औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठाती त्रासदी

दिलीप द्विवेदी
ऊंचाहार (रायबरेली)। एनटीपीसी की ऊंचाहार इकाई में औद्योगिक सुरक्षा कुप्रबंधन ने 34 कर्मचारियों की जान ले ली, साथ ही इनके सैकड़ों परिवारवालों को जीवन भर न भूल सकने वाली टीस दे दी। जांच रिपोर्ट में प्लांट में आग लगने के कारण पता चलेंगे, जांच टीम ऐसे औघोगिक हादसों से कैसे निपटा जाये, क्या उपाय अपनाये जाएं, इसके बारे में बतायेगी जिस पर उंचाहार से लेकर दिल्ली तक बैठकें होंगी और फिर सब कुछ ऐसे किसी ऐसे हादसे के न होने के लिए भुला दिया जायेगा। बड़ा सवाल यह है कि जब पावर प्लांट चलाने लायक नहीं था तो फिर क्यों चलाया गया? उस समय प्लांट के अधिकारी और इंजीनियर अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता क्यों भूल गये? इनके खिलाफ अगर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो ऊंचाहार के बाद देश के किसी और पावर प्लांट में ऐसे हादसे की पुनरावति होगी और सरकार फिर इस बार की ही तरह हाथ मलती रह जायेगी।
बता दें कि देश के रायबरेली में एनटीपीसी ऊंचाहार की छठी यूनिट में विगत दिनों बिजली उत्पादन के दौरान ब्वॉयलर में एक जोरदार विस्फोट होने से दो सौ से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ गए। यह विस्फोट इतना जोरदार था कि बड़ी संख्या में श्रमिक राख में दब गये। ऊंचाहार के इस परियोजना संयंत्र क्षेत्र में नवनिर्मित पांच सौ मेगावाट क्षमता की छठी इकाई में बिजली उत्पादन का काम चल रहा था। दोपहर बाद चार बजे ब्वॉयलर की ऐश पाइप में अचानक तेज आवाज के साथ धमाका हो गया। लगभग 90 फीट ऊंचाई पर विस्फोट हुआ और प्लांट के चारों ओर गर्म राख फैल गई। ब्वॉयलर के आसपास निजी कंपनी के 200 से ज्यादा श्रमिक, एनटीपीसी के कर्मचारी व अधिकारी काम में जुटे थे। ये सभी राख की चपेट में आ गए। सूचना पर एनटीपीसी प्रबंधन सक्रिय हुआ। सबसे पहले घायलों को एनटीपीसी अस्पताल लाया गया। फिर उनकी गंभीर हालत को देखते हुए रायबरेली और लखनऊ रेफर किया जाने लगा। बता दें कि घायलों में एनटीपीसी के तीन एजीएम भी शामिल हैं। इस हादसे में अब तक 34 लोगों की मौत हुइ है। इसके साथ ही 100 से ज्यादा घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जो मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं उनमें अब भी कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। हालांकि अभी भी सैकड़ों झुलसे हुए लोग अलग-अलग अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं। घटना के बाद से ही प्लांट के बाहर रोते-बिलखते बदहवास तमाम लोगों के सामने सिर्फ एक ही सवाल था कि प्लांट में काम कर रहे उनके परिजन कहां हैं ? कई लोग ऐसे थे जो अपने उन परिजन के बारे में जानना चाहते थे जो हादसे के समय प्लांट की छह नंबर यूनिट में काम कर रहे थे, लेकिन वो अब नहीं मिल रहे हैं।
बता दें कि ब्वॉयलर का तापमान 700 से 900 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। यहां कोयला जलाया जाता है। ब्वायलर एक पाइप से जुड़ा होता है, जिसके जरिए राख और धुंआ बहुत उच्च दबाव के साथ निकलता है। आगे चल कर इसका तापमान कम किया जाता है, जिस कारण राख नीचे बैठते जाती है और धुंआ चिमनी के सहारे ऊपर उठकर हवा में मिल जाता है। इसके बावजूद इसका तापमान 300 डिग्री सेल्सियस होता है। बिना यूनिट बंद किए राख साफ करने के दौरान विस्फोट हुआ, जिसमें 32 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र के कार्यकारी निदेशक रवींद्र सिंह राठी के बयान से सामने आई। क्षेत्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राठी ने बताया कि नई यूनिट से 400 मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा था। जब बाटम ऐश हूपर में 15 फुट तक राख जमा हो गई तो इसमें वैक्यूम बनने में रुकावट आने लगी। बॉयलर में हवा का दबाव माइनस पांच रखा जाता है, वह तेजी से बढऩे लगा। इस पर अधिकारियों ने उत्पादन घटा कर 190 मेगावॉट कर दिया और कोयले की सप्लाई रुकवा दी। इसके बाद बिना यूनिट बंद किए बाटम ऐश हूपर से राख नीचे गिराने की कोशिश की गई। इसी दौरान राख का एक बड़ा टुकड़ा गिरा, जिससे हूपर का जोड़ टूट गया। इससे बेहद गर्म फ्ल्यू गैस निकलने से कर्मचारी झुलस गए। उन्होंने यह भी कहा कि बॉयलर में विस्फोट नहीं हुआ है। मारीशस गए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को फोन कर घटना की जानकारी ली और त्वरित कार्रवाई के निदेज़्श दिए। राहुल गांधी घटना के अगले दिन अपने गुजरात दौरे से वक्त निकालकर रायबरेली पहुंचे। यहां उन्होंने ऊंचाहार एनटीपीसी थर्मल प्लांट में हुए हादसे में माने वालों और घायलों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने इस हादसे की न्यायिक जांच की मांग की है। नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन ने यूपी सरकार से इस हादसे पर 6 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट भी मांगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए मुआवजा देने का एलान किया है।