यूपी पुलिस : हम नहीं सुधरेंगे! ‘अपराध प्रदेश में बदलता उत्तर प्रदेश

 

 आशीष भारतीय
आशीष भारतीय

लखनऊ।  प्रदेश के मथुरा जिले में पिछले दिनों  सुरीर कोतवाली में एक दंपति ने खुद को आग के हवाले कर दिया।दोनों ही 60 फीसदी से भी ज्यादा जल चुके थे। पीडि़त दंपति के परिजनों का कहना है कि काफी समय से इन दोनों के साथ गांव के ही दबंगों द्वारा मारपीट की जा रही थी। लेकिन पुलिस इसका मुकदमा दर्ज करने को तैयार नही थी। दंपती ने अफसरों से लेकर थानाध्यक्ष तक को अपना दुख सुनाया लेकिन किसी ने एक ना सुनी।

घटनाक्रम-2

उन्नाव रेप पीडि़ता मामले में भाजपा (अब निष्कासित) पीडि़ता के चाचा के मुकदमों की पैरवी करने वाले पैरोकार (रिप्रेजेंटेटिव) ड्राइवर पर पिछले दिनों  जानलेवा हमला किया गया। पैरोकार का आरोप है कि वह पीडि़ता के वकील के सहायक अधिवक्ता से उन्नाव कचहरी से मिलकर गांव स्थित घर लौट रहा था। तभी पांच हमलावरों ने पहले रास्ते में उसका घेराव किया। फिर रात में उसके घर पर चढ़कर उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।

घटनाक्रम-3

भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा नाबालिग से बलात्कार का मामला अभी शांत नहीं हुआ कि सामूहिक दुष्कर्म के एक अन्य मामले को लेकर माखी चर्चा में है। माखी में ही सामूहिक रेप के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से क्षुब्ध पीडि़ता ने अपनी मां के साथ जिलाधिकारी कार्यालय में ही आत्मदाह करने की कोशिश की।

घटनाक्रम-4

मिर्जापुर जिले में स्कूली बच्चों को मिड-डे-मील  में केवल नमक-रोटी दिए जाने वाले प्रकरण को लोगों के सामने लाने वाले  पत्रकार पवन जायसवाल के खिलाफ ही जिला प्रशासन ने ही मुकदमा दर्ज करा दिया है। पत्रकार को सच सामने लाने की सजा के साथ ही मीडिया को एक संदेश देने की कोशिश भी की गयी है। दरअसल, 22 अगस्त को प्राथमिक विद्यालय सिऊर का एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था।अब यह सब सुनकर जंगल राज की याद नहीं आती क्योंकि जंगल राज सिर्फ एक नेता के राज में होता था। वैसे जंगलों में ऐसा कभी नहीं हुआ। ख्वामखाह जंगल बदनाम हो गए। अब इस माहौल में उत्तर प्रदेश के मुखिया कानून-व्यवस्था को लेकर चाहे जितने दावे करते हों पर हकीकत यही है कि कानून व्यवस्था तार-तार हो चुकी है। उत्तर प्रदेश अब अपराध प्रदेश में तब्दील हो गया है। ये वही प्रदेश है जिसके मुखिया योगी आदित्य नाथ कभी जोरी टालरेंस की बात करते थे।

