शहर की दो शख्सियतों पे फिदा हो गया लखनऊ

लखनऊ।

हम फि़दा-ए-लखनऊ पर
लखनऊ फि़दा-ए-हम पर

पद्म विभूषण से सम्मानित हिंदी साहित्य में मील का पत्थर साबित हुए अमृत लाल नागर ने यह पंक्तियां आज फिर हकीकत पर उतर आयीं। मौका भी है दुबई में सम्मानित होने का और दस्तूर का जिक्र इसलिए जरूरी है कि लखनऊ ने एक बार फिर वो कर दिखाया जिसको देखकर अमृतलाल नागर की पंक्तियां हर समय सही साबित होती हैं।
बात करते हैं राजधानी लखनऊ के मशहूर वकील हरजोत सिंह की और विख्यात समाजसेवक हरिराम जायसवाल की। ये दोनों ही हस्तियां कल शुक्रवार जब खाड़ी देश दुबई में सम्मानित होंगी तो पूरा शहर अपने शहर के इन कोहनूरों पर फक्र करेगा। आखिर क्यों न हो, इन दो लोगों ने बगैर चर्चा में आये वो काम कर दिखाया जो आम आदमी करने से हिचकिचाता है। इन दोनों लोगों को यह सम्मान मानावाधिकार के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए दिया जाएगा।
वकील हरजोत सिंह केजीएमयू के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गुरमीत सिंह के बेटे हैं और इस समय राजधानी के मोतीनगर इलाके में रह रहे हैं। वहीं हरिराम जयसवाल दूसरी शख्सियत, 101 यमुना विहार कॉलोनी नियर जिला उपभोक्ता न्यायालय, मल्हौर रोड चिनहट पर रहते हैं। हरजोत सिंह के भाई डा. अमरजोत सिंह डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के सर्जरी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ. अमरजोत सिंह ने बताया कि हरजोत शुरूवाती दौर से ही मानवाधिकार को लेकर गंभीर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी ऑनर्स की डिग्री हासिल करने के बाद इंग्लैंड चले गये। वहां बार्लिंग्टन यूनिवर्सिटी से सोलिस्टार का कोर्स किया जिसके बाद ब्रिटेन में ट्रिवन वुड ला प्रैक्टिस फर्म बनायी। उनकी फर्म ज्यादातर सरकारी मामलों को लेती है। इसके अलावा मानवाधिकार से जुड़े विभिन्न केस लेती है।

हरजोत सिंह के अपने भाई अमरजोत सिंह

हरजोत सिंह के अपने भाई अमरजोत सिंह

वहीं योग सोशल सोसायटी संचालक हरिराम जयसवाल विगत चार वर्षों से योग सोशल सोसायटी संस्था से जुड़ कर समाज के हित में जैसे डेंगू महामारी के लिए लगभग लखनऊ के हर कोने में एंटी लाइव डेंगू की दवा का छिड़काव करावाया और मतदाता जागरूकता अभियान में विधानसभा चुनाव केंद्र चुनाव में बढ़-चढ़कर पूरे लखनऊ में होल्डिंग लगाकर और मतदाता जागरूकता का कार्यक्रम किया। नेकी की दीवार के माध्यम से गरीबों में कपड़े बांटना, भंडारे करवाना, कमल बांटने का कार्यक्रम भी किया है। साल में आठ से 10 बार हरिराम अपनी संस्था के साथ मिलकर योग शिविर लगाकर योग के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य रहने का का गुण सिखाते हैं।

हरिराम जयसवाल
हरिराम जयसवाल

पढऩे में और देखने में ये चीजें बहुत आसान लगती हैं पर इसे जीवन में नियमित रूप से उतारना बहुत मुश्किल काम है। इस मुश्किल काम को आसान कर दिखाया है शहर की इन दो हस्तियों ने। हम तो यही बोलेंगे- हम फि़दा-ए-लखनऊ