विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दिवस ( 10 अक्‍टूबर ) विशेष

तनाव के चलते आत्‍मघाती कदम उठाने से गुरेज नहीं करते युवा

  • इस बार आत्‍महत्‍या थीम पर आधारित हैं विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दिवस
  • परीक्षा का दबाव, परिवार का विघटन, सपने पूरे न होने से होता है अवसाद

संतकबीरनगर। कम समय में सपनों को पूरा करने की चाहत, टूट रहे रिश्‍ते, पढ़ाई और परीक्षा का दबाव, करियर को लेकर चिन्‍ता के चलते वर्तमान समय में युवाओं के अन्‍दर अक्‍सर आत्‍महत्‍या के खयाल आते हैं। तनाव और अवसाद तथा सहनशीलता के अभाव के चलते वे खुद को खत्‍म कर देने जैसा आत्‍मघाती कदम तक उठा लेते हैं। इसलिए आवश्‍यकता इस बात की है कि समय रहते हुए उनके तनाव के कारणों को समझा जाय, उनकी मानसिक स्थिति का इलाज हो सके। ताकि आत्‍महत्‍या को रोका जा सके।

उक्‍त बातें जिला संयुक्‍त चिकित्‍सालय के मनोवैज्ञानिक अमरेन्‍द्र कुमार ने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर चर्चा के दौरान कहीं। उन्‍होने बताया कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने इस बार विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दिवस ( 10 अक्‍टूबर ) की थीम “आत्महत्या को रोकने के लिए मिलकर काम करना” तय की गयी हैं । भारत में आत्महत्या का अनुपात काफी ज्यादा है। रिश्ते टूटना, परिवार का टूटना, कामयाबी न मिलना और सपनों के पूरा न होने से व्यक्ति तनाव और अवसाद का शिकार होता है। यही आत्महत्या का कारण बनता है। इसमें परीक्षा में दबाव और पढ़ाई के दबाव को भी शामिल किया जा सकता है।  उनका कहना है कि पढ़ाई के बाद परिवार की जिम्मेदारी आती है जिसका दबाव युवा झेलने में फेल हो जाते हैं। अवसाद अनुवांशिक भी होता है, आत्महत्या का एक यह भी कारण बनता है।

आभासी दुनिया के चलते अवसाद में जी रहे युवा
मनोवैज्ञानिक डॉ तन्‍वगी मणि शुक्‍ला के अनुसार आजकल युवा वर्ग खुद को टीवी या फिल्मों में दिखाए किरदार को खुद में महसूस करता है। वह आभासी दुनिया में जीता है। जो वह वास्‍तव में होता नहीं है। सोशल मीडिया के चलते भी युवाओं के एक वर्ग में अवसाद पैदा हो रहा है।  विवाहेत्‍तर  संबंधों का चलन काफी बढ़ा है जो बाद में अवसाद का कारण बनता है। प्रेम में असफल होने पर भी युवा आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। यही कारण है कि आत्महत्या करने में युवाओं की संख्या ज्यादा है।

क्‍या कहते हैं विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के आंकड़े
मनोवैज्ञानिक अमरेन्‍द्र कुमार के अनुसार विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि विश्व में हर 40सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। आत्महत्या करने वालों में सबसे ज्यादा अनुपात 15-29 साल के लोगों का है। कम आय वाले देशों में आत्महत्या का अनुपात 79 फीसदी है। भारत भी इसी में शामिल है। आत्महत्या के लिए सबसे अधिक लोग जहरीला पदार्थ, फंदे पर लटककर, शरीर में आग लगाने जैसी युक्तियों का इस्‍तेमाल करते हैं ।

ये हैं अवसाद के लक्षण
उदासी, आंसूपन, खालीपन या निराशा की भावनाएं । बार-बार गुस्‍सा आना, चिड़चिड़ाहट या निराशा में वृद्धि । सबसे सामान्य या सुखद गतिविधियों में भी रूचि का न होना और लगातार बोरियत की भावना बनी रहना । अनिद्रा की भांति या तो नींद में परेशानी अथवा अत्यधिक नींद आना । छोटे कार्यों में भी थकान और ऊर्जा की कमी । भूख में बदलाव – या तो कम भूख लगना और वजन घटना अथवा भूख ज्‍यादा लगना और वजन बढ़ना । ध्यान केंद्रित करने और निर्णय लेने में परेशानी । काम और पेशेवर कैरियर में दक्षता की कमी ।

जिला चिकित्‍सालय में आज लगा मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य शिविर

सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने बताया कि 7 अक्‍टूबर से 13 अक्‍टूबर मानसिक जागरुकता सप्‍ताह मनाया जा रहा है। इस क्रम में विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दिवस के अवसर पर 10 अक्‍टूबर को जिला संयुक्‍त चिकित्‍सालय परिसर में विशाल मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर में सुबह 9 बजे से मरीजों को देखा जाएगा। साथ ही साथ उचित परामर्श के साथ ही संगोष्‍ठी का भी आयोजन किया जाएगा। ताकि लोगों को मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में जानकारी हो सके, साथ ही साथ समय पर उनका इलाज भी हो सके।