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कोरोना संकट के चलते शैक्षणिक गतिविधियां ‘आईसीयू‘ में

राजेश कुमार


त्रिवेदीगंज, बाराबंकी। कोरोना के अभिशप्त ग्रहण से सम्पूर्ण सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक कार्यक्षेत्र से प्रभावित हैं और कोरोना के इस बहुआयामी दुष्प्रभाव से शैक्षणिक क्षेत्र भी अछुता नहीं रहा है। विदित हो कि कोरोना संक्रमण काल में सभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद चल रही है या यूं कहा जा सकता है कि कोरोना संकट के चलते सभी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां ‘आईसीयू‘ में पहुंच गई हैं परन्तु ऐसी विकट परिस्थिति में बच्चों के शिक्षा को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता और इन्हीं नौनिहालों की भविष्य के मद्देनजर कोई न कोई रास्ता निकालना अब अपरिहार्य बन चुका है।

सौभाग्य से नई संचार टेक्नोलाॅजी की बदौलत अब किसी न किसी माध्यम से बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने में अब हम समर्थ है। इस क्रम में विकाश खंड छेत्र के विभिन्न संकुलों में शिक्षकों द्वारा कई प्रकार के शैक्षणिक नवाचार भी किये जा रहे है। ऐसे ही विकासखण्ड त्रिवेदीगंज के मोहम्मदपुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र पद पर कार्यरत शिक्षिका नीरज सिंह के द्वारा मोहल्ला क्लाश चलाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है वहीं शिक्षिका नीरज सिंह के द्वारा एंड्रायड फोन के माध्यम से वर्चुअल कक्षाएं लेकर उन्हें हिंदी व गणित विषय में पारंगत किया जा रहा है।

 

नीरज सिंह बताती हैं कि कोरोना संक्रमण और लाॅकडाउन के चलते पिछले 8 महीनो से शैक्षणिक गतिविधिया ठप्प चल रही है तो इन परिस्थितियों में वर्चुअल क्लास एवं मोहल्ला कक्षायें ही एक मात्र विकल्प रह गया है प्रारंभ में उन्होने ऑनलाइन वर्चुअल कक्षाओं का संचालन उपयुक्त प्रतीत हुआ इस क्रम में माह जुलाई में उन्होने कक्षा 1 से 3 के छात्रों को मोहल्ला क्लाश के साथ साथ सोशल मिडिया वाॅटसएप गु्रप बनाकर, ‘‘ऑनलाइन मोहम्मदपुर‘‘ लिंक के दवारा हिंदी व गणित विषय को पढ़ाना शुरू किया जो बच्चे मोहल्ला क्लाश में नहीं पहुंच पाते हैं उन बच्चो को शोशल मीडिया ग्रुप में जोड़कर पढ़ाया जाता है इस सोशल मिडिया ग्रुप में ग्राम मोहम्मदपुर के अलावा ग्राम धौरहरा, लोदीकोट गांव के 1 से 3 तक के बच्चों को कनेक्ट किया गया।

वे आगे बताती है कि इस वर्चुअल क्लास के संचालन में शुरूवात में कुछ दिक्कते भी आई जैसे कई छात्रों के एंड्रायड फोन उनके पालको के पास थे जो दिन भर अपने काम काज के सिलसिले में घर से बाहर रहते थे ऐसे में वर्चुअल क्लासों का समय प्रबंधंन नही हो पा रहा था। ऐसे छात्रों के लिए उनके पालको से चर्चा करके शाम का समय निर्धारण कर कक्षायें ली गई। ‘ऑनलाइन मोहम्मदपुर‘ लिंक के बारे मेें उन्होंने बताया कि इस लिंक के माध्यम से छात्र विषय संबंधित जानकारी, प्रश्नोतरी, विषय के शंका समाधान भी कर सकते है।

आज शिक्षामित्र नीरज सिंह के द्वारा कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए पूरी सुरक्षा के साथ एक बच्चे से दूसरे बच्चे की दूरी बनाकर व मास्क, सैनिटाइजर का प्रयोग कर मोहल्ला क्लाश चलाई जाती है वहीं मोहल्ला क्लाश में लगभग एक शिफ्ट में 10-15 बच्चो को पढ़ाया जा रहा है जबकि सिंह ने बताया कि हम 1 से 3 तक के बच्चों को अलग अलग 3-4 शिफ्टों में पढ़ते है और सभी शिफ्टों में 10-15 बच्चे आते है लगभग शिक्षामित्र के द्वारा मोहल्ला क्लाश में 60 व ऑनलाइन के माध्यम से 80 बच्चो को शिक्षा दी जा रही है।

गणित के सवालों का विडियों बनाकर ‘यूट्यूब‘ में किया अपलोड

अधिक से अधिक छात्रों को वर्चुअल क्लासों से जोड़ने के अपने प्रयासो में तेजी लाने के क्रम में शिक्षिका श्री मती नीरज सिंह ने व अविनाश कुमार शर्मा (प्रधानाध्यापक) प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर ने ‘यूट्यूब‘ के माध्यम से अपने विषय संबंधित विडियो को अपलोड करना शुरू कर दिया इसका कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि चूकिं कही कही शालाओं में विडियो अपलोड नही हो पा रहा था जबकी ‘यूट्यूब‘ में अपलोड करने में आसानी हो रही थी इस प्रतिसाद के कारण उन्होंने गणित के अलग अलग चैप्टर की व्याख्यात्मक जानकारी विडियों के माध्यम से अपलोड किया इस प्रकार इस विडियों शिक्षा के माध्यम से लगभग 80 स्थानीय छात्र जुड़े हुए है। नीरज सिंह न केवल प्रश्नोतरी के माध्यम से अपने छात्रों से जुड़ी है बल्कि उनसे ‘फीडबैक‘ लेते हुए गणित के कठिन अध्यायों के संबंध में मार्गदर्शन बराबर देती है।

यह बताना जरूरी होगा कि नीरज सिंह को बाराबंकी शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कोरोना महामारी के समय छात्रों की अनवरत पढ़ाई जारी रखने में स्वेच्छिक रूप से भागीदारी निभाने के लिए बराबर सहयोग मिला। इस संबंध में नीरज सिंह का मानना है कि कोरोना संकट काल में भले ही स्कूल काॅलेज बंद है परंतुु छात्रों तक शिक्षा की पहुँच होनी चाहिए चाहे वह मोहल्ला क्लास हो या फिर वर्चुअल कक्षा ऐसे में हर शिक्षक का यह गंभीर उत्तरदायित्व है कि वे अपने छात्रो के संपर्क में रह कर उनकी शिक्षा संबंधी हर जिज्ञासा का संमाधान तत्परता पूर्वक करे क्योंकि यह हर बच्चें के भविष्य का सवाल है और तो और शासन द्वारा भी इसमें निरंतर सहयोग किया जा रहा है छात्रों के संपर्क में रह कर ही हम पाठशाला के शिक्षा वातावरण को बरकरार रख सकते है। कुल मिला कर यही कहा जा सकता है कि नीरज सिंह जैसे शिक्षिकाओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा देने की यह पहल सराहनीय होने के साथ साथ अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा स्रोत है।

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