🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞

दिनांक 01 मार्च 2019
⛅ दिन – शुक्रवार
⛅ विक्रम संवत – 2075
⛅ शक संवत -1940
⛅ अयन – उत्तरायण
⛅ ऋतु – वसंत
⛅ मास – फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार माघ)
पक्ष – कृष्ण
⛅ तिथि – दशमी सुबह 08:39 तक तत्पश्चात एकादशी
⛅ नक्षत्र – पूर्वाषाढा 02 मार्च रात्रि 05:56 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा
⛅ योग – सिद्धि सुबह 10:44 तक तत्पश्चात व्यतिपात
⛅ राहुकाल – सुबह 11:09 से दोपहर 12:34 तक
⛅ सूर्योदय – 07:03
⛅ सूर्यास्त – 18:40
⛅ दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण – स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती (ति.अ.)
💥 *विशेष –
🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 काल सर्प 🌷
▪ काल सर्प के लिए महाशिवरात्रि के दिन घर के मुख्य दरवाजे पर पिसी हल्दी से स्वस्तिक बना देना….शिवलिंग पर दूध और बिल्व पत्र चढ़ाकर जप करना और रात को ईशान कोण में मुख कर के जप करना l
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🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 विजया एकादशी 🌷
🙏🏻 फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं। यह एकादशी अपने नाम के अनुसार ही विजय प्रदान करने वाली है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस बार विजया एकादशी व्रत 02 मार्च, शनिवार को है।
🌷 व्रत विधि 🌷
🙏🏻 व्रत के एक दिन पहले (01 मार्च, शुक्रवार) पूजा स्थान पर एक बाजोट (पटिया) स्थापित करें। इस पर सप्त धान (7 प्रकार का अनाज) रखें। इसके बाद अपनी इच्छा के अनुसार सोना, चांदी, तांबा अथवा मिट्टी का कलश बनाकर अनाज पर स्थापित करें। एकादशी के सुबह स्नान आदि करने के बाद उस कलश में पंचपल्लव (पांच तरह के पेड़ के पत्ते) रखकर भगवान श्रीविष्णु की मूर्ति स्थापित करें और विधि सहित धूप, दीप, चंदन, फूल, फल एवं तुलसी से भगवान की पूजा करें।
🙏🏻 व्रती (व्रत करने वाला) पूरे दिन भगवान की कथा का पाठ करें और रात में कलश के सामने बैठकर जागरण करें। द्वादशी तिथि (03 मार्च, रविवार) को कलश किसी योग्य ब्राह्मण को दान कर दें।
🙏🏻 इस प्रकार विजया एकादशी व्रत करने से हर प्रकार की विपरीत परिस्थिति में भी विजय प्राप्त होती है।
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🌷 व्यतिपात योग 🌷
🙏🏻 व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।
🙏🏻 वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।
🙏🏻 व्यतिपात योग माने क्या देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुए नाराज हुए, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नहीं दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नहीं थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसू बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।
💥 विशेष ~ व्यतीपात योग – 01 मार्च 2019 शुक्रवार को सुबह 10:45 से 02 मार्च शनिवार को सुबह 11:32 तक व्यतीपात योग है।
🌞 ~ हिन्दू पंचाग ~ 🌞
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