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दुनिया पर मंडरा रहा जैविक हमले का खतरा

  • कोरोना से 15 लाख लोगों के मरने की आशंका

न्यूयॉर्क। कोरोना का संकट विकराल होता जा रहा है। संक्रमितों और मौतों के आंकड़े हर दिन डरावने होते जा रहे है। अभी तक पूरी दुनिया में 16 लाख संक्रमित हो चुके हैं। मरने वालों का आंकड़ा 1 लाख पहुंचने वाला है। संयुक्त राष्ट्र सचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुताबिक कोरोना पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपाय नाकाफी हैं।इसके साथ उन्होंने जैविक हमले की भी आशंका जताई है। कहा है कि आतंकी जैविक हथियार से ऐसा कर सकते हैं।

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक- कोरोना महामारी के चलते 15 लाख लोगों की जान जा सकती है। आईएमएफ का कहना है कि कोरोना संकट 1930 की महान मंदी से भी बड़ा है। 170 देशों की प्रतिव्यक्ति आय में गिरावट आएगी। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि महामारी से निपटने की तैयारियों में कमी साफ दिखती है। दुनिया पर जैविक हमले का खतरा मंडरा रहा है। दुनियाभर में फैले आतंकी गुट इसका फायदा उठा सकते हैं।

गुटेरेस ने गुरुवार को सिक्योरिटी काउंसिल के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा कि कोरोना के चलते दुनिया इस वक्त खतरनाक दौर से गुजर रही है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों को इस दौरान एकजुटता दिखाने की जरूरत है। हर देश कोविड-19 की गिरफ्त में है। हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ी है। अस्पताल भरे हुए हैं। कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव है। लाखों लोगों को नौकरियां खोनी पड़ीं और बिजनेस में नुकसान हो रहा है। रोजमर्रा की जिंदगी में खासा बदलाव आया है। चिंता इस बात की है कि इससे भी ज्यादा भयावह सामने आ सकता है।

1930 की मंदी से भी ज्याद भयावह

आईएमएफ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) प्रमुख क्रिस्टीना जॉर्जीवा ने कहा कि कोरोना संकट 1930 की महान मंदी से भी बड़ा है। अभी यह और खतरनाक रूप में सामने आ सकता है। कोरोना के चलते 170 देशों की प्रतिव्यक्ति आय में गिरावट आई है। कुछ महीने पहले हम उम्मीद कर रहे थे कि 160 देशों की प्रतिव्यक्ति आय में इजाफा होगा। कोविड के चलते अर्थव्यवस्था में जो गिरावट आई है, वह अगले साल तक कुछ हद तक ही ठीक हो पाएगी। आईएमएफ ने जनवरी में इस साल के लिए ग्लोबल ग्रोथ 3.3% और 2021 के लिए 3.4% का अनुमान जताया था। मगर स्थिति इससे भी भयावह दिखाई दे रही है।

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