निवेशकों को भारी पड़े सरकार के सौ दिन,डूब गए 12.5 लाख करोड़ रुपए

नई दिल्ली। हो सकता है कि मोदी सरकार के चाहने वाले और सरकार के आर्थिक सलाहकारों को यह खबर पसंद ना आए पर सच तो यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद पहले  पहले सौ दिन के भीतर निवेशक 12.5 लाख करोड़ रुपये गंवा चुके हैं।  सोमवार को बाज़ार बंद होने के समय बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में लिस्टेड कंपनियों की बाज़ार पूंजी या उनका बाज़ार मूल्य 1,41,15, 316.39 करोड़ रुपये था, जबकि मोदी सरकार के सत्ता संभालने से एक दिन पहले यह बाज़ार मूल्य 1,53,62,936.4 करोड़ रुपये था।

3 मई से अब तक बीएसई का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 5.96 प्रतिशत, या 2,357 अंक लुढक़ चुका है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के संवेदी सूचकांक निफ्टी 5 में 3  मई से अब तक 7.23 प्रतिशत, या 858 अंक की गिरावट दर्ज की गई है।विश्लेषकों के अनुसार, शेयर बाज़ारों में गिरावट की वजूहात में आर्थिक वृद्धि की धीमी रफ्तार के अलावा विदेशी फंडों का देश से बाहर जाना व कॉरपोरेट की कम कमाई भी शामिल है। भारतीय बाज़ारों में विदेशी निवेशक  बिकवाल हो गए हैं।

बिकवाली का दबाव उस समय बढ़ा, जब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई में पेश किए गए सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में विदेशी निवेशकों पर भी सुपर-रिच टैक्स लागू कर दिया।  हालांकि इस टैक्स को लगभग एक महीने बाद वापस ले लिया गया था.नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड ( एनएसडीएल) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) सरकार गठन के बाद से अब तक 28,260.50 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं।

वही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) द्वारा एकत्र किए जाने वाले सभी सेक्टरों के सूचकांकों में, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स को छोडक़र, पिछले सौ दिनों में नकारात्मक रिटर्न ही देखने को मिली है, और निफ्टी का  पीएसयू बैंक इंडेक्स तो 26 प्रतिशत गिरा है।  बताते चलें कि पिछले महीने सरकार ने सरकारी बैंकों के बड़े स्तर पर विलय की घोषणा की थी, और अब सरकार के स्वामित्व वाले बैंकों की संख्या 12 हो जाएगी।

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार गतिरोधों के बढऩे से  मेटल इंडेक्स मे बीस फीसदी की गिरावट आई है।  विश्लेषकों का कहना है, एन्टी-डंपिंग ड्यूटी के बावजूद चीन सस्ता स्टील बेच रहा है, जिससे घरेलू धातु कंपनियों को नुकसान हो रहा है। निफ्टी के ऑटो इंडेक्स में 13.48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि ऑटो उद्योग पिछले दो दशक की सबसे भयावह मंदी का सामना कर रहा है।