सीमा पर तस्करी चरम पर सुरक्षा एजेंसियां ख़ामोश

  • ठूठीबारी, राजाबारी, मरचहवा सहित लक्ष्मीपुर खुर्द से जारी है तस्करी
    पाकिस्तानी छुहारा व कनाडियन मटर बना तस्करों का पसंदीदा गोरखधंधा

रिपाेर्ट-  अरुण वर्मा

महराजगंज। भारत नेपाल की सीमा पर तस्करी आम बात है इन दिनों इसमें काफ़ी इजाफा होता दिख रहा है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 के हटाये जाने के बाद भारत पाकिस्तान व्यापार समाप्त होते नेपाल के रास्ते पाकिस्तानी छुहारे की भारत में तस्करी तेज हो गयी है। ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र से हर दिन लाखों के तस्करी के माल का वारा न्यारा किया जा रहा है। वही सुरक्षा एजेंसियां मूक दर्शक बन तमाशा देख रही है। इन दिनों तस्करों के सबसे पसंदीदा पाकिस्तानी छुहारा व कनाडियन मटर बन गया है। जिसमें वे कम लागत में अच्छा मुनाफ़ा कमाने में लगे हुए है।

 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारत नेपाल की सीमा ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र से तस्करी ने काफ़ी जोर पकड़ लिया है। ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र का राजाबारी, मरचहवा, कोतवाली बंधा व लक्ष्मीपुर खुर्द इन दिनों तस्करों का सेफ जोन बन गया है। जंहा पिकअप की सहायता से हर दिन करीब 35-40 पिकअप पाकिस्तानी छुहारा व मटर सहित वियतनामी काली मिर्च की तस्करी की जा रही है। ऐसा नही है कि सम्बंधित सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी नही है अपितु उन्ही के सहयोग से इस गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा है। अब ऐसे में इस पर रोक कैसे लग सकेगी जब चौकीदार ही चोर बन गए है। इस बावत प्रभारी निरीक्षक ठूठीबारी छोटेलाल का कहना है कि उन्हें तस्करी की जानकारी नही है। जांच करा कार्यवाही की जाएगी।

नेपाली व भारतीय बाजारों के दामों में है काफी अन्तर

नेपाल में कनाडियन मटर की कीमत महज 31 रुपये प्रति किलो है जबकि भारतीय बाजारों में इसकी कीमत 48 से 50 रुपये प्रति किलो है। इस प्रकार तस्करों को प्रति किलो 19 रुपये भारतीय मुद्रा लाभ मिला करता है। ठीक उसी प्रकार पाकिस्तानी छुहारा का है नेपाल में इसकी कीमत 80 रुपये प्रति किलो जबकि भारतीय बाजारों में 150 रुपये प्रति किलो है। इसमें भी तस्करों को 70 रुपये प्रति किलो की आमदनी होती है। ऐसे ही मोटी कमाई वियतनामी कालीमिर्च, चाइनीज सुपाड़ी सहित अन्य में हुआ करती है।

सफेदपोश तथाकथित नेता भी संलग्न है इस काले कारोबार में

कम लागत मोटी कमाई और नो रिस्क के इस गोरखधंधे में अब क्षेत्र के तथाकथित व छुटभैये नेता भी मदमस्त हो गए है। दिनभर अपने अपने वाहनों से तस्करी के माल की निगहबानी में देखे जाते है। कुछ सफेदपोश तो निचलौल को ही अपना आशियाना बना बैठे है। भोर से लेकर दोपहर तक अपनी ड्यूटी बजा फिर क्षेत्र में अपना रौब गांठते है।