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शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती का काफी योगदान : संजय प्रसाद

लखनऊ ।  विद्या भारती का शिक्षा के क्षेत्र में काफी योगदान है। बीते कई दशकों से विद्या भारती के स्कूल उच्च कोटि की शिक्षा में योगदान दे रहे हैं। बच्चों के सर्वागीण विकास में विद्या भारती की अहम भूमिका है। उक्त बातें विशिष्ट अतिथि प्रमुख सचिव,  मुख्यमंत्री एवं सूचना  संजय प्रसाद  ने निरालानगर स्थित सरस्वती कुंज में प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केंद्र में शिक्षकों के पांच दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र में कहीं।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि  संजय प्रसाद  ने कोरोना संकट के समय शिक्षा के क्षेत्र में आई चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संकट काल में भी आचार्यों और छात्रों के बीच सम्पर्क बना रहे, इसके लिए विद्या भारती ने जो एलएमएस (लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम) एप खड़ा किया है, वह काफी सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पिछले काफी दिनों से स्कूल और कालेज बंद हैं, ऐसी स्थिति में विद्या भारती अपने आचार्यों को ट्रेनिंग दे रहा है, ताकि बच्चों को उच्च कोटि की शिक्षा दे सकें।

कार्यक्रम अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष सदानंद प्रसाद गुप्त  ने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार शिक्षा प्रदान करना है। हमें बच्चों को कैसे शिक्षा देनी है, इससे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है कि उन्हें हमें क्या शिक्षा देनी है। हमें अपने देश के नागरिकों को भारतोन्मुखी बनाना है। उन्होंने कहा कि बहुत प्रसन्नता की बात है कि विद्या भारती ने तकनीक को माध्यम बनाया है, जिससे हम उन विद्यार्थियों को शिक्षा दे पा रहे हैं, जिन तक हम पहुंच नहीं सकते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य का कोई विकल्प नहीं हो सकता है, तकनीक सिर्फ शिक्षा का माध्यम है।

इस दौरान उन्होंने देश में हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी के साथ-साथ भारत की अन्य भाषाओं को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने पर ज़ोर दिया।  मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के राष्ट्रीय मंत्री  शिवकुमार जी ने एलएमएस में आचार्यों के पीपीटी प्रशिक्षण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आचार्य कक्षा में जब बच्चों को पढ़ा रहे होते हैं तो वह प्रत्यक्ष रूप से भैया-बहिनों की मनोदशा को समझ पाते हैं और उनके विषय से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासा को दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल लर्निंग और प्रत्यक्ष शिक्षा पद्धति में अधिक भिन्नता नहीं होती है।

लेकिन जब आप तकनीक के माध्यम से बच्चों को पढ़ाते हैं तो आपको शिक्षक और छात्र दोनों बनकर पढ़ाना होता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिक्षण कार्य से पहले आपको विशेष तैयारियां करनी पड़ती है। यह सोचना पड़ता है कि जो विषय को हम पढ़ाने वाले हैं, उसको लेकर छात्रों के मन में कौन से प्रश्न उठेंगे और हमें कैसे उन प्रश्नों का शिक्षण के समय ही उत्तर देकर छात्रों की जिज्ञासा दूर करनी है। उन्होंने कहा कि सम्बन्धों में  साहित्य में शास्त्र और प्राणियों में आचार्य का कोई विकल्प नहीं है।

विशिष्ट अतिथि इंटरनेशनल मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म आर्थर डी लिटल के इंडिया एंड साउथ ईस्ट एशिया के मैनेजिंग पार्टनर एंड सीईओ  बारनिक चित्रण मैत्रा जी ने विद्या भारती के द्वारा शुरू किए गए एलएमएस की काफी सराहना की। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के समय में विद्या भारती के द्वारा तकनीक के जरिये आचार्यों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वह देश के लिए नया और अभूतपूर्व योगदान है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भारत के नव निर्माण में विद्या भारती की अहम भूमिका है।

विद्या भारती जो नई युवा पीढ़ी निर्माण कर रही है, वह आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को सफल बनाएगी। क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सौरभ जी ने विद्या भारती एलएमएस (लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम) और विद्या प्रबोधन एप के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एलएमएस एप एक ऐसा वर्चुअल स्कूल है, जहां सभी विषयों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है। पूरे देश में विद्या भारती ही ऐसा संस्थान है जो एप के जरिए छात्रों को त्रिस्तरीय शिक्षा मुहैया करा रहा है। इस व्यवस्था को जरिए छात्रों को विषय वस्तु की गहनता से जानकारी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि विद्या भारती ने छात्रों को गुणवत्तापरक और रोजगारपरक शिक्षा देने के संकल्प के साथ विद्या प्रबोधन एप को भी शुरू किया है। जिसका फायदा लाखों छात्रों को मिलेगा।

कार्यक्रम में  मुख्यमंत्री के ओएसडी  अभिषेक कौशिक, विशिष्ट अतिथि भारत संचार निगम लिमिटेड, लखनऊ के महाप्रबंधक मोबाइल सेवाएं आलोक मिश्रा  और अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सहारा के सम्पादक  विकास शुक्ला जी शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन भारतीय शिक्षा परिषद के सचिव  दिनेश  ने किया और अतिथियों का परिचय विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के सह प्रचार प्रमुख भास्कर दूबे  ने कराया। कार्यक्रम के अंत में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के अवध प्रांत के निरीक्षक  राजेन्द्र बाबू  ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

इससे पहले अतिथियों को मास्क, अंगवस्त्र और ‘गो-लोक की ओर’ पुस्तक देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मा. हेमचंद्र , बालिका शिक्षा प्रमुख  उमाशंकर मिश्रा , वरिष्ठ प्रचारकरजनीश पाठक , एलएमएस के तकनीकी निदेशक  अमिताभ बैनर्जी शक्ति सिंह  और शिक्षकगण सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

डीएससी 01: कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के राष्ट्रीय मंत्री मा. शिवकुमार और मंच पर दाहिने से विशिष्ट अतिथि भारत संचार निगम लिमिटेड, लखनऊ के प्रधान महाप्रबंधक मोबाइल सेवाएं  आलोक मिश्रा  कार्यक्रम अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष सदानंद प्रसाद गुप्त और विशिष्ट अतिथि इंटरनेशनल मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म आर्थर डी लिटल के इंडिया एंड साउथ ईस्ट एशिया के मैनेजिंग पार्टनर एंड सीईओ  बारनिक चित्रण मैत्रा जी।

डीएससी 02: कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि इंटरनेशनल मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म आर्थर डी लिटल के इंडिया एंड साउथ ईस्ट एशिया के मैनेजिंग पार्टनर एंड सीईओ  बारनिक चित्रण मैत्रा  और मंच पर दाहिने से विशिष्ट अतिथि भारत संचार निगम लिमिटेड, लखनऊ के प्रधान महाप्रबंधक मोबाइल सेवाएं आलोक मिश्रा  कार्यक्रम अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष  सदानंद प्रसाद गुप्त  और मुख्य वक्ता विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के राष्ट्रीय मंत्री शिवकुमार ।

डीएससी 03: कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रमुख सचिव,  मुख्यमंत्री एवं सूचना  संजय प्रसाद को अंगवस्त्र और ‘गो-लोक की ओर’ पुस्तक देकर सम्मानित करते हुए विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश  के अवध प्रांत के प्रदेश निरीक्षक  राजेन्द्र बाबू ।

डीएससी 04: प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकगण और अन्य।

 

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