इनके सराहनीय प्रयास से पांच लोगों के जीवन में आई नई रोशनी

  • एपीसीआर की कानूनी सहायता से पांच कैदी रिहा
  • सभी को खिलाई संविधान के रक्षा की शपथ

नयालुक

लखनऊ। क्या आपने कभी सोचा है कि समाज में बिना जुर्म किए भी सजा मिलती है? क्या कभी आपने सोचा है कि बिना किसी गलती के जेल चले गए तो आपकी मदद कौन करेगा? क्या यह जानने की कोशिश की जेल में बिना सजा के बंद मासूमों की कौन मदद करता है?  यदि आप बिना जाने अपराध में लिप्त हो गए और सजा हो गई, लेकिन आपका कोई पैरोकार नहीं है तो आप इनसे मदद ले सकते हैं। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) जो कि गरीब और पिछड़े लोगों की कानूनी सहायता और मार्गदर्शन, गरीबों के लिए कानूनी सुरक्षा, अन्याय के शिकार लोगों के लिए कानूनी रक्षा और देश व समाज से अन्याय और अत्याचार के अंत के लिए प्रयासरत है। ऐसे वातावरण में जहां समाज के किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी अपराध के कारण समाज और स्वयं उसके घर परिवार वाले उससे नाता तोड़ लेते हैं।

इन स्थितियों में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) ऐसे व्यक्तियों की पहचान करके जो मामूली अपराधों के कारण कई महीनों और सालों से जेल की सलाखों के पीछे केवल इसलिए हैं, क्योंकि उनकी पैरवी करने वाला कोई नहीं होता है। सजा की अवधि काटने के बाद भी जमानत राशि अदा न कर पाने की स्थिति में वे जेलों मैं अपनी जिंदगी काट रहे होते हैं। एसोसिएशन ऐसे व्यक्तियों की कानूनी सहायता करके और उनकी जुर्माना राशि अदा करके उनकी रिहाई कराती है।

इसी कड़ी में कल लखनऊ जिला जेल से पांच लोगों को रिहा कराया गया, जिन की कोई भी पैरवी करने वाला नहीं था। एपीसीआर द्वारा कानूनी कार्रवाई, गहन संघर्ष और जुर्माना अदा कर के रिहाई कराई गई। एसोसिएशन के सचिव एडवोoकेट नज्मुस्साकिब खान ने इस मौके पर बताया कि पिछले कई महीनों में एपीसीआर के सतत प्रयासों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के लगभग 40 लोगों को रिहाई दिलाई गई। आज जिन लोगों की रिहाई हुई उनके सिलसिले में एडवोकेट खान ने बताया कि राज कपूर पुत्र हरी लाल ग्राम तरसे।

थाना औरस जिला उन्नाव पिछले 21 फ़रवरी 2017 से लखनऊ जेल में बंद था, घर की आर्थिक हालत स्थिर नहीं थी और न ही कोई कानूनी पैरवी करने वाला था। जेल अधीक्षक पीएन पांडेय के अनुरोध पर एपीसीआर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कैदी की कानूनी सहायता दिला कर रिहाई दिलाई। इसी तरह एक अन्य कैदी राजेंद्र गौतम पुत्र भगवानदीन निवासी पेपर मिल कॉलोनी, निशात गंज, लखनऊ पिछले पांच जून 2017 से जेल में बंद थे और सजा पूरी होने के बाद भी उनकी कोई पैरवी करने वाला नहीं था, जिसकी वजह से वह बंद था, जिसकी कानूनी सहायता कर के रिहा किया गया।

नज्मुस्साकिब खान ने बताया कि फूल मंडी झोपड़ पट्टी के पीछे, इमामबाड़ा चौक के रहने वाले इफ़्तिख़ार पुत्र माशूक अली भी 25 अगस्त 2017 से जेल की सलाखों के पीछे थे और सजा पूरी होने के बाद भी पैरवी न होने के कारण कैद थे, जिनकी दंड राशि का भुगतान कर के उन्हें रिहा कराया गया। इसी तरह राम सोहावन पुत्र शिव नाथ कश्यप निवासी सावनल पुरवा, थाना बूंदी जिला बहराइच 2013 से बंद थे, और जयशंकर उर्फ अशोक पुत्र शेर सिंह निवासी रुड़की, थाना छापला जिला रोहतक, हरियाणा भी पिछले 8 वर्षों से लखनऊ जिला जेल में बंद थे जिनकी कानूनी सहायता कर के उन्हें एपीसीआर द्वारा रिहा कराया गया।

इस अवसर पर सभी रहा किए गए कैदियों से शपथ ली गई कि वे अब समाज में एक सुलझे हुए और चरित्रवान व्यक्ति के रूप में अपना जीवनयापन करेंगे और समाज के मुख्य धारा में रहते हुए काम करेंगे। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के सचिव एडवोकेट नज्मुस्साकिब खान ने बताया कि अभी भी राज्य के विभिन्न जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। उनमें कई ऐसे गरीब व नादार कैदी भी जेल की मुसीबतें झेल रहे हैं जो मामूली अपराध के कारण सजा भुगत रहे हैं। इन कैदियों की कानूनी सहायता करके उन्हें रिहाई दिलाने और सामाजिक जीवन से जोड़ने की जरूरत है ताकि समाज में अपराध का अनुपात कम हो सके। इस अवसर पर जेलर सीपी त्रिपाठी, डिप्टी जेलर हरबंश पांडे, एपीसीआर के सचिव एडवोकेट नज्मुस्साकिब खान, एसआईओ यूपी सेंट्रल के अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ अकरम खान के अतिरिक्त जेल प्रशासन मौजूद था। इस पूरे मामले में जेल प्रशासन को पूरा सहयोग प्राप्त रहा।