जाने और समझें माइग्रेन,आधासीसी रोग के ज्योतिषीय कारणों को…

लखनऊ। सिर दर्द सिर में होने वाले किसी कम, मध्यम या तीव्र दर्द को कहा जाता है जो कि सर में आंखों या कानों के ऊपर, सर के पिछले हिस्से में या गर्दन में होता है।यदि सर में चोट लगने पर आपको अचानक बहुत तेज़, सिर दर्द होता हो या गर्दन में अकड़न, बुखार, बेहोशी या आंख या कान में दर्द होना इत्यादि की शिकायत हो तो यह एक गंभीर विकार भी हो सकता है और जिसके लिए आपको तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।

इसमे ज्योतिष विज्ञान आपकी मदद कर सकता है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि यदि किसी विशेषज्ञ को जन्मकुंडली दिखाई जाए तो वह बता सकता है कि व्यक्ति में किन रोगों के आक्रण की अधिक संभावना है और उसके स्वास्थ्य की भावी स्थिति क्या है। प्राचीन समय में प्रसिद्ध रोग विज्ञानी हिप्पोक्रेट्स सबसे पहले व्यक्ति की जन्मसंबंधी तालिका का अध्ययन करता था और फिर उपचार संबंधी कोई निर्णय लेता था।

कोई भी व्यक्ति किस रोग से पीडि़त होता है, यह इस पर निर्भर करता है कि उसके भाव या राशि का संबंध जन्म कुंडली में कौन से अनिष्टकर ग्रह से किस रूप में है। ऐसा इसलिए है कि प्रत्येक राशि एक या एकाधिक शारीरिक अंगों से जुड़ी होती है। इसके साथ ही प्रत्येक ग्रह वायु, अग्नि, जल या आर्द्र प्रकृति वाला कोई एक प्रभुत्वकारी गुण लिए हुए होता है। आयुर्वेद में इसे वात-पित्त-कफ के रूप में बताया गया है। इस तरह राशि चक्र में अंकित शारीरिक अंग और प्रभुत्वकारी ग्रह की विशेषता के मेल से यह तय होता है कि किस व्यक्ति को कौन-सी बीमारी होगी।

वर्तमान समय में माइग्रेन (आंधाशीशी या अर्धकापरि) की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है ।अधिकांश लोगों के जीवन में माइग्रेन दर्द एक बड़ी बाधा के रूप में बना रहता है। चिकित्सीय दृष्टि से माइग्रेन या आंधाशीशी एक तीव्र प्रकार का सिरदर्द है जिसमे सिर के एक भाग में असहनीय पीड़ा होती है और यह दर्द कुछ घंटों से लेकर लगातार कई दिनों तक भी बना रह सकता है।

सिर, मस्तिष्क एवं आंखों, विशेष रूप से सर का अगला हिस्सा, आंखों से नीचे और सर के पीछे वाले हिस्से से लेकर खोपड़ी के आधार तक का हिस्सा मेष द्वारा नियंत्रित होता है। यह मंगल को प्रतिबिंबित करता है जो दिमाग में अग्निमय ऊर्जा का स्रोत है। सूर्य, चंद्रमा या मेष का कोई अन्य उदीयमान ग्रह जिस व्यक्ति के साथ जुड़ा होगा उसके सरदर्द की संभावना अन्य लोगों की तुलना में अधिक होगी।

वैसे तो बदलती जीवन–चर्या भागदौड़ से भरा जीवन जैसे लगातार रहने वाला तनाव, हाई बी.पी. मानसिक या भावनात्मक आघात और स्नायु तंत्र की गड़बड़ी को भी माइग्रेन पेन की उत्पत्ति का कारण माना गया है।

माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति को रह-रहकर सिरदर्द के बहुत तेज अटैक पड़ते हैं। लोग समझते हैं कि माइग्रेन सिर्फ सिर के आधे हिस्से में होता है, लेकिन ऐसा नहीं है।माइग्रेन आधे, पूरे या सिर के किसी भी भाग में हो सकता है। लगभग चार में से एक महिलाएं और 12 में से एक पुरुष माइग्रेन की समस्या से जूझते हैं। अमेरिका में इस समस्या से लगभग 30 प्रतिशत लोग ग्रस्त हैं, जबकि भारत में इससे कहीं ज्यादा लोग माइग्रेन की समस्या से परेशान हैं।माइग्रेन एक प्रकार का दीर्घकालिक सिरदर्द है, जिसमें कई घंटों या कई दिनों तक तेज दर्द रह सकता है। इस दौरान सिरदर्द, जी मिचलाने, उल्टी, कानों का बजना, सुनने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

अब ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो कुछ विशेष ग्रह और ग्रहयोगों माइग्रेन की समस्या उत्पन्न करते हैं।पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि में चन्द्रमाँ को हमारे मन, मानसिक और भावनात्मक गतिविधियों मस्तिष्क में चलने वाले विचारों, मानसिक या भावनात्मक पीड़ा आदि का कारक माना गया है इसीलिए कुंडली में चन्द्रमाँ पीड़ित होने पर अक्सर ही व्यक्ति को स्ट्रेस और सिर दर्द की समस्या बनी रहती है अब विशेष बात यही है के माइग्रेन पेन की उत्पत्ति में भी पीड़ित चन्द्रमाँ का ही रोल होता है।।

