख्य समाचार एक नजर में

दीपंकर के मुताबिक़, हमें यह समझना होगा कि देश के लोकतंत्र और नागरिकों के लिए बीजेपी सबसे प्रमुख दुश्मन है। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस इस श्रेणी में नहीं आते। दीपंकर की इस टिप्पणी से यहां माकपा मुख्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट में हलचल तेज़ हो गई है। विमान बसु समेत तमाम नेताओं ने दीपंकर की टिप्पणी के लिए उनकी खिंचाई की है। बीजेपी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर हिंदू-विरोधी होने का आरोप लगाती रही है। बीजेपी का आरोप यह भी रहा है कि ममता शुरू से ही अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति करती रही हैं और अब ममता की मौजूदा रणनीति को इन्हीं आरोपों के संदर्भ में देखा जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या भाजपा के इन आरोपों की वजह से ही ममता हिंदू-हिंदी कार्ड खेल कर इस तबक़े के वोटरों को अपने पाले में खींचने की क़वायद कर रही हैं? मुख्यमंत्री के मौजूदा फ़ैसलों से राजनीतिक हलक़ों में इन सवालों पर बहस तेज़ हो गई है।

बीते साल लोकसभा चुनावों में हिंदू-हिंदी वोटरों के भरोसे 42 में 18 सीटें जीतने वाली भाजपा ने सरकार पर चुनावी रणनीति के तहत ख़ैरात बांटने का आरोप लगाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर भाजपा अध्यक्ष जे.पी.नड्डा तक अगले साल बंगाल में पार्टी के सत्ता में आने का दावा कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ़ पीके की सलाह पर ही ममता ने हाल के तमाम फ़ैसले किए हैं। ममता के हाल के फ़ैसलों से साफ़ है कि वे ख़ुद पर लगे अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का दाग़ धोकर हिंदू तबक़े के वोटरों को भाजपा के पाले से खींच कर तृणमूल कांग्रेस की ओर लाना चाहती हैं। हालांकि ममता या उनकी पार्टी के लोग इसे स्वीकार नहीं करते। लेकिन इन पर न सिर्फ़ सवाल उठ रहे हैं बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी ज़ोर पकड़ रहा है।

नयालुक के और भी वीडियों को देखने के लिए दिए गए लिंक पर जाए-

Related Articles

Back to top button
Live Updates COVID-19 CASES