धूमधाम से मनाया गया सुहेलदेव राजभर जी का1010 वीं जयन्ती समारोह

रवि कुमार यादव

संत कबीर नगर। अखिल भारतीय जल सत्याग्रह आन्दोलन द्वारा देश धर्म समाज और संस्कृति रक्षक नाग भारशिव कुल दिवाकर चक्रवर्ती सम्राट भरत वंश शिरोमणि राजधिराज राष्ट्रवीर महाराजा भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी का ” एक हजार दसवीं वीं” जयन्ती समारोह धूमधाम से नेता सुबास चन्द्र बोस इण्टरमीडियट कालेज मेहदूपार धर्मसिंहवा सन्त कबीर नगर में मनाया गया। जयन्ती समारोह के मुख्य अतिथि शैलेश कुमार राजभर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय जल सत्याग्रह आन्दोलन ने भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के चित्र पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्वलित किया, और मुख्य अतिथि शैलेश कुमार राजभर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय जल सत्याग्रह आन्दोलन ने जयन्ती समारोह को समबोधित करते हुए भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा,कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर का लूटेरा विदेशी आततायी आक्रमणकारी महमूद गजनवी का सेनापति और भान्जा गजनी का शासक सैयद सालार मसऊद गाजी मिंया संपूर्ण भारत को इस्लाम बनाने का ख्वाब लेकर साढ़े चार लाख घुड़सवार जेहादी सेना लेकर भारत पर सन् १०३०ई० में आक्रमण कर दिया।

 

दिल्ली, पंजाब, सिन्ध, मुल्तान, लखनऊ, बनारस आदि को लूटते हुए तलवार के बल पर इस्लाम का प्रचार करते हुए अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चंद्र जी के मन्दिर एवं बहराइच के दूसरे सूर्य मंदिर को ध्वस्त कर अपार धन संपदा को लूट लिया,और जेहादी सेना द्वारा तलवार से जबरजस्ती इस्लाम कबूल कराया जा रहा था,जो कलमा नहीं पढ़ता उसका सिर तलवार से सिर से धड़ को अलग कर देता और काफिरों बच्चों को भाले की नोक पर टांग देता और गर्भवती महिलाओं के पेट में तलवार भोंक देता और गाँव के गाँव महिलाओं को नंगा करके सेनाओं में ढकेल देता सेनाओं के वासना हबस की शिकार महिलाओं की मृत्यु हो जाता और गाँव गाँव मुहल्लों में आग लगवा देता, जिससे पूरे भारत में हाहाकार मच गया,

श्रावस्ती सम्राट भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के भाई भरराइच ( बहराइच) के शासक भूरायदेव जी को छल से हत्या कर उनकी बहन अम्बे देवी का अपहरण कर लिया ऐसे दुर्दान्त विदेशी आतातायी लुटेरा आक्रमणकारी अत्याचारी अधर्मी अपराधी सैयद सालार मसऊद गाजी मिंया के आंतक से आजादी और धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी ने देश के 21 ( इक्कीस ) राजाओं को एकत्र कर अपने नेतृत्व में भरराइच ( बहराइच ) के चित्तौड़ा के मैदान में साढ़े चार लाख घुड़सवार जेहादी सेनाओं सहित 21 ( इक्कीसवें ) दिन सन् १०३४ दिन रविवार १०जून को चिलचिलाती धूप में सैयद सालार मसऊद गाजी मिंया का वध भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी ने करके हिन्दू धर्म संस्कृति राष्ट्र की रक्षा करके धर्म की स्थापना किये।

जिससे दो सौ वर्षो तक किसी विदेशी आक्रमणकारी की हिम्मत नही हुआ कि भारत पर आक्रमण करे, राजभर ने आगे कहा, कि भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी का जन्म बसन्त पंचमी के दिन सन् १००९ ई. श्रावस्ती में हुआ था इनके पिता का नाम (बिहारी मल|) माता का नाम जय लक्षमी और चार भाई एक बहन थे जिसमें ये अपने भाइयों में सबसे बड़े थे इनका सिंहासनारोहण 18 वर्ष की उम्र में सन् 1827 में हुआ था और स्वर्गारोहण स्वाभाविक रूप से सन् 1077 ई. में हुआ था।

श्री राजभर ने आगे कहा, कि भारतीय इतिहासकारों ने पश्चिमी सभ्यता में आकर विदेशीयों ताकतो की कठपुतली बनकर गुप्त सौदा कर हिन्दू धर्म संस्कृति देश राष्ट्र समाज रक्षक के इतिहास के साथ घोर उपेक्षा किये जिससे देश सैकड़ों साल विदेशीयों का गुलाम रहा अगर इतिहासकारो ने सच का आइना राष्ट्रवीर महाराजा भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी का अमर कृतित्व को लेखनी के माध्यम से स्वार्णाक्षरो में आम जन मानस में उतारे होते तो भारतीय नौजवानो में देश प्रेम की भावनाओं का ज्वार जनसैलाब उमड़ पड़ा होता और भारतीय इतिहास के पन्नों में मुगल काल और अंग्रेजी हुकूमत नहीं दर्ज होता जो कि राष्ट्रवीर महाराजा भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के इतिहास के साथ घोर उपेक्षा और भुलवाने के परिणाम स्वरूप देश सैकड़ों साल गुलामी की जंजीरो में जकड़ा रहना पड़ा और देश सोने की चिड़िया से कंगाल होकर घोर भुखमरी गरीबी के दल दल में जा फसा,श्री राजभर ने आगे कहा कि भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के नाम से बहराइच में राष्ट्रवीर महाराजा भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी केन्द्रीय आवासीय हिन्दू विश्वविद्यालय श्रावस्ती और प्रांगण में विशालकाय भव्य मूर्ति लगना चाहिए और पूर्वांचल राज्य अलग करके राज्य का नामकरण भी राष्ट्रवीर महाराजा भगवान श्री सुहेलदेव राजभर प्रदेश करते हुए राजधानी भगवान गुरू गोरक्षनाथ की पावन पवित्र धरती गोरखपुर को कर देना चाहिए।

श्री राजभर ने आगे कहा कि भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के वंशज भर राजभर देश धर्म समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए मुगलो अंग्रेजों से लड़ते हुए जनजाति के रूप में जीवन व्यतीत किये जो 1757 की क्रांति में अहम भुमिका होने के कारण सन् 1871 मे पूरी कौम को अपराधी घोषित कर दिया गया और तरह तरह से उत्पीड़न किया गया जो कि चौरी चौरा काण्ड में भी बढ़ चढ़कर सम्मिलित हुये जिसे भारत में साइमन कमीशन के आने पर जनजाति की सूची में रखा गया और देश की प्रथम जातीय जनगणना सन् 1931 में भी अनुसूचित जनजाति की सूची में रखा गया और बहुत से इतिहासकारो ने भी भर राजभर को अनुसूचित जनजाति माना है जो कि महाराष्ट्र, झारखंड, मध्य प्रदेश में गोंड की समनामी मानते हुए अनुसूचित जनजाति में शामिल है जो उत्तर प्रदेश में विमुक्त सांकेतिक जनजाति पिछड़ा वर्ग शामिल हैं भर राजभर को देश के विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए पिछडे़ वर्ग का वर्गीकरण कर आबादी अनुसार आरक्षण भर राजभर को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए जो न्यायोचित श्री राजभर ने आगे कहा कि सुभासपा अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर जी से जे सटी ते गईल चाहे वो कोई दल पार्टी हो या जाति समुदाय समाज ही क्यो न हो ये आस्तीन के विषैले साँप हैं जो दूध पिलायेगा उसी को डसेंगे उदाहरण के लिए ये अपने जीवन काल में प्रधान तक चुनाव कभी नहीं जीते

इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय प्रवक्ता सरोजा राजभर ने कहा कि जिला चिकित्सालय सन्त कबीर नगर और गाजीपुर जिला का नाम करण भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के नाम से होना चाहिए और प्रांगण में भव्य विशालकाय मूर्ति भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी का लगना चाहिए जिससे ऐसे महान क्रांतिकारी राष्टवादी महापुरुषों का सम्मान हो सके और पूरा विश्व इनके महान कृतित्व से परिचित हो सके,श्रीमती सरोजा राजभर जी ने आगे कहा कि समस्त हिंदू और राजभर समाज अपने -अपने गाँवों में राष्ट्रवीर महाराजा भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी प्रवेश द्वार बनवाये जिससे इनके अमर कृतित्व को आम जन मानस तक पहुँचाकर हिन्दुत्व की गरिमा और सम्मान को बढ़ाया जा सके
इसी क्रम में बस्ती मण्डल अध्यक्ष चैतू प्रसाद राजभर ने कहा कि भगवान श्री सुहेलदेव राजभर जी के नाम से सिक्का चलाया जाए और बस्ती मण्डल का नामकरण भी किया जाय, इसी क्रम में प्रमोद उर्फ लालू यादव प्रदेश अध्यक्ष,रामचन्दर शुक्ला प्रबन्धक नेता जी सुबास चन्द्र बोस इण्टरमीडियट कालेज मेहदूपार,रामकरन राजभर जिलाअध्यक्ष, श्यामधर उर्फ पम पम राजभर युवा मंच जिला अध्यक्ष,नन्दलाल राजभर द्वारा अध्यक्षता भोजपुरी विरहा गायक वीरेन्द्र यादव और उनके साथी गणों के अलावा क्षेत्रीय जनता एवं दूर -दूर से आये हजारो लोग उपस्थित रहे।

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