सामूहिक बलात्कार

अब उन्नाव के माखी गांव में सामूहिक बलात्कार के मामले को उदाहरण के तौर पर लें तो साफ तौर पर लगता है कि उन्नाव के चर्चित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर कांड के बाद भी जिले की पुलिस का रवैया नहीं बदला है। दबंगो के रसूख के आगे खाकी भी कमजोर पड़ रही है। घटना कुछ इस प्रकार है। माखी थाना क्षेत्र के एक गांव की विवाहिता 17 जुलाई को अपने मायके आई थी। माता पिता 19 जुलाई को किसी रिश्तेदार के यहां चले गये । पीडि़ता का कहना है कि 24 जुलाई की रात  कुछ लोग उसके घर आए और घर के बाहर से  पिता के सड़क हादसे में घायल होने की सूचना दी। विवाहिता ने घबराकर दरवाजा खोला तो ये युवक उसे जबरिया  बाइक से अगवा कर ले गये और घर से करीब डेढ किलोमीटर दूर जंगल में ले जाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया।पीडि़ता ने इस मामले में गांव के ही तीन लोगों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली पर आरोपियों की गिरफ्तारी का कोई प्रयास नहीं किया। बलात्कार जैसे गंभीर मामले में भी पुलिस की टालमटोल से परेशान पीडि़ता अपनी मां के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची और मां-बेटी ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। मां-बेटी की किस्मत थी कि कलक्ट्रेट के भीड़-भाड़ वाले इलाके में लोगों ने उन्हें किसी तरह बचा लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को पकड़ कर उनके हाथ से पेट्रोल भरी बोतल तथा माचिस लेकर उन्हें जिलाधिकारी देवन्द्र पांडेय से मिलाया।

फेसबुक पर एक विडियो पोस्ट

जिलाधिकारी ने माखी थाना प्रभारी को आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। अब सवाल ये है कि आखिर माखी थाना पुलिस ने ऐसा रवैया क्यों अपनाया कि पीडि़ता को अपनी मां के साथ आत्मदाह करने जैसा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। साफ है कि उन्नाव के चर्चित सेंगर कांड में बदनामी झेलने के बाद भी पुलिस की कार्यशैली में किसी भी तरह का बदलाव नहीं आया है। शुक्र है कि जिलाधिकारी के दखल के बाद माखी पुलिस ने घटना में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जबकि एक अन्य आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्नाव रेप कांड में फजीहत झेल चुकी यूपी पुलिस बदनामी से उबर भी नहीं पायी थी कि शाहजहांपुर में कानून की एक छात्रा ने सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी। छात्रा ने बीती 24 अगस्त को फेसबुक पर एक विडियो पोस्ट किया था जिसमें उसने पूर्व केंद्रीय मंत्री पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने पीडि़ता समेत कई लड़कियों का यौन शोषण किया है। छात्रा ने कहा था कि चिन्मयानंद ने कई लड़कियों के जीवन को बर्बाद कर दिया है। जिस कॉलेज में छात्रा एलएलएम की पढ़ाई कर रही है। उस कॉलेज के बीजेपी नेता चिन्मयानंद निदेशक हैं।

उसने यह भी दावा किया कि उसके पास इसके सबूत हैं। वहीं उन्नाव कांड की तरह इस मामले में भी पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह आरोपी को बचाने में जुट गये। उन्होंने चिन्मयानंद पर लगे आरोपों के जवाब में कहा कि लड़की अपने एक मित्र के साथ राजस्थान भाग गयी थी।  डीजीपी  का कहना था कि बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने लड़की के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, लड़की (कानून की विद्यार्थी) पांच करोड़ रुपये की मांग कर रही थी, और मीडिया ट्रायल की धमकी दे रही थी। उन्नाव कांड की तरह यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने शाहजहांपुर  की एलएलएम की छात्रा और उसके भाई को बरेली विवि  से संबद्ध किसी अन्य लॉ कालेज में स्थानांतरित करने का आदेश देते हुए कहा, ‘हमारे लिए उनका भविष्य महत्वपूर्ण है।

ऑल इंडिया विमिन कॉन्फ्रेंस

इस छात्रा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री व भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद पर उत्पीडऩ के आरोप लगाए थे। शाहजहांपुर मामले की सुनवाई अब पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के हाथों में जा चुका है। दरअसल वकीलों के एक समूह ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को चिट्ठी लिख कर मामले की जानकारी दी थी। इस शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया और यूपी सरकार से पूछा कि छात्रा कहां है? कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि कोर्ट में छात्रा को पेश करने में कितना वक्त लगेगा? सुप्रीम आदेश से कटघरे में आयी यूपी सरकार ने कोर्ट को बताया कि छात्रा इस वक्त फतेहपुर सीकरी में है, और उसे दिल्ली पहुंचने में दो से ढाई घंटे लगेंगे। कोर्ट ने आदेश के बाद छात्रा को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया और जज छात्रा से चेंबर में मिले।

वहां जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस ए.एस.बोपन्ना ने उससे बात की। जस्टिस भानुमति ने लड़की से बातचीत के बाद कहा कि वह यूपी वापस नहीं जाना चाहती और दिल्ली में रहना चाहती है। जजों ने लड़की के वकील से पूछा कि वह कहां रहना चाहती है जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के विधिक सेवा प्राधिकरण और वाईएमसीए में रखे जाने का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही पीडि़ता को चार दिन के लिए ऑल इंडिया विमिन कॉन्फ्रेंस या वाईएमसीए में रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस दौरान लड़की से राज्य सरकार संपर्क नहीं करेगी और सिर्फ कोर्ट ही लड़की से संपर्क साध सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिये कि इस मामले की जांच के लिए जल्द एसआईटी का गठन किया जाए। इस आदेश के बाद आखिरकार उत्तर प्रदेश सरकार ने चिन्मयानंद मामले में एसआईटी का गठन कर दिया। आईजी नवीन अरोड़ा एसआईटी टीम की अगुवाई करेंगे। सुप्रीमकोर्ट ने निगरानी के लिए मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा है कि कोर्ट छात्रा द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर जांच की निगरानी करे।इसके अलावा अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को लड़की और उसके माता-पिता को सुरक्षा देने का निर्देश भी दिया है। बहरहाल इस मामले की जांच चल रही है पर जिस तरह पुलिस का समूचा तंत्र चिन्मयानंद को बचाने में लगा था उसने खाकी के इकबाल पर सवाल लगा दिये हैं।

हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं

पुलिस के इकबाल पर दाग लगाता एक और दर्दनाक घटना प्रदेश के मथुरा जिले में पिछले दिनों घटी। जिले के  सुरीर कोतवाली में एक दंपति ने खुद को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में  चालीस वर्षीय जोगिंदर और उनकी पत्नी चंद्रवती  दोनों ही 60 फीसदी से भी ज्यादा जल चुके थे। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान जोगिंदर की मौत हो गयी जबकि उसकी घायल पत्नी की हालत गंभीर बनी हुयी है। पीडि़त दंपति के परिजनों का कहना है कि काफी समय से इन दोनों के साथ गांव के ही दबंगों द्वारा मारपीट की जा रही थी।  लेकिन पुलिस इसका मुकदमा दर्ज करने को तैयार नही थी।

दंपती ने अफसरों से लेकर थानाध्यक्ष तक को अपना दुख सुनाया लेकिन किसी ने एक ना सुनी। ग्रामीणों ने कहा कि जोगिंदर और उनकी पत्नी ने सुरीर शहर में एक ईंटों के भट्टे पर काम करते थे। गांव के चार लोग उन्हें काफी समय से परेशान कर रहे थे।  ये वो लोग थे जो उनकी जमीन हड़पना चाहते थे। उन्होंने था कहा कि 23 अगस्त को हुए एक विवाद के बाद जोगिंदर के सिर पर सतपाल और उसके साथियों ने हमला किया था, लेकिन पुलिस ने उसके सिर से खून बहने के बावजूद हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

आखिर यूपी पुलिस क्या चाहती है?

मामला तूल पकडऩे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शलभ माथुर का कहना था कि इस मामले में जिसमें आरोपियों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई थी। दंपति ने दावा किया कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। एसएसपी का कहना है कि जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का पता लगाने के लिए एक विस्तृत जांच की जा रही है, जिसने मामला दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। सवाल ये है कि आखिर यूपी पुलिस क्या चाहती है? पुलिस की कार्यशैली से सरकार की लगातार फजीहत हो रही है पर इसके बाद भी शीर्ष स्तर से पुलिस के बड़े जिम्मेदारों पर मेहरबानी क्यों? इस सवाल का जवाब सियासत के गलियारों में अलग-अलग तरीकों से दिया जा रहा है।