मिशन 2022 की फतह के लिये जुटी BJP

  • पुनः दोहरायेगी 2017 का फार्मूला
     मिशन 2022 की रखी नींव,बूथ की मजबूती पर फोकस
     विपक्ष के चेहरों, को अपना बनाना शुरू कर दी है भाजपा
     स्वतंत्र देव को प्रदेश अध्यक्ष बना,पिछड़ा कार्ड को दी मजबूती
     योगी सरकार नें मंत्रीमंडल विस्तार में दी दलितों को वरीयता

 

 रिपाेर्ट- नन्हें खांन

 

देवरिया । भाजपा अभी से मिशन 2022 की फतह के लिये पुनः 2017 के फार्मूले को अपनाकर स्वतंत्र देव सिंह को भाजपा UP का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जहां पिछड़ा कार्ड को मजबूती दी है, वहीं दूसरी तरफ बिहार,मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी समीकरण साधनें का भरपूर प्रयास किया है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पिछड़ी जाति के केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर उनकी अगुवाई में चुनाव लड़ा था और सफल भी रहे। इसके साथ -साथ विपक्ष के चेहरों को भी भाजपा अपना बनाना शुरू कर दी है। वहीं प्रदेश की योगी सरकार नें 56 मंत्रीमंडल के विस्तार में इसका उदाहरण  किया हैं।

बताते चले कि सूबे के मुख्यमंत्री जातिय समीकरण पर ध्यान देते हुए अपनें 56 संसदीय मंत्रिमंडल पर ध्यान देते हुए 28 अगड़े, 19 पिछड़े, सात अनुूुसूुचित जाति व एक-एक सिख व मुस्लिम जाति को स्थान देकर 2017 के तर्ज पर मिशन 2022 फतह करनें का रास्ता बनानें का उदाहरण शेष किया है। योगी सरकार नें मंत्रीमंडल विस्तार के जरिये कहीं न कहीं जातीय समीकरणों को दुरूस्त करनें के साथ उन्हें संदेश देकर साही रखनें की भी कोशिश  की है।

 

ब्राह्मण और  वैश्य  का प्रतिनिधित्व बढ़ाकर अगड़ों को महत्व देनें का संदेश तो दिया ही है, वहीं पहली बार गुर्जर, गडेरिया,जाडव और कुम्हार को प्रतिनिधित्व देकर इन जातियों की भी नाराजगी दूर करनें का प्रयास किया गया है। वैसे तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में गुर्जर व कष्यप जाति के लोग रहते हैं। कुर्मी व जाडव के साथ पिछड़े और अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व बढ़ाकर भाजपा की चुनावी रणनीति को 60 बनाम 40 बनानें की जमीन तैयार कर ली गई है।

आपरेशन क्लीन के चलते बिवादों में घिरे चेहरों को किनारे करनें की कोशिसों को कुछ हद तक अमली जामा पहनानें के बावजूद ध्यान रखा गया है कि यह जातिय गणित गड़बनानें न पाये।मंत्रीमंडल विस्तार के बाद 56 संसदीय मंत्रीमंडल के विस्तार में अगड़ों और पिछड़ों व अनुसूचित जाति के बीच 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी की रणनीति पर काम किया गया है।

BJP नें दिवंगत हो चुके बड़े नेताओं के पुत्र-पुत्रियों को साथ जोड़ने के बाद दिवंगत नेताओं के याद में कार्यक्रमों को चलानें का सिलसिला शुरू किया। पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की पुण्यतिथि मनानें के साथ ही भाजपा नें उनके पुत्र नीरज शेखर को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुये राज्यसभा में भेज दिया। नीरज ने दिल्ली में केन्द्रिय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी के प्रति आभार जताया। गौर करें तों पिछले पाॅच वर्शाें में भाजपा नें विपक्ष के महापुरूषाे पर विपक्ष के कमजोरी के चलते पहले गाॅधीं  को छीना और बचे हुये महापुरूषाे पर घीरे घीरे अपना हक जमा लिया। इसकी वजह यह रही कि विपक्षी दलों ने अपने आईकान को उतनी तरजीह नहीं दी, जितना भाजपा नें दिया।

लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की गुजरात में प्रतिमा स्थापित करनें के लिये देशभर सें लोहा जुटानें के क्रम में उत्तर प्रदेश में भी भाजपा नें खूब भागदौड़ की। पटेल की जयन्ती और पुण्य तिथि पर कार्यक्रम आयोजित किये गये तथा कुछ स्थानों पर छुट्टियों का ऐलान भी कर दिया। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नें बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के प्रति अपना भावनात्मक लगाव जाहिर करते हुये उनसे जुड़े स्थलों का तीर्थ के रूप में विकास किया।

कभी बसपा नें डा0 भीम राव अम्बेडकर के नाम के सहारे अपनी जमीन तैयार की तो दूसरे दलों के लोग BSP, से दूरी बनाने लगे, लेकिन भाजपा नें इस मिथक को तोड़ते हुये कांशीराम की तस्वीर अपनें मन्चों पर लगाई,। यहां तक उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य नें तों समाजवादी नेता कपूरी ठाकुर समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं के स्मृति में एक बड़ा आयोजन किया और उनके नाम पर सड़क बनानें की भी घोषणा की। यहाॅ तक की विपक्ष के कद्दावर नेता रहें हेमवन्ती नन्दन बहुगुणा की पुत्री रीता बहुगुणा जो पहले प्रदेश में मंत्री थीं को सांसद बनाकर केन्द्र में एक स्थान दे दिया।

उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके पूर्व मुख्यमंत्री एन,डी, तिवारी जीवन भर काॅग्रेसी रहे, लेकिन आखिरी दिनों में भाजपा का दामन थामा। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री बीर बहादुर सिंह की याद में भाजपा आयोजन तो करती है और उनके पुत्र फतेह बहादुर सिंह जो बर्तमान में भाजपा के विधायक हैं को साध कर विपक्ष पर अपना दबाव बनाना शुरू कर दिया है, ताकि मिशन 2022 को फतह किया जा सके।

गौर तलब हो कि भाजपा नें परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एक तरफ जहाॅ पिछड़ा कार्ड को मजबूती दी है वहीं स्वतंत्र देव को प्रदेश अध्यक्ष का कमान सौंप कर पार्टी ने 2017 का फार्मूला आजमाया है। भाजपा नें पिछला विधानसभा चुनाव पिछड़ी जाति के केशव प्रसाद मौर्य की अगुवाई में लड़ा था और भारी सफलता हासिल की, इतना ही नहीं जातिय समीकरण को मजबूत करनें में स्वतंत्रदेव बिहार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी सहायक साबित हुये थे।

स्वतंत्र को नेतृत्व सौंप कर भाजपा नें कुर्मी समाज को साधनें के साथ ही करीब 55 फीसद पिछड़े वर्ग की आबादी को भी अपना बनानें की पहल के साथ साथ बूथ स्तर तक मजबूती के संकल्प के साथ सदस्य बनाकर जातिविहीन आधुनिक राश्ट्र की कल्पना को साकार करनें के मन्थन के साथ संगठन की मजबूती के लिए 10 सुत्रों पर पार्टी का फोकस रहा है। जबकि श्री देव मूल रूप् से मिर्जापुर के निवासी हैं, लेकिन उनकी कर्मभूमि बुन्देलखंण्ड रही है।  देव को संगठन का लम्बा अनुभव है, वह 1986 में आर,एस,एस, के प्रचारक बने और फिर 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिशद में उन्हें संगठनमंत्री बनाया।1991 में भाजपा युवा मोर्चा शाखा कानपुर और 1994 में बुन्देलखंण्ड युवामोर्चा के प्रभारी बनें। भाजपा नें उन्हे कई बार प्रदेश महामंत्री का पद सौंपा।

2012 में पार्टी नें उन्हें चुनाव मैदान में उतारा लेकिन वह चुनाव हजार गये।2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रैलियों के प्रभारी बनाये गये।2017 तक लगातार प्रदेश महामंत्री रहे। सूबे में भाजपा सरकार बननें के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नें स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई और बाद में विधान परिशद के रूप में सदस्य निर्वाचित हुए। बताते चले कि इसी समाज के ओमप्रकाश सिंह व विनय कटियार प्रदेश भाजपा का नेतृत्व कर जातीय समीकरण को साधनें में सफल रहे। इससे यह लगता है कि भाजपा मिशन 2022 को फतह करनें में सफल साबित होती दिख रही है।