डॉक्टर्स भी चौक गए ये करिश्मा देखकर गर्भवती महिला

एक महिला रिश्तेदार होना चाहिए, उचित होगा यदि उसका पहले प्रसव हो चुका हो।
– वह किसी संक्रमित रोग से ग्रसित न हो, साफ सुथरे कपड़े पहने हो।
– गर्भवती महिला के प्रसव के पूरे समय तक उपस्थित रहना होगा।
– प्रसवकक्ष में स्टॉ़फ द्वारा दिये गए उपचार में बाधा उत्पन्न नहीं करनी है।
– प्रसव कक्ष में कैमरा या मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करना है।
गोंडा। सोमवार 19 अगस्त 2019 //  माँ-बच्चे के अच्छी सेहत को लेकर सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना व जननी शिशु सुरक्षा योजना जैसी कई अन्य जनलाभकारी योजनायें चलायी जा रही हैं | फिर भी गर्भवती महिलाएं अपना प्रसव संस्थागत कराने से डरती और घबराती हैं | इसकी एक वजह यह है कि प्रसव कक्ष में गर्भवती महिला का कोई “हमदर्द” नहीं होता | इसलिए प्रसव के समय गर्भवती महिला के साथ उसकी हमदर्द अर्थात उसकी ननद, बहन, भाभी, माँ, सास, देवरानी, जेठानी आदि में से कोई एक प्रसव कक्ष में “बर्थ-कंपेनियन” के रूप में उपस्थित रह सकती है | इससे प्रसूता को अपनों के नजदीक होने का एहसास होता है और हिम्मत मिलती है |
जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ0 ए0पी0 मिश्र का कहना है कि प्रसव के समय लेबर रूम में स्टाफ नर्स ही मौजूद होती हैं, जिन्हें न तो महिला के प्रसव पूर्व की पूरी सारी जानकारी और दिक्कतें मालूम होती है और न ही प्रसव पश्चात् साथ रहकर माँ और बच्चे को होने वाली परेशानियों का समय से पहचान कर उन्हें अस्पताल पहुँचाने में मदद कर सकती हैं | इसलिए सम्मानजनक प्रसव योजना (आरएमसी) व बर्थ-कंपेनियन योजना के तहत प्रसव कक्ष में गर्भवती महिला अपने किसी महिला रिश्तेदार को अपने साथ बर्थ-कंपेनियन के रूप में रख सकती है |
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्रसव के लिए आई गर्भवती महिला के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार किया जाये, जिससे उसे कोई मानसिक तनाव न हो। दरअसल, प्रसव के समय गर्भवती को पीड़ा और घबराहट का सामना करना पड़ता हैं, जिसकी वजह से अभी भी बहुत सी गभर्वती घर पर ही प्रसव कराना चाहती हैं। वहां पर उनके साथ कोई अपना रहता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा सम्मानजनक प्रसव योजना (आरएमसी) व बर्थ-कंपेनियन योजना के तहत पूर्व में ही निर्देश जारी किया गया है कि अस्पताल में भी गर्भवती महिला अपने साथ किसी एक महिला रिश्तेदार को ले जा सकती हैं। इसकी जानकारी स्वास्थ्य कर्मियों को गर्भवती महिला की अपनी पहली जांच के समय ही देनी होती है | साथ ही गर्भवती महिला किसे अपने साथ ले जाना चाहती है? उसका नाम और नंबर जांच के समय ही एएनएम के पास दर्ज कराना होता है |
इसके अलावा उन्होंने बताया कि प्रसव कक्ष में स्टाफ नर्स द्वारा बर्थ-कंपेनियन को प्रसव के पश्चात महिला और शिशु में होने वाले जटिलताओं के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है | उन्हें बताया जाता है कि कौन-कौन से गंभीर लक्षण दिखाई देने पर माँ और शिशु को तुरंत अस्पताल पहुँचाकर स्त्री रोग विशेषज्ञ व बाल रोग विशेषज्ञ से उचित परामर्श लेने चाहिए | बर्थ-कंपेनियन को ये भी समझाया जाता है कि बच्चे को छः माह तक केवल माँ का दूध ही देना है और स्तनपान कैसे कराया जाए, ये भी उन्हें अच्छे से समझाया जाता है |
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