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गऊ माता की महत्ता

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

लखनऊ। भारत के प्राचीन ऋषि तप,शोध व अनुसन्धान के साधक थे। इसी के बल पर उन्होंने गऊ माता के महत्व को प्रतिपादित किया था। दुनिया में यही एक मात्र जीव है जिसके दुग्ध,गोबर व मूत्र का ओषधि के रूप में महत्व है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गौ संरक्षण के प्रति कटिबद्धता से प्रयास कर रही है।

प्रदेश में बड़ी संख्या में गौ संरक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे है। इनमें भूसा आदि की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश है। बेसहारा गोवंश को पालने वाले को सरकार ने प्रतिमाह नौ सौ रुपये देने की व्यवस्था की है। इसी क्रम में योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर गोपाष्टमी से पहले शनिवार को ‘गो लोक की ओर’ पुस्तक का विमोचन किया।

यह पुस्तक गौ सेवक एवं विद्या भारती प्रचार विभाग के प्रचार प्रमुख सौरभ मिश्रा के द्वारा संकलित की गई है। इस पुस्तक में गौ और गौ वंश की महत्ता के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह पुस्तक पांच खंडों प्राच्य खंड,मातृ खंड, कलि खंड,विज्ञान खंड और उपासना खंड में विभाजित है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘गो लोक की ओर’ पुस्तक बड़ी सहज और सरल भाषा में है। इस पुस्तक ने गौ और गौवंश की महत्ता को रेखांकित करते हुए जनसाधारण को जागरूक करने का काम किया है। यह बहुत ही सराहनीय है। गोवंश के संरक्षण हेतु समाज को भी जागरूक होना पड़ेगा।

 

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