कुंडली में जब चन्द्रमाँ बहुत पीड़ित और कमजोर स्थिति में होता है तो व्यक्ति को माइग्रेन की समस्या होने की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती हैं।विशेष रूप से पीड़ित चन्द्रमाँ के कारण ही व्यक्ति को माइग्रेन की समस्या का सामना करना पड़ता है ।पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार यदि जन्म कुंडली में सूर्य पहले, दूसरे या बारहवें घर में विघ्नपूर्ण है या मंगल बहुत कमजोर है या नीच के चंद्रमा के साथ दाहक स्थिति में है तब ऐसे लोग अधकपारी सरदर्द (माइग्रेन) से पीड़ित होंगे। साथ ही यदि अनिष्टकर सूर्य या मंगल छठे घर में बैठा है (व्यक्ति की जन्म कुंडली में रोगों का द्योतक) तो व्यक्ति सरदर्द का शिकार होगा।

जन्मपत्री की कमजोरी और/या जन्मपत्री में उच्च स्थान पर बैठे अनिष्टकर देव के कारण एक रोगकारी परिस्थिति निर्मित होती है। इससे सरदर्द की संभावना बनती है। मजबूत सूर्य और मंगल, जो कि क्रमशः प्राण क्षमता और ऊर्जा के प्रतीक हैं, सुरक्षात्मक कवच प्रदान करते हैं।इसके अलावा बुध क्योंकि मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को गवर्न करता है इसलिए बुध का पीड़ित स्थिति में होना भी इसमें अपनी सहायक भूमिका निभाता है।

जन्म कुंडली में यदि चन्द्रमाँ नीच राशि (वृश्चिक) में हो, राहु, केतु या शनि के साथ होने से पीड़ित हो चन्द्रमाँ पर राहु केतु या शनि की दृष्टि हो, चन्द्रमाँ कुंडली के छटे या आठवे भाव में हो, सूर्य से पूर्णअस्त हो, चन्द्रमाँ अष्टमेश और षष्टेश के साथ होने से पीड़ित हो तो ऐसे में अधिकांशतः ही व्यक्ति को माइग्रेन पेन की समस्या होती है तथा चन्द्रमाँ के अलावा यदि बुध भी पीड़ित होना नीचस्थ होना, छटे, आठवे होना अष्टमेश से पीड़ित होना इस समस्या को तीव्र बना देता है।

यदि कुंडली में चन्द्रमाँ बहुत पीड़ित हो तो ऐसे में चन्द्रमाँ की दशा भी माइग्रेन की समस्या देती है।पीड़ित चन्द्रमाँ पर बृहस्पति की दृष्टि होने पर यह विकट रूप नहीं लेती नियंत्रण में होती है तथ चिकित्सा से व्यक्ति को लाभ मिल जाता है।माइग्रेन की समस्या में चिकित्सीय परामर्श और ट्रीटमेंट तो सर्वप्रथम है ही पर ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ विशेष उपाय भी इस समस्या के समाधान में निश्चित ही सहायक होंगे।

चिकित्सकीय उपाय के साथ ज्योतिषीय उपाय सबसे बेहद प्रभावी उपायों मेंं से एक यह है कि सुबह उठकर सूर्य की ओर देखकर कम से कम 42 दिनों तक 3, 11, 21, 51 या 108बार ओम सूर्याय: नम: या ओम आदित्याय नम: या गायत्री मंत्र का जाप करें या सूर्य नमस्कार करें। इस प्रकार सरदर्द आपसे मीलों दूर चला जाता है।मंगलवार को सूर्योदय के समय किसी चौराहे पर जाएं और एक टुकड़ा गुड़ को दांत से दो भागों मेंं बांट कर दो अलग-अलग दिशाओं मेंं फेंक दें। 5 सप्ताह लगातार यह क्रिया करें, माईग्रेन मेंं लाभ होगा।रविवार के दिन 325 ग्राम दूध अपने सिरहाने रख कर सोएं। सोमवार को सुबह उठकर दूध को पीपल के पेड़ पर चढ़ा दें, 5 रविवार यह क्रिया करें, निश्चित लाभ होगा।माइग्रेन (आधे सिर मेंं दर्द) रोग का इलाज करने के लिए प्रतिदिन ध्यान, शवासन, योगनिद्रा, प्राणायाम या फिर योगासन क्रिया करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों मेंं ठीक हो जाता है।

इन उपाय से होगा लाभ –

1. ॐ सोम सोमाय नमः का जाप करें।
2. प्रत्येक सोमवार को गाय को बताशे खिलाएं।
3. मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं।
4. प्रतिदिन दूध और जल के मिश्रण से शिवलिंग का अभिषेक करें।
5. किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद यदि आपके लिए शुभ हो तो मोती धारण कर सकते हैं।
6. प्रातः काल में उद्गीथ प्राणायाम (ॐ का धीर्घ उच्चारण) करें।
7. महामृत्युंजय मन्त्र का यथा शक्ति जाप करें।