मौत और अंत्येष्टि घोटालाः सरकारी अनुदान का सीधे बंदरबाट

  • विभागीय कर्मियों ने ऐन-केन-प्रकारेण हड़प ली सरकारी रकम
  • सरकारी अफसरों के एफआईआर पर भी पुलिस ने बरती लापरवाही
  • गृह सचिव के हस्तक्षेप के बाद हो सकी तीन आरोपियों की गिरफ्तारी

मधुकर त्रिपाठी

लखनऊ। अजब देश के गजब किस्से। इस बार का किस्सा सीधे-सीधे एक ऐसे घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसे आप सुनना भी पसंद नहीं करेंगे। जिस मौत के बाद लोगों से यह उम्मीद की जाती है कि वह पीड़ित परिवार को सांत्वना दें, लेकिन यहां लोगों ने सांत्वना के लिए मिलने वाली राशि ही हड़प डाली। यह घोटाला सुनकर आप न केवल चौंकेंगे, बल्कि दांतों तले ऊंगली भी दबाने को मजबूर हो जाएंगे। इसका खुलासा हुआ तो प्रमुख सचिव श्रम समेत विभागीय मंत्री भी चौंक गए। मंत्री के आदेश पर आनन-फानन चार सदस्यीय जांच समिति बनाई और घोटालेबाजों के खिलाफ एफआईआर करवा दिया। इस पूरे घटनाक्रम से आपको लग रहा होगा कि घोटालेबाज जेल में चले गए होंगे। तो चौंकिए मत सरकारी तंत्र इतनी तेजी से काम नहीं करता, सुल्तानपुर पुलिस अभी तक केवल तीन लोगों को गिरफ्तार कर पाई है, वह भी तब जब विभागीय प्रमुख सचिव को प्रमुख सचिव गृह से कार्रवाई की गुहार लगानी पड़ी।

घटना सुल्तानपुर जिले की है। जिले की उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने सूचना दी कि कामगार की मौत या फिर उसके विकलांग हो जाने पर दी जाने वाली मदद राशि कुछ बिचौलियों और विभागीय कर्मियों ने हड़प लिया है तो विभाग में हड़कम्प मच गया। विभागीय मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने विभाग के सभी अफसरों को अपने बंगले पर तलब किया। प्रमुख सचिव श्रम सुरेश चंद्रा कहते हैं कि मंत्री की जानकारी के पहले ही विभाग ने 25 जून को चार सदस्यीय टीम का गठन कर दिया था। जिमें कानपुर के अपर श्रम आयुक्त बीके राय, लखनऊ के उप श्रमायुक्त एसपी शुक्ल, इलाहाबाद के उप श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी और श्रम प्रवर्तन अधिकारी कीर्तिवर्धन शामिल थे। उक्त समिति के जांच के दौरान विभाग में घोर अनियमितताएं मिलीं। कुल 107 प्रकरणों की जांच में समिति ने करीब 80 लाख रुपये का घोटाला पकड़ा। इसके अलावा करीब 40 लाख रुपये बिचौलियों ने बिना डर के सीधे अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए थे।

वह कहते हैं कि विभागीय अफसरों को सहसा विश्वास नहीं हो रहा था कि इस मद में भी घोटाला हो सकता है। बकौल एसपी शुक्ल, किसी भी मजदूर की मौत के बाद अंत्येष्टि के लिए और बाद में क्रिया-कर्म के लिए यह रकम सरकार सहायता के लिए देती है। अब बिचौलिए, दलाल और कर्मचारी इस रकम में भी हेराफेरी कर लेंगे, सुनकर पहली बार पूरी टीम चौंक गई थी। वह कहते हैं कि जांच के बाद समिति ने शासन को साफ लिखा कि इस मद में भारी हेराफेरी मिली है। सीधे लाभार्थी के खाते में धनराशि भेजकर उसे मूर्ख बनाकर अथवा दबाव बनाकर या एटीएम के माध्यम से पैसा निकालकर हड़प लिया गया।

समिति का कहना है कि बैंक एकाउंट को फोटोशॉप कर वास्तविक लाभार्थी के नाम के आगे फोटो और एकाउंट नम्बर बदल दिया गया और सम्पूर्ण राशि हड़प ली गई। समिति ने विभाग में काम कर रहे संविदा कर्मियों, विभागीय कर्मचारियों के अलावा वर्तमान श्रम प्रवर्तन अधिकारी रामवृक्ष एवं सहायक श्रम आयुक्त राम उजागिर यादव को दोषी पाया है। विभागीय मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं कि घोटाले में लिप्त कर्मचारियों और बिचौलियों की गिरफ्तारी करवाई जा रही है। दोषी पाए गए सभी कर्मचारियों और अफसरों को दंडित किया जाएगा।

विभागीय एफआईआर पर पुलिस ने भी बरती लापरवाही

प्रमुख सचिव श्रम सुरेश चंद्रा कहते हैं कि विभाग द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद भी सुल्तानपुर पुलिस और जिला प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा था। चार सीनियर अफसरों की टीम के मुकदमे के बाद भी कार्रवाई न होती देख मैंने सुल्तानपुर एसपी अनुराग वत्स और डीएम विवेक से सीधे बात की। दोनों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन गिरफ्तारी में ढिलाई करते रहे। मजबूर होकर मुझे प्रमुख सचिव गृह से जाकर बात करनी पड़ी तब जाकर कुछ लोगों को गिरफ्तारी संभव हो सकी।

सुल्तानपुर के एसपी अनुराग वत्स कहते हैं कि मामला सीधे मंत्री से जुड़ा था, इसलिए सीओ सिटी को सख्ती से कार्रवाई करने की ताकीद की गई थी, कुछ दिनों बाद तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। किस-किसकी गिरफ्तारी हुई, के जवाब में कहते हैं कि प्रकरण सीओ सिटी सीधे देख रहे हैं इसलिए मुझे याद नहीं है। सीओ सिटी कहते हैं कि इस प्रकरण में रुपेश श्रीवास्तव समेत कुल तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, पूरा माजरा कोतवाल ही बता पाएंगे। सिटी कोतवाल बताते हैं कि तीन लोगों में आशीष तिवारी, सत्यम तिवारी और रूपेश श्रीवास्तव शामिल हैं।

किसके नाम कितनी धनराशि हुई सीधे ट्रांसफर

रुपेश कुमार श्रीवास्तव 675000, सत्यम तिवारी 306200, श्रीकृष्ण शर्मा 225000, राजमणि मिश्र 237642, भूपेंद्र प्रताप सिंह 225000, रितेश श्रीवास्तव 225000, प्रियंका श्रीवास्तव 225000, जनकलली 98400, प्रफुल्ल श्रीवास्तव 225000, अजय कुमार राव 225000, चेतना राव 225000, मोहन हरिजन 225000, सूरज 225000, अजय कुमार गौतम 246000, नीतू 281200 और शुभम तिवारी ने 225000 रुपये सीधे अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए।

कितने फर्जी खातों में फंड ट्रांसफर करा ले गए बिचौलिए

श्रमिकों की मौत के बाद मिलने वाली रकम को मध्यस्थों ने लाभार्थियों के खाते खुलवाएं और उन्हें यह पता भी नहीं चलने दिया कि उन्हें इस मद में कोई रकम भी सरकार द्वारा भेजी गई। शकीला बानो 50000, लीलावती 205000, अजय कुमार 125000, राम कैलाश 225000, पूनम देवी 225000, उमा देवी 225000, सीतादेवी 225000, गुड्डी 225000, मुन्नू 200000, प्रेमा देवी 225000, शिवपत्ती 225000, रेनू 125000, सीता 225000, कलावती 225000, शिवकुमारी 100000, रंजना सोनी 100000, कमरुलनिशा 185000, कमला 225000, मायावती 225000, जमशाद 140000, विमला 50000 और चिंता देवी के खाते में 104000 रुपये डालकर मध्यस्थों ने बड़ी आसानी से रकम हड़प ली। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार इन सारे प्रकरण में उन्हीं लोगों का नाम है, जो मध्यस्थता करने में पकड़े गए हैं।