नेपाल में एक बार फिर तराशी जा रही हिंदू राष्ट्र बनाने की संभावनाएं

अरुण वर्मा
काठमाण्डू(नेपाल)।
समय के साथ साथ समीकरण भी बदलते रहते है। नेपाल में राजशाही शासन के जाते ही संवैधानिक व्यवस्था की नींव पड़नी शुरू हो गई और अंततः नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के तौर पर स्थापित हो गया। नेपाल राजशाही शासन काल 2008 तक हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था जंहा अब भी करीब 80 फीसदी हिन्दू आबादी ही है।

साल 2017 में ही वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंटरनेशनल की सचिव अस्मिता भंडारी कही थी कि नेपाल की एक पुरानी संस्कृति है। सनातन से ही नेपाल एक हिंदू अधिराज्य रहा वही नेपाल में हिंदू राजा था। वो दौर सब के लिए बेहतर था। मित्र राष्ट्र के बदले राजनीतिक समीकरण से नेपाल में एक बार फिर हिन्दू राष्ट्र की संभावनाओं को तलाशना शुरू कर दिया है। नेपाल सरकार में मुख्य विपक्ष पार्टी नेपाली कांग्रेस के महामंत्री शशांक कोइराला द्वारा दिन शनिवार को किये गए पत्रकार वार्ता के दौरान जनमत संग्रह कराये जाने के इशारे से अब इसकी संभावनाएं बढ़ती दिख रही है। इधर भारत के उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के आने के बाद नेपाल में फिर से हिंदू राष्ट्र बनने की मांग जोर पकड़ रही है।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेता दीपक भंडारी का कहना है कि हमारा मानना है कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहिए। नेपाल की विश्व में हिन्दू राष्ट्र के रूप में ही पहचान है। नेपाल में राजशाही से लोकतंत्र का सफर लंबा और मुश्किल भरा रहा है। नेपाल में लोकतंत्र में यकीन रखने वाली ताकतों का कहना है कि हिंदू राष्ट्र के नारे से देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।