वैश्विक मंदी के प्रभाव से अब तक नहीं उबर अंदेशा

दुनिया के कई देश 2008 की वैश्विक मंदी के प्रभाव से अब तक नहीं उबर पाए हैं। ऐसे में इस माह आए तीन प्रमुख बदलावों ने अर्थव्यवस्था के लिए अलार्म का काम किया है। आइए जानते हैं इसके बारे में …

1.अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भारी गिरावट   
इस माह की शुरुआत में अमेरिका के बॉन्ड यील्ड की वक्रता (कर्व) नकारात्मक दर्ज की गई। इसका मतलब है कि दुनिया की सबसे बड़ी इस अर्थव्यवस्था से लंबी अवधि के बॉन्ड खरीदने में निवेशकों का विश्वास घटा है। ऊंचा व तय मुनाफा होने पर भी निवेशकों का अमेरिका के बॉन्ड न खरीदना दर्शाता है वे मंदी की स्थिति में हैं।
2.‘यूरोप का इंजन’ मंदी की ओर  
जर्मनी को यूरोप की अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है। पिछले सप्ताह यहां इस साल की दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद में भी कमी दर्ज की गई। यह मंदी का संकेत है। संभावना जताई जा रही है कि तीसरी तिमाही में ही जीडीपी घटेगी, ऐसा हुआ तो इसे जर्मनी में तकनीकी रूप से मंदी कहा जाएगा जिसका असर पूरे यूरोप पर पड़ेगा।

3. चीन में उत्पादन घटा 
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में औद्योगिक उत्पादन अनुमान से काफी कम रहा है. इसका कारण लगातार अमेरिका से व्यापार युद्ध चलना है। डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि वह चीन के बाकी सामानों पर 10 फीसदी आयात शुल्क 15 दिसंबर से लागू करेंगे।

 

4. व्यापार युद्ध के जवाब में मुद्रा युद्ध शुरू   
ट्रंप की अधिकतम दबाव नीति के तहत चीन पर लगातार आयात शुल्क लगाए गए। जवाब में इस माह चीन ने अपनी मुद्रा युआन की कीमत घटा दी। जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी सामग्री सस्ती हो गई और विश्व बाजार में वस्तुओं के दाम में असंतुलन पैदा हो गया है।

क्या है वैश्विक मंदी 
वैश्विक मंदी एक ऐसी अवधि है जब पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी छायी रहे।  अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष मानता है कि तीन प्रतिशत या उससे कम का वैश्विक आर्थिक विकास होने की स्थिति वैश्विक मंदी के बराबर  है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2019 में यह दर तीन प्रतिशत है लेकिन इसमें कमी का खतरा बना हुआ है।

1.अब तक उठाए गए ये कदम 
सोने का भंडार बढ़ाया : दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने यह कदम उठाना शुरू कर दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तिमाही में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 224.40 टन सोना खरीदा है।

2- यूरोपीय बैंकों को राहत पैकेज : दो दिन पहले यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने बैठक करके राहत पैकेज पर योजना बनाई। ब्याज दरें घटाई जाएंगे और बॉन्ड खरीद बढ़ाने पर काम होगा।

3- केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें घटाईं : दुनियाभर के प्रमुख सेंट्रल बैंक अपनी-अपनी ब्याज दरें घटा रहे हैं. ऐसा इसलिए करना पड़ रहा है कि अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को पटरी पर बनाये रखना जरूरी हो गया है।

4- शेयर बाजार में बिकवाली : दुनियाभर के शेयर बाजारों में बिकवाली का माहौल बना हुआ है। 14 अगस्त को अमेरिकी शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक डाव जोंस प्रतिशत के लिहाज से एक दिन में सबसे ज्यादा टूट गया।

5- अमेरिका में दर घटाने की तैयारी :  ट्रंप ने कहा कि अर्थव्यवस्था को गतिमान रखने के लिए वह पेरोल कर व निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ करों को कटौती करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि अर्थशास्त्री उनसे सहमत नहीं